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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना,  संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास तथा उससे संबंधित विषय।

संदर्भ: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने 25 अगस्त 2026 को अपने संचालन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एक दशक के परिवर्तन तथा एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में इसके उभरने का प्रतीक है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के बारे में

  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियामकीय पर्यवेक्षण के अंतर्गत विकसित किया गया था और इसे अगस्त 2016 में शुरू किया गया।
  • यह एक अंतर-संचालनीय, रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है, जो एक ही इंटरफेस के माध्यम से 24×7 तत्काल व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेन-देन की सुविधा प्रदान करती है।
  • यूपीआई के माध्यम से एक ही साझा प्लेटफॉर्म पर कई बैंक खातों तक पहुंच बनाई जा सकती है, जिससे उपयोगकर्ता विभिन्न बैंकों और भुगतान एप्लिकेशनों के बीच लेन-देन कर सकते हैं।
  • यूपीआई भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है और इसने गति, सुगमता तथा अंतर-संचालनीयता के माध्यम से डिजिटल भुगतान को सरल बनाया है।

यूपीआई: विकास का एक दशक

  • वार्षिक लेन-देन की मात्रा वित्त वर्ष 2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक हो गई, जो लगभग 13,000 गुना वृद्धि है।
  • इसी अवधि में लेन-देन का मूल्य ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गया, जो 4,000 गुना से अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
  • वर्ष 2026 में यूपीआई ने प्रतिदिन औसतन लगभग 66 करोड़ लेन-देन संसाधित किए।
  • मई 2026 में पहली बार मासिक लेन-देन 2,300 करोड़ के पार पहुंचा और 2,320 करोड़ रहा।
  • जुलाई 2026 में यूपीआई ने रिकॉर्ड 2,366 करोड़ लेन-देन दर्ज किए, जिनका कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ रहा।
  • यूपीआई पर लाइव बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 703 हो गई और जुलाई 2026 तक 741 पहुंच गई।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के डिजिटल भुगतान लेन-देन में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 84% रही।

महत्व

  • वित्तीय समावेशन: यूपीआई ने व्यक्तियों, व्यवसायों और व्यापारियों को औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाकर डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुँच का विस्तार किया है। इससे वित्तीय समावेशन मजबूत हुआ है।
  • अंतर-संचालनीय डिजिटल भुगतान: इसकी अंतर-संचालनीयता उपयोगकर्ताओं को एक साझा अवसंरचना के माध्यम से विभिन्न सहभागी बैंकों और मंचों पर तत्काल भुगतान करने की सुविधा देती है। इससे डिजिटल लेन-देन सरल, तेज और अधिक सुलभ हो गए हैं।
  • दैनिक खुदरा भुगतान: यूपीआई दैनिक व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। व्यक्ति से व्यापारी भुगतान कुल लेन-देन की मात्रा का 63% है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में व्यक्ति से व्यापारी भुगतान के 86% लेन-देन ₹500 से कम के थे। यह छोटे मूल्य वाले खुदरा भुगतानों में यूपीआई के महत्व को दर्शाता है।
  • व्यापक अपनाने के लिए डिजिटल आधार: यूपीआई के तीव्र विस्तार को भारत के व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र से समर्थन मिला है। इसमें विशेष रूप से प्रधानमंत्री जन-धन योजना द्वारा बैंक खातों तक पहुँच का विस्तार, आधार द्वारा डिजिटल पहचान एवं प्रमाणीकरण तथा डिजिटल सेवाओं तक व्यापक पहुँच के लिए किफायती दूरसंचार सुविधा शामिल हैं।
  • वैश्विक नेतृत्व: वर्ष 2025 में वैश्विक त्वरित भुगतान लेन-देन की मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49% रही। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने लेन-देन की मात्रा के आधार पर यूपीआई को विश्व की सबसे बड़ी त्वरित भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है।
  • भारत के डिजिटल अवसंरचना का वैश्विक विस्तार: यूपीआई वर्तमान में 11 देशों संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में संचालित है। इससे भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार सीमा-पार भुगतान के क्षेत्र में हुआ है।
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