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सामान्य अध्ययन–1: दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप सहित विश्व में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण; भारत सहित विश्व के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों की अवस्थिति के लिए उत्तरदायी कारक।
संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय सहायता योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक पाँच वर्षों की अवधि में ₹2,814 करोड़ का व्यय किया जाएगा। इसका उद्देश्य घरेलू प्रसंस्करण क्षमता का विकास करना, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना तथा आयात पर निर्भरता कम करना है।
‘महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने हेतु पूंजीगत व्यय सहायता योजना’ के बारे में

- प्रमुख पहल: यह योजना भारत की महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) का हिस्सा है।
- उद्देश्य: महत्वपूर्ण खनिजों के लिए घरेलू प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना एवं संचालन करना, घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा सुदृढ़ और संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं का विकास करना।
- वित्तीय परिव्यय: पाँच वर्षों (वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31) के लिए ₹2,814 करोड़।
- सहायता का स्वरूप: चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना के लिए पात्र निवेश पर 30% की पूंजीगत सब्सिडी।
- लक्षित प्रसंस्करण सुविधाएँ:
- लिथियम: दो प्रसंस्करण संयंत्र, जिनमें से प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन होगी।
- निकेल: दो प्रसंस्करण संयंत्र, जिनमें से प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन होगी।
- अधिकतम पूंजीगत सहायता:
- लिथियम: प्रति लाभार्थी ₹500 करोड़।
- निकेल: प्रति लाभार्थी ₹900 करोड़।
- खनिज प्रसंस्करण: इस योजना का लक्ष्य लिथियम और निकेल के अयस्कों/मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में परिवर्तित करना है।
- निकेल के उत्पादन के उप-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट की भी पुनर्प्राप्ति किए जाने की अपेक्षा है।
- लाभार्थियों का चयन: दो चरणों वाली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा:
- पात्रता निर्धारित करने के लिए आवेदनों का तकनीकी मूल्यांकन।
- वित्तीय बोली प्रक्रिया के माध्यम से, न्यूनतम लागत के मानदंड (सबसे कम पूंजीगत सहायता की मांग) के आधार पर प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन।
- सहायता वितरण तंत्र: निर्धारित परियोजना लक्ष्यों की प्राप्ति के आधार पर वित्तीय सहायता तीन किस्तों में जारी की जाएगी।
- लक्षित क्षेत्र: विद्युत गतिशीलता, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशिष्ट इस्पात।
योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व
- आयात पर निर्भरता कम करना: घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करके परिष्कृत मध्यवर्ती उत्पादों तथा उच्च शुद्धता वाले लिथियम, निकेल और कोबाल्ट पदार्थों के लिए भारत की भारी आयात निर्भरता को कम करना।
- आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता बढ़ाना: भू-राजनीतिक व्यवधानों, निर्यात प्रतिबंधों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता को कम करना। यह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण के लगभग 90% हिस्से पर चीन का नियंत्रण है।
- घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना: लिथियम और निकेल के अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों का घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण करके उन्हें उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में परिवर्तित करना तथा भारत की महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करना।
- रणनीतिक उद्योगों को समर्थन: इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS), इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और विशिष्ट इस्पात उद्योगों के लिए खनिजों की उपलब्धता को सुदृढ़ करना।
- स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देना: घरेलू क्षमताओं और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करके बैटरी विनिर्माण, कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों तथा आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को समर्थन देना।
महत्वपूर्ण खनिजों के बारे में
- महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं, जो किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास, तकनीकी उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक होते हैं।
- महत्त्वपूर्णता के निर्धारक कारक: किसी खनिज की महत्त्वपूर्णता दो कारकों के आधार पर निर्धारित की जाती है:
- उच्च आर्थिक महत्त्व।
- आपूर्ति में व्यवधान का उच्च जोखिम।
- भारत के महत्वपूर्ण खनिजों की सूची (2023): खान मंत्रालय ने भारत के लिए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची जारी की थी:
- एंटीमनी, बेरिलियम, बिस्मथ, कोबाल्ट, तांबा, गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट, हैफ्नियम, इंडियम, लिथियम, मोलिब्डेनम, नायोबियम, निकेल, प्लैटिनम समूह के तत्व (PGE), फॉस्फोरस, पोटाश, दुर्लभ मृदा तत्व (REE), रेनियम, सिलिकॉन, स्ट्रोंटियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, टिन, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम, जिरकोनियम, सेलेनियम और कैडमियम।
- महत्त्वपूर्ण खनिज समूहों का वर्गीकरण:
- प्लैटिनम समूह के तत्व (PGE): इसमें छह तत्व शामिल हैं—प्लैटिनम (Pt), पैलेडियम (Pd), रोडियम (Rh), रूथेनियम (Ru), ऑस्मियम (Os) और इरिडियम (Ir)।
- दुर्लभ मृदा तत्व (REE): इसमें 17 तत्व शामिल हैं—लैंथेनम (La), सीरियम (Ce), प्रसीओडिमियम (Pr), नियोडिमियम (Nd), प्रोमेथियम (Pm), समेरियम (Sm), यूरोपियम (Eu), गैडोलिनियम (Gd), टर्बियम (Tb), डिस्प्रोसियम (Dy), होल्मियम (Ho), एर्बियम (Er), थुलियम (Tm), इटर्बियम (Yb), ल्यूटेटियम (Lu), स्कैंडियम (Sc) और इट्रियम (Y)।
- अनुप्रयोग: ये खनिज मोबाइल फोन, टैबलेट, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल, पवन टर्बाइन और फाइबर-ऑप्टिक केबल के निर्माण के साथ-साथ रक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्रों में भी आवश्यक हैं।
- निष्कर्षण एवं परिष्करण: महत्वपूर्ण खनिज विश्वभर में पाए जाते हैं, लेकिन इनका निष्कर्षण एवं परिष्करण महँगा, तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है और इसमें ऊर्जा की खपत भी अधिक होती है।
