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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने यूरोपीय संघ (EU) परिषद में साइप्रस की अध्यक्षता के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत की राजकीय यात्रा की।
अन्य संबंधित जानकारी

- इस यात्रा से भारत-साइप्रस संबंधों में प्रगति हुई और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को “व्यापक साझेदारी” से “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया गया।
- दोनों नेताओं ने रक्षा, साइबर सुरक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी, नवाचार, एआई, शिक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों पर केंद्रित एक भविष्योन्मुखी एजेंडा अपनाया।
- यह यात्रा जून 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस की ऐतिहासिक यात्रा से उत्पन्न गतिशीलता पर आधारित है — जो पिछले दो दशकों से अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहली साइप्रस यात्रा थी।
यात्रा के मुख्य परिणाम
- रणनीतिक साझेदारी: भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया, जो रक्षा, कनेक्टिविटी, व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और क्षेत्रीय मामलों में गहन सहयोग को दर्शाता है।
- रक्षा सहयोग: द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए एक रोडमैप (2026-2031) अपनाया गया।
- फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित ‘भारत-साइप्रस द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम’ का स्वागत किया गया।
- समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योगों, संयुक्त प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनी।
- आतंकवाद-विरोध: आतंकवाद-विरोध पर एक संयुक्त कार्य समूह (JWG) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- पहलगाम और लाल किला आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की गई।
- आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस को दोहराया गया और संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित आतंकवादियों, आतंकवाद वित्तपोषण, आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों तथा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया गया।
- साइबर सुरक्षा: साइबर खतरों और साइबर अपराध के खिलाफ सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक ‘साइबर सुरक्षा वार्ता’ स्थापित करने की घोषणा की गई।
- खोज और बचाव (SAR): समुद्री समन्वय और परिचालन सहयोग को मजबूत करने के लिए खोज और बचाव (SAR) सहयोग पर एक तकनीकी व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए।
- व्यापार और निवेश: पोत परिवहन (शिपिंग), लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं, स्वच्छ ऊर्जा, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), नवाचार, अवसंरचना और डिजिटल अर्थव्यवस्था में द्विपक्षीय व्यापार तथा निवेश के विस्तार पर बल दिया गया।
- साइप्रस ने भारत और यूरोप के बीच एक निवेश द्वार के रूप में अपनी भूमिका को दोहराया।
- फिनटेक और यूपीआई कनेक्टिविटी: भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते वित्तीय संपर्क का स्वागत किया गया।
- एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और यूरोबैंक साइप्रस के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से भारत के यूपीआई (UPI) और यूरोपीय भुगतान प्रणालियों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
- नवाचार और प्रौद्योगिकी: नवाचार और प्रौद्योगिकी (इन्नोवेशन एंड टेक्नोलॉजी) पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), डिजिटल रूपांतरण (ट्रांसफॉर्मेशन) और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स, एक्सेलेरेटर्स, अनुसंधान केंद्रों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
- भारत-ईयू (EU) सहयोग: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के सफलतापूर्वक संपन्न होने का स्वागत किया गया।
- भारत- यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) तथा भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का समर्थन किया गया।
- कनेक्टिविटी और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC): भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) के लिए समर्थन दोहराया गया।
- एक ‘द्विपक्षीय कनेक्टिविटी वार्ता’ स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
- साइप्रस को यूरोप, भूमध्य सागर और हिंद-प्रशांत को जोड़ने वाले एक प्रवेश द्वार के रूप में मान्यता दी गई।
- समुद्री सहयोग: पोत परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह कनेक्टिविटी, समुद्री प्रशिक्षण, हरित पोत परिवहन और समुद्री डोमेन जागरूकता में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी।
- साइप्रस को एक महत्वपूर्ण यूरोपीय मैरीटाइम हब के रूप में स्वीकार किया गया।
- हिंद-प्रशांत सहयोग: साइप्रस “व्यापार, कनेक्टिविटी और समुद्री परिवहन” स्तंभ के तहत हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल हुआ।
- दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपना समर्थन दोहराया।
- शिक्षा और गतिशीलता : उच्च शिक्षा और अनुसंधान पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- ‘प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते’ तथा ‘सामाजिक सुरक्षा समझौते’ पर बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी।
- राजनयिक प्रशिक्षण: सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान (SSIFS) और साइप्रस की राजनयिक अकादमी के बीच राजनयिक प्रशिक्षण पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- सांस्कृतिक सहयोग: सांस्कृतिक सहयोग (2026-2030) पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- कला, विरासत संरक्षण, पर्यटन, संग्रहालयों, योग, आयुर्वेद और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया।
- अंतरिक्ष सहयोग: IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) और ‘इरेटोस्थनीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के बीच सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनी।
- 18 मई 2026 को पहले ‘भारत-साइप्रस अंतरिक्ष दिवस’ के आयोजन की घोषणा की गई।
- बहुपक्षीय सहयोग: साइप्रस ने एक सुधारीकृत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।
- दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN), राष्ट्रमंडल और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को मजबूत करने पर सहमत हुए।
- राजनयिक सहयोग: राजनयिक मामलों और दोनों देशों के लोगों के आवागमन पर समन्वय को मजबूत करने के लिए एक ‘राजनयिक वार्ता’ स्थापित करने की घोषणा की गई।
- आपदा लचीलापन : साइप्रस ने आपदा लचीलापन अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की।
- दोनों पक्षों ने जलवायु-अनुकूल (जलवायु-प्रतिस्कंदी) अवसंरचना पर सहयोग पर बल दिया।
- स्वास्थ्य कूटनीति: भारत ने द्विपक्षीय स्वास्थ्य सहयोग के हिस्से के रूप में साइप्रस को एक भीष्म क्यूब (BHISM Cube) उपहार में देने की घोषणा की।

