संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: विमानपत्तन, इत्यादि.; भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS)-UDAN के अगले चरण ‘विकसित उड़ान’ (Viksit UDAN) का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार करना और भारत के विमानन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- ‘विकसित उड़ान’ की शुरुआत मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘संशोधित उड़ान योजना’ को मंजूरी मिलने के बाद हुई है। इसके लिए 2026–2036 की अवधि हेतु ₹28,840 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है, ताकि क्षेत्रीय संपर्क का विस्तार और विमानन बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा सके।
- ‘विकसित उड़ान’ के तहत, सरकार का लक्ष्य एक चुनौती-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर मौजूदा असेवित (unserved) हवाई पट्टियों से 100 नए हवाई अड्डों का विकास करना है।
- यह योजना दूरदराज, पहाड़ी, पूर्वोत्तर, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों पर विशेष जोर देती है, साथ ही पर्यटन स्थलों तक हवाई संपर्क को भी बढ़ाती है।
- अपनी शुरुआत के बाद से, उड़ान (UDAN) योजना ने 669 मार्गों को चालू किया है, जो 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट्स और वाटर एयरोड्रोम को जोड़ते हैं, और 1.66 करोड़ से अधिक यात्रियों के लिए हवाई यात्रा को सुगम बनाया है।

‘विकसित उड़ान‘ की मुख्य विशेषताएं
- 100 नए हवाई अड्डों का विकास: अगले आठ वर्षों में मौजूदा असेवित हवाई पट्टियों (unserved airstrips) से 100 नए हवाई अड्डों को विकसित करने के लिए ₹12,159 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है, जिससे क्षेत्रीय विमानन बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार होगा।
- बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: यह योजना सुगमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं में सुधार के लिए ₹3,661 करोड़ के परिव्यय के साथ पहाड़ी, दूरदराज, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव करती है।
- एयरोड्रोम के लिए परिचालन सहायता: RCS-ओनली (क्षेत्रीय संपर्क योजना) एयरोड्रोम, हेलीपोर्ट्स और वाटर एयरोड्रोम की दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार के लिए ₹2,577 करोड़ की परिचालन और रखरखाव (O&M) सहायता प्रदान की जाएगी।
- सुदृढ़ व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF): यह योजना 10 साल की अवधि के लिए एयरलाइन ऑपरेटरों को VGF के रूप में ₹10,043 करोड़ आवंटित करती है। पिछले ढांचे के विपरीत, एयरलाइनों को पांच वर्षों के लिए सहायता मिलेगी, जिसमें तीसरे वर्ष से फंडिंग धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
- आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए कम सेवा वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में परिचालन हेतु HAL ध्रुव (Dhruv) और डोर्नियर (Dornier) प्लेटफॉर्म सहित स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों को शामिल करने को प्रोत्साहित करती है।
भारत के विमानन क्षेत्र के लिए महत्व
- भारत के कनेक्टिविटी घाटे को पाटना: 100 नए हवाई अड्डों को विकसित करके और दूरदराज, पहाड़ी तथा आकांक्षी क्षेत्रों तक हवाई पहुंच का विस्तार करके, ‘विकसित उड़ान’ क्षेत्रीय विमानन बुनियादी ढांचे में बनी हुई कमियों को दूर करने का प्रयास करती है।
- क्षेत्रीय आर्थिक केंद्रों को मजबूत करना: बेहतर हवाई कनेक्टिविटी छोटे शहरों को राष्ट्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ सकती है, जिससे पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा।
- विमानन सुगमता बढ़ाना: निरंतर किराया सहायता और क्षेत्रीय मार्गों का विस्तार हवाई यात्रा के लोकतंत्रीकरण को गहरा कर सकता है, जिससे विमानन सुविधा महानगरों से परे भी अधिक सुलभ हो सकेगी।
- भविष्य के लिए तैयार विमानन इकोसिस्टम का निर्माण: हवाई अड्डों, हेलीपैड, मार्गों की स्थिरता और स्वदेशी विमानों की खरीद में निवेश ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के तहत भारत की दीर्घकालिक विमानन क्षमता को बढ़ा सकता है।
कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियां
- व्यावसायिक व्यवहार्यता: वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) वापस लिए जाने के बाद UDAN के एक बड़े हिस्से के लिए परिचालन जारी रखना संघर्षपूर्ण रहा है।
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक औपचारिक ऑडिट से पता चला है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रारंभिक तीन वर्षों की सब्सिडी की अवधि समाप्त होने के बाद केवल 7% से 10% उड़ान मार्ग ही व्यावसायिक रूप से टिकाऊ रहे।
- बुनियादी ढांचे की तैयारी: हालांकि UDAN ने 669 मार्गों को चालू किया है, फिर भी भारत में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी हवाई पट्टियां (airstrips) हैं जिनका उपयोग नहीं हो रहा है या बहुत कम हो रहा है।
- एयरलाइन भागीदारी: क्षेत्रीय मार्गों पर अक्सर यात्री भार कम होता है और परिचालन लागत अधिक होती है, विशेष रूप से पहाड़ी, दूरदराज और द्वीपीय क्षेत्रों में।
- पर्यावरणीय स्थिरता: भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। हवाई अड्डों, उड़ानों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के नियोजित विस्तार से विमानन संबंधी उत्सर्जन बढ़ सकता है। इसलिए, सतत विमानन ईंधन (SAF), ऊर्जा-कुशल हवाई अड्डों और स्वच्छ विमानन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देते हुए विकास सुनिश्चित करना एक प्रमुख नीतिगत चुनौती बनी रहेगी।
आगे की राह
- कनेक्टिविटी से व्यवहार्यता की ओर संक्रमण: बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ, टिकाऊ यात्री मांग पैदा करने और मार्गों की दीर्घकालिक लाभप्रदता सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
- क्षेत्रीय विकास कारकों का लाभ उठाना: आर्थिक लाभ को अधिकतम करने के लिए क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को पर्यटन सर्किट, औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स हब और आकांक्षी जिलों के साथ संरेखित करें।
- एकीकृत परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना: लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक पहुंच) में सुधार करने के लिए हवाई अड्डों और सड़क, रेल, जलमार्ग तथा सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के बीच निर्बाध संपर्क विकसित करें।
- सतत क्षेत्रीय विमानन को बढ़ावा देना: पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार विकास सुनिश्चित करने के लिए सतत विमानन ईंधन (SAF), हरित हवाई अड्डा बुनियादी ढांचे और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने के स्तर को बढ़ाएं।
