• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • यह महात्मा गांधी के 9 जनवरी, 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटने की याद में प्रति वर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। 
  • प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) सम्मेलन:
    • वर्ष 2002 में एल. एम. सिंघवी की अध्यक्षता में प्रवासी भारतीयों पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया।
    • इस समिति ने सिफारिश की थी कि सरकार को प्रवासी भारतीयों के मूल स्थान से संबंधों को नवीनीकृत और मज़बूत करना चाहिये।
    • पीबीडी की शुरुआत पहली बार 2003 में प्रवासी भारतीय समुदाय को मान्यता देने और उनसे जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के काल में की गई थी।
    • प्रथम प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन 8-9 जनवरी 2003 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
    • वर्ष 2023 में 17वां प्रवासी भारतीय दिवस मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित किया गया था।
      • विषय: “प्रवासी: अमृत काल में भारत की प्रगति के लिए विश्वसनीय भागीदार”।
      • मुख्य अतिथि: गुयाना सहकारी गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मोहम्मद इरफ़ान अली मुख्य अतिथि और सूरीनाम गणराज्य के माननीय राष्ट्रपति महामहिम श्री चंद्रिकाप्रसाद संतोखी विशेष सम्मानित अतिथि।
    • 8-10 जनवरी 2025 तक तीन दिवसीय 18वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित किया गया।   
      • विषय: “विकसित भारत के लिए प्रवासी समुदाय का योगदान”।
      • मुख्य अतिथि: त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति, क्रिस्टीन कार्ला कंगालू।
    • 19वां संस्करण 2027 में होने की उम्मीद है।
    • वर्ष 2015 से प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष में एक बार (द्विवार्षिक) किया जाता है।
    • प्रवासी भारतीय दिवस विदेश मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है।
    • उद्देश्य:
      • भारत और उसके वैश्विक प्रवासियों के बीच मजबूत संबंधों को बढ़ावा देना है।
      • यह विदेशों में रहने वाले भारतीयों के साथ जुड़ने और सम्‍पर्क स्‍थापित करने तथा प्रवासी भा‍रतीयों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
      • यह भारत के विभिन्न क्षेत्रों की विविधता और प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न शहरों में आयोजित किया जाता है।
    • भारतीय डायस्पोरा (भारतीय प्रवासी):
      • भारतीय प्रवासियों से तात्पर्य भारतीय मूल के उन लोगों से है, जो या तो कई पीढ़ियों पहले या हाल ही में अन्य देशों द्वारा जारी दीर्घकालिक वीज़ा पर उन देशों में प्रवास कर गए थे और तब से वहीं रह रहे हैं।
      • भारतीय प्रवासियों में शामिल हैं:
        • भारतीय मूल के व्यक्ति (Persons of Indian Origin: PIO):
          • ऐसा व्यक्ति जो या जिसके पूर्वजों में से कोई भारतीय नागरिक था और जो वर्तमान में किसी अन्य देश की नागरिकता/ राष्ट्रीयता रखता है यानी उसके पास विदेशी पासपोर्ट है।
        • प्रवासी भारतीय नागरिक (Overseas Citizens of India: OCIs):
          • नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7A के तहत प्रवासी भारतीय नागरिक (OCIs) कार्डधारक के रूप में पंजीकृत व्यक्ति।
        • नोट: 2015 में PIO और OCI कार्डधारकों को एक श्रेणी OCI के तहत विलय कर दिया गया था।
        • अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indians: NRI):
          • एक भारतीय नागरिक जो सामान्यतः भारत से बाहर रहता है और जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है।
      • विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, नवंबर 2024 तक प्रवासी भारतीयों की कुल जनसंख्या 35,421,987 (35.42 मिलियन) थी। जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा डायस्पोरा समुदाय बन गया। इसमें लगभग 15.85 मिलियन अनिवासी भारतीय (NRIs) और 19.57 मिलियन भारतीय मूल के लोग (PIOs) शामिल हैं।
      • सबसे बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी वाले शीर्ष तीन देश संयुक्त राज्य अमेरिका (5.4 मिलियन), संयुक्त अरब अमीरात (3.6 मिलियन) और मलेशिया (2.9 मिलियन) हैं।
      • भारतीय डायस्पोरा का योगदान:
  • प्रवासी भारतीयों के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
    • प्रवासी भारतीय बीमा योजना (PBBY): वर्ष 2017 में शुरू।
    • भारत को जानो कार्यक्रम (Know India Programme)
    • ज्ञान साझाकरण कार्यक्रम: विजिटिंग एडवांस्ड ज्वाइंट रिसर्च (VAJRA)
    • प्रवासी भारतीय दिवस
    • भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) –  वर्ष 2009 में स्थापित।  
  • निष्कर्षतः प्रवासी भारतीय दिवस भारत के विकास में प्रवासी भारतीयों के महत्त्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालता है। यह वैश्विक संबंधों को मजबूत करता है और “विकसित भारत” के दृष्टिकोण की पुष्टि करता है, तथा राष्ट्रीय प्रगति एवं समृद्धि के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

ओडिशा:

  • राजधानी: भुवनेश्वर
  • मुख्यमंत्री:  मोहन चरण मांझी
  • राज्यपाल: डॉ हरि बाबू कंभमपति
  • ओडिशा की प्रमुख वास्तुकला:  
    • खंडगिरि तथा उदयगिरि की गुफाएँ:
    • भुवनेश्वर के निकट स्थित इन गुफाओं को ई.पू. पहली और दूसरी सदी में कलिंग नरेश खारवेल ने जैन मतावलंबियों के लिए बनवाया था।
  • कोणार्क के सूर्य मंदिर:
    • भारत में ओड़िशा राज्य के पुरी में कोणार्क नामक स्थान पर है।
    • यह सूर्य देवता के रथ के आकार में निर्मित है।
    • इसे गंग वंश के शासक नरसिंह देव ने तेरहवीं सदी में बनवाया था।
    • ब्लैक पैगोडा के नाम से प्रसिद्ध इस सूर्य मंदिर को वर्ष 1984 में यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया।
  • लिंगराज मंदिर:
    • ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर भगवान हरिहर (शिव और विष्णु के संयुक्त स्वरूप) को समर्पित है।
    • ग्यारहवीं सदी में निर्मित इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा ययाति प्रथम ने करवाया था।
  • पुरी का जगन्नाथ मंदिर:
    • पुरी का यह मंदिर भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पि है।
    • इनके साथ बड़े भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा स्थापित हैं।
    • इस मंदिर का निर्माण गंग राजवंश के शासक अनंत वर्मन ने बारहवीं सदी में करवाया था।
  • ओडिशा के प्रमुख त्योहार:
    • नुआखाई:
      • यह एक फसल उत्सव है, जो किसानों द्वारा नई फसल की कटाई के बाद मनाया जाता है।
    • नवकलेवर:
      • इसे नबाकलेबरा भी कहा जाता है, भगवान जगन्नाथ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो ओडिशा के पुरी में मनाया जाता है।
      • यह उत्सव तब मनाया जाता है जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की पुरानी मूर्तियों को बदलकर नई मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं।
      • नवकलेवर का अर्थ है ‘नया शरीर’ धारण करना, जिसमें देवता अपने पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर ग्रहण करते हैं।

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