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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत में मोबाइल फोन विनिर्माण की वृद्धि को बनाए रखने, घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाने और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को बढ़ावा देना के लिए ₹62,500 करोड़ के परिव्यय वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) अधिसूचित की है।
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) के बारे में
• अवधि: यह योजना वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक पाँच वर्षों के लिए है और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है।
• उद्देश्य: भारतीय मोबाइल विनिर्माण की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, उत्पादन का पैमाना बढ़ाना, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को गहरा करना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) बढ़ाना तथा विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना।

• योजना का उद्देश्य भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांडों, घरेलू बौद्धिक संपदा (IP), उत्पाद डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) को भी बढ़ावा देना है।
• यह योजना बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-LSEM) के बाद लाई गई है, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई।
• भारत वर्तमान में मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है, जबकि भारत में उपयोग किए जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर निर्मित होते हैं।
• 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी एकल निर्यात उत्पाद श्रेणी के रूप में उभरे।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
• दो लक्षित खंड: योजना में मोबाइल फोन विनिर्माण के लिए लक्षित खंड–1 (TS1) तथा भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन देने के लिए लक्षित खंड–2 (TS2) है।
- TS1 के तहत 2.25%–5% तक प्रोत्साहन, जबकि TS2 के तहत भारतीय ब्रांडों को 5% प्रोत्साहन दिया जाएगा।
• TS1 के तहत पात्रता: भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माता, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनियाँ भी शामिल हैं, का वित्त वर्ष 2025–26 में न्यूनतम ₹10,000 करोड़ का कारोबार होना आवश्यक है।
- मौजूदा ब्रांडों को वित्त वर्ष 27 में ₹5,000 करोड़ की वृद्धिशील बिक्री हासिल करनी होगी, जो प्रत्येक वर्ष ₹5,000 करोड़ बढ़ते हुए वित्त वर्ष 31 तक ₹25,000 करोड़ हो जाएगी।
• TS1 प्रोत्साहन संरचना: योजना में परिवर्तनीय बेसलाइन लागू की गई है, जिसमें आधाररेखा बिक्री पिछले वित्त वर्ष की घरेलू बिक्री में 15% जोड़कर निर्धारित की जाएगी।
- पात्र बिक्री पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। योजना की अवधि में अलग-अलग बिक्री हिस्सों के लिए दरें 2.75% से 2.25% तथा 5% से 4% तक रहेंगी।
• भारतीय ब्रांडों के लिए समर्थन: TS2 के तहत आवेदक का वित्त वर्ष 2025–26 में न्यूनतम ₹1,000 करोड़ का कारोबार होना चाहिए और उसे भारतीय ब्रांड संबंधी निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा।
- इनमें भारत में निगमित होना, IP और ट्रेडमार्क का भारत में होना, भारतीय नागरिकों द्वारा प्रबंधन नियंत्रण, 51% से अधिक भारतीय स्वामित्व, तथा भारत में इन-हाउस अनुसंधान एवं विकास और अभिकल्पन क्षमताएँ शामिल हैं।
• डिजाइन और घरेलू सोर्सिंग के लिए प्रोत्साहन: भारतीय ब्रांडों को भारतीय डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए अतिरिक्त 3% प्रोत्साहन मिलेगा। दोनों लक्षित खंडों को प्रमुख घटकों एवं सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग के लिए अधिकतम 1.5% अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
- 1.5% में डिस्प्ले मॉड्यूल (0.3%), कैमरा मॉड्यूल (0.3%), एनक्लोजर (0.5%), बैटरी (0.2%) तथा यूएसबी केबल/कनेक्टर (0.2%) शामिल हैं। इसके लिए किसी वित्त वर्ष में मोबाइल फोन की कुल इकाइयों के कम-से-कम 25% में स्थानीयकरण आवश्यक है।
• संस्थागत एवं गैर-वित्तीय सहायता: सरकार भारतीय ब्रांडों को गैर-वित्तीय सहायता भी प्रदान कर सकती है। एक सशक्त समिति आवेदनों का मूल्यांकन करके सहायता की सिफारिश करेगी।
- योजना का क्रियान्वयन परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) के माध्यम से किया जाएगा तथा प्रोत्साहन के दावे त्रैमासिक आधार पर किए जा सकेंगे।
योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व
• विनिर्माण की गति को बनाए रखना: PLI-LSEM के तहत मोबाइल फोन का उत्पादन ₹8.12 लाख करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹11.61 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि निवेश ₹7,000 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹20,500 करोड़ से अधिक रहा। मार्च 2026 में PLI-LSEM की अवधि समाप्त होने के बाद MPMS विनिर्माण की इस गति को बनाए रखने में निरंतरता प्रदान करती है।
• घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाना: मोबाइल विनिर्माण में घरेलू मूल्य संवर्धन लगभग 15% से बढ़कर करीब 23% हो गया है। MPMS घटकों और सब-असेंबली के स्थानीयकरण पर अधिक जोर देकर इसे और बढ़ाने का प्रयास करती है।
• भारतीय प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देना: यह योजना भारतीय स्वामित्व वाले ब्रांडों, घरेलू बौद्धिक संपदा (IP), उत्पाद डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देती है। इससे भारत को बड़े पैमाने पर असेंबली से आगे बढ़कर अधिक तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।
• इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना: मोबाइल विनिर्माण से विकसित होने वाली तकनीक और कुशल मानव संसाधन का लाभ लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, ड्रोन, चिकित्सा उपकरण, टैबलेट, स्मार्टवॉच तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स-गहन क्षेत्रों में मिल सकता है।
• वैश्विक भूमिका का विस्तार: 2014 से 2025 के बीच मोबाइल फोन निर्यात में 166 गुना वृद्धि हुई, जबकि वित्त वर्ष 26 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी लगभग 61% रही। MPMS का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में और अग्रणी बनाना है।
