संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: भारत नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में एकीकृत करने, बिजली की बढ़ती माँग को पूरा करने और ग्रिड की स्थिरता को सुदृढ़ करने के लिए पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत (PSH) का विस्तार कर रहा है। इसके साथ ही, वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत के बारे में
- पंप्ड स्टोरेज परियोजना (PSP) एक बड़े पैमाने की ऊर्जा भंडारण प्रणाली है, जो अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पंप करती है और माँग बढ़ने पर संग्रहित पानी को टर्बाइनों से प्रवाहित करके बिजली उत्पन्न करती है।

- पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (PSPs) की कार्यप्रणाली: एक सामान्य PSP में अलग-अलग ऊँचाइयों पर स्थित दो जलाशय होते हैं, जो जलमार्गों और दोनों दिशाओं में कार्य करने वाले पंप-टर्बाइनों के माध्यम से जुड़े होते हैं।
- चरण 1 (पंपिंग एवं ऊर्जा भंडारण): अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता के दौरान, निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय तक पानी पंप करने के लिए बिजली का उपयोग किया जाता है। पानी में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के रूप में ऊर्जा संचित होती है।
- चरण 2 (विद्युत उत्पादन): जब बिजली की माँग बढ़ती है, तो ऊपरी जलाशय से पानी टर्बाइनों के माध्यम से नीचे प्रवाहित होता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है और उसे विद्युत ग्रिड को उपलब्ध कराया जा सकता है।
- चरण 3 (प्रणाली को पुनः चार्ज करना): कम माँग या अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता के दौरान, पानी को वापस ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है, जिससे प्रणाली अगले चक्र के लिए तैयार हो जाती है।
- पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के प्रकार: PSPs को नदियों, धाराओं और बारहमासी प्राकृतिक जलधाराओं के संबंध में उनके जलाशयों की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- ऑन-स्ट्रीम पंप्ड स्टोरेज परियोजना (PSP): दोनों जलाशय किसी नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होते हैं। बिजली उत्पन्न करने के लिए पानी टर्बाइनों से होकर प्रवाहित होता है और अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने पर इसे वापस ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है।
- ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप पंप्ड स्टोरेज परियोजना (PSP): एक जलाशय नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होता है, जबकि दूसरा किसी बारहमासी प्राकृतिक जलधारा से दूर स्थित होता है। बिजली उत्पन्न करने और उसका भंडारण करने के लिए दोनों जलाशयों के बीच पानी का आवागमन किया जाता है।
- ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज परियोजना (PSP): कोई भी जलाशय नदी, बारहमासी जलधारा या बारहमासी नाले पर स्थित नहीं होता है। दोनों जलाशय बारहमासी प्राकृतिक जलधाराओं से दूर स्थित होते हैं और उनके बीच जल का परिसंचरण किया जाता है।
पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत में भारत की स्थिति

- जुलाई 2026 तक, भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 300 गीगावाट को पार कर गई थी।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2031–32 तक 73.93 गीगावाट की भंडारण क्षमता की आवश्यकता का अनुमान लगाया है, जिसमें पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (PSPs) से 26.69 गीगावाट और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) से 47.24 गीगावाट शामिल हैं।
- अगस्त 2026 तक, भारत में 10 परियोजनाओं के अंतर्गत 7.43 गीगावाट की परिचालन पंप्ड स्टोरेज क्षमता थी। इसके अतिरिक्त, 15.87 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएँ निर्माणाधीन या कार्यान्वयन के अधीन थीं, जबकि 10.40 गीगावाट क्षमता की परियोजनाओं को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की सहमति मिल चुकी थी या उनका मूल्यांकन किया जा चुका था।
- भारत ने 345.38 गीगावाट की संभावित क्षमता वाली 320 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की पहचान की है। इसमें 56.67 गीगावाट क्षमता ऑन-स्ट्रीम परियोजनाओं से और 288.71 गीगावाट क्षमता ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाओं से प्राप्त हो सकती है।
- पश्चिमी क्षेत्र 129.72 गीगावाट की क्षमता के साथ अग्रणी है, इसके बाद दक्षिणी क्षेत्र 97.76 गीगावाट की क्षमता के साथ दूसरे स्थान पर है।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2035–36 तक 100.81 गीगावाट क्षमता जोड़ने की परिकल्पना की है, जिससे कुल पंप्ड स्टोरेज क्षमता लगभग 105.56 गीगावाट हो जाएगी।
- वर्ष 2025 के अंत में, भारत 7.18 गीगावाट की स्थापित पंप्ड स्टोरेज क्षमता के साथ विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर था।
पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत की चुनौतियाँ

- स्वीकृतियाँ एवं परियोजनाओं में विलंब: पर्यावरणीय एवं वन संबंधी स्वीकृतियों, वैधानिक अनुमोदनों तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में होने वाली देरी से परियोजनाओं का कार्यान्वयन धीमा हो जाता है।
- भूमि अधिग्रहण एवं पर्यावरणीय चिंताएँ: बड़े जलाशयों की आवश्यकता, भूमि स्वामित्व से जुड़ी जटिलताएँ तथा पुनर्वास संबंधी समस्याएँ स्थानीय विरोध का कारण बन सकती हैं और वनों एवं जैव विविधता को प्रभावित कर सकती हैं।
- भौगोलिक एवं तकनीकी बाधाएँ: इन परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भू-भाग, ऊँचाई में अंतर तथा विस्तृत भूवैज्ञानिक, जलवैज्ञानिक एवं भूकंपीय आकलन आवश्यक हैं।
- उच्च निवेश एवं वित्तपोषण संबंधी जोखिम: भारी पूँजी की आवश्यकता, निर्माण की लंबी अवधि तथा परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर अनिश्चितताएँ वित्तपोषण को कठिन बनाती हैं।
सरकार की पहल
- पंप्ड स्टोरेज परियोजना विकास दिशानिर्देश, 2023: विद्युत मंत्रालय ने 10 अप्रैल 2023 को परियोजनाओं के आवंटन को सुगम बनाने और उनके विकास में तेजी लाने के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश जारी किए।
- ऊर्जा भंडारण के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क, 2023: यह रूपरेखा ऊर्जा भंडारण दायित्व (Energy Storage Obligation) के लिए निर्धारित लक्ष्य-पथ सहित विभिन्न उपायों के माध्यम से ऊर्जा भंडारण को बढ़ावा देती है।
- पारेषण शुल्क में छूट: पात्र जलविद्युत पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को, जिनके निर्माण कार्य का ठेका 30 जून 2028 तक प्रदान कर दिया जाता है, अंतर्राज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क में 100% छूट मिलती है।
- प्रतिस्पर्धी खरीद एवं विनियामक सहायता: टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया और केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) के विनियम विद्युत खरीद को समर्थन देते हैं तथा पात्र पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को ग्रिड की सहायक सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं।
