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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन में उनके प्रभाव।
संदर्भ: भारत ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सतत परिवहन को बढ़ावा देने तथा इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने के लिए तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के बारे में

- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) ऐसा वाहन है, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय रिचार्ज की जा सकने वाली बैटरियों में संग्रहीत ऊर्जा या ईंधन सेल द्वारा उत्पादित विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके विद्युत मोटर द्वारा संचालित होता है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रकार:
- बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEVs): ये पूर्णतः विद्युत चालित वाहन होते हैं, जो केवल रिचार्ज की जा सकने वाली बैटरियों से प्राप्त विद्युत ऊर्जा पर चलते हैं।
- हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (HEVs): इन वाहनों में आंतरिक दहन इंजन तथा विद्युत मोटर, दोनों का उपयोग किया जाता है।
- प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (PHEVs): ये हाइब्रिड वाहन होते हैं, जिनकी बैटरियों को बाहरी विद्युत स्रोत से रिचार्ज किया जा सकता है। इससे वाहन को अपेक्षाकृत अधिक दूरी तक केवल विद्युत ऊर्जा से चलाया जा सकता है।
- ईंधन सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEVs): इन वाहनों में हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन सेल के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, जो विद्युत मोटर को संचालित करती है।
भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी नीति का विकास
- भारत की ईवी यात्रा की शुरुआत (2015): भारत ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (NEMMP 2020) और फेम इंडिया योजना (FAME India Scheme) के लॉन्च के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में अपने संक्रमण की शुरुआत की। इन पहलों का उद्देश्य स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना, पेट्रोलियम आयात को कम करना तथा ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना था।
- इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टमका विस्तार: फेम योजना के बाद सरकारी नीतियों का दायरा केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें बैटरी विनिर्माण, चार्जिंग अवसंरचना, सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण, स्थानीयकरण तथा नवाचार को भी शामिल किया गया।
- विनिर्माण-आधारित विकास: हाल की पहलों, जैसे राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (2025), पीएम ई-ड्राइव, SPMEPCI तथा उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं, ने भारत को एक उभरते हुए वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में सहायता की है।
भारत के इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम का उदय
- इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तीव्र वृद्धि: वार्षिक इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री वर्ष 2016 में लगभग 50,000 इकाइयों से बढ़कर वर्ष 2025 में 23 लाख इकाइयों तक पहुँच गई, जो लगभग 46 गुना वृद्धि को दर्शाती है।
- वित्त वर्ष 2015-16 में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता 0.08% थी, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8.26% हो गई।
- इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन सबसे तेजी से बढ़ने वाले खंड के रूप में उभरे हैं।
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात वर्ष 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं।
- चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार: जुलाई 2026 तक भारत में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन थे, जिनमें 16,561 तीव्र चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं। वहीं, उद्योग जगत के विभिन्न खिलाड़ी शहरों और राजमार्गों में अति-तीव्र चार्जिंग नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रहे हैं।
- भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI): नीति आयोग ने अगस्त 2025 में इस सूचकांक की शुरुआत की। इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का परिवहन विद्युतीकरण, चार्जिंग अवसंरचना की तैयारी तथा इलेक्ट्रिक वाहन अनुसंधान एवं नवाचार के आधार पर मूल्यांकन करना है। दिल्ली, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ अग्रणी प्रदर्शनकर्ता के रूप में उभरे हैं।
- विनिर्माण एवं नवाचार: भारत में अब घरेलू स्तर पर बैटरी पैक, मोटर, ड्राइवट्रेन, विद्युत शक्ति इलेक्ट्रॉनिक्स, चार्जिंग उपकरण तथा संबंधित घटकों का विनिर्माण किया जा रहा है।
- लगभग 400 इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप बैटरी प्रौद्योगिकी, चार्जिंग अवसंरचना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम मोबिलिटी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
- निवेश में वृद्धि: वित्त वर्ष 2025 के दौरान भारत के इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम में 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 27% अधिक है।
- इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के वर्ष 2025 में 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2034 तक 191.04 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की आवश्यकता

- ऊर्जा सुरक्षा: आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करती है तथा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।
- स्वच्छ पर्यावरण: परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में सहायता करती है। परिवहन क्षेत्र भारत के कुल उत्सर्जन में लगभग 9% का योगदान देता है। साथ ही, यह शहरी वायु गुणवत्ता में सुधार करने में भी सहायक है।
- आर्थिक विकास: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है, निवेश आकर्षित करती है तथा वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करती है।
- रोजगार एवं नवाचार: विनिर्माण, बैटरी उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास तथा स्टार्टअप-आधारित नवाचार के माध्यम से रोजगार के अवसरों का सृजन करती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: बैटरी भंडारण तथा विद्युत ग्रिड के साथ एकीकरण के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देती है।
- जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताएँ: सतत विकास को बढ़ावा देने तथा भारत के दीर्घकालिक ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देती है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल

- राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (NEMMP 2020): इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक रूपरेखा प्रदान की।
- फेम इंडिया योजना (2015): इस योजना के अंतर्गत मांग प्रोत्साहन, चार्जिंग अवसंरचना के लिए सहायता तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया गया। इसे चरण-I (2015–2019) और चरण-II (2019–2024) के माध्यम से लागू किया गया।
- पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (PM E-DRIVE) योजना: ₹10,900 करोड़ के परिव्यय के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, चार्जिंग अवसंरचना, घरेलू विनिर्माण तथा सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण को समर्थन प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM), 2025: उन्नत विनिर्माण, रोजगार सृजन तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित करता है।
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: ₹18,100 करोड़ के परिव्यय के साथ 50 गीगावाट-घंटा (GWh) उन्नत रसायन सेल क्षमता स्थापित करने तथा घरेलू बैटरी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।
- राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीतियाँ: दिसंबर 2025 तक 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने इलेक्ट्रिक वाहन नीतियाँ अधिसूचित की थीं। इन नीतियों के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और अपनाने को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सब्सिडी, भूमि आवंटन, कर प्रतिपूर्ति तथा निवेश सहायता जैसे प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं।
भावी परिप्रेक्ष्य
- 30% इलेक्ट्रिक वाहन लक्ष्य: भारत का लक्ष्य वैश्विक EV30@30 पहल के अंतर्गत वर्ष 2030 तक कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 30% तक पहुँचाना है।
- चार्जिंग अवसंरचना: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में सहायता के लिए देश में वर्ष 2030 तक 13.2 लाख सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है।
- कड़े उत्सर्जन मानक: प्रस्तावित सीएएफई III (2027–2032) और सीएएफई IV (2033–2037) मानकों के तहत अधिक कड़े कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन मानक लागू किए जाएंगे, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण को गति मिलेगी।
- विकसित भारत 2047 की दिशा में: विनिर्माण क्षमता के विस्तार, बैटरियों के स्थानीयकरण, निवेश में वृद्धि तथा चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के माध्यम से भारत स्वयं को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। साथ ही, इससे ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
