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सामान्य अध्ययन-2:जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ; विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

संदर्भ: भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी चुनावों से पूर्व अद्यतन और सटीक मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तृतीय चरण की समय-सारणी जारी की है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • SIR के तृतीय चरण के अंतर्गत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जाएगा जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, पंजाब और उत्तराखंड शामिल होंगे।
  • लगभग 36.73 करोड़ निर्वाचकों के घर-घर जाकर सत्यापन के लिए 3.94 लाख से अधिक बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) को नियुक्त किया जाएगा। इस कार्य में राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ स्तर के एजेंट (BLAs) सहायता प्रदान करेंगे।
  • सत्यापन प्रक्रिया के दौरान निर्वाचकों को गणना प्रपत्र  प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेज़ केवल संदेहास्पद मामलों में ही बाद में मांगे जा सकते हैं।
  • तृतीय चरण के अंतर्गत अंतिम निर्वाचक नामावली का प्रकाशन सितंबर और दिसंबर 2026 के बीच किया जाएगा।
  • इस चरण के पूर्ण होने के साथ ही, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर संपूर्ण भारत SIR अभ्यास के अंतर्गत कवर हो जाएगा।
  • विपक्ष द्वारा SIR अभ्यास की आलोचना “परोक्ष रूप  से एनआरसी (NRC)” के रूप में की गई है, और यह मामला वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बारे में

  • निर्वाचक नामावली को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत तैयार किया जाता है।
  • निर्वाचकों का पंजीकरण नियम, 1960 के तहत, निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार निर्वाचक नामावली का पुनरीक्षण ‘गहन’ या ‘संक्षिप्त’ रूप में किया जा सकता है।
  • गहन पुनरीक्षण में क्षेत्र सत्यापन  के माध्यम से निर्वाचक नामावली को नए सिरे से तैयार किया जाता है। संक्षिप्त पुनरीक्षण में मौजूदा नामावली को ही अद्यतन किया जाता है।
  • निर्वाचक नामावली के डिजिटलीकरण के बाद, भारत में 2000 के आरंभिक दशक के बाद से अब तक राष्ट्रव्यापी गहन पुनरीक्षण नहीं किया गया था।
    • वर्ष 1951 से 2004 के बीच अब तक 8 बार SIR किया जा चुका है।
  • निर्वाचन आयोग ने तीव्र शहरीकरण, प्रवासन, प्रविष्टियों के दोहराव और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को SIR आयोजित करने के मुख्य कारणों के रूप में उद्धृत किया है।
  • संवैधानिक प्रावधान:
    • अनुच्छेद 324: यह निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति भारत निर्वाचन आयोग में निहित करता है।
    • अनुच्छेद 326: यह 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर निर्वाचनों का प्रावधान करता है।
  • सांविधिक प्रावधान:
    • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16: यह गैर-नागरिकों को निर्वाचक नामावली में पंजीकृत होने से प्रतिबंधित करती है।
    • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21: यह निर्वाचक नामावली तैयार करने और उनके पुनरीक्षण से संबंधित है।
    • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3): यह निर्वाचन आयोग को निर्वाचक नामावली के विशेष पुनरीक्षण का आदेश देने हेतु सशक्त बनाती है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आवश्यकता

  • अपात्र मतदाताओं को हटाना: इस अभ्यास का उद्देश्य निर्वाचक नामावली से दोहराव, मृत, स्थानांतरित और गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान करना और उन्हें हटाना है।
  • एक व्यक्ति, एक मत” के सिद्धांत का पालन: दोहराव और अशुद्धियों को ठीक करके, SIR राजनीतिक समानता और चुनावी अखंडता को सुदृढ़ करता है।
  • निर्वाचक नामावली की सटीकता में सुधार: यह पुनरीक्षण प्रवासन, शहरीकरण और नए पात्र युवा मतदाताओं के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के समाधान में सहायता करता है।
  • चुनावी विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना: अद्यतन और सत्यापित मतदाता सूचियाँ चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बढ़ाती हैं।

चिंताएँ और चुनौतियाँ

  • अपवर्जन (Exclusion) का जोखिम: प्रवासियों, वृद्ध नागरिकों, दिव्यांगजनों (PwDs) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दस्तावेजीकरण और सत्यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
  • कथित एनआरसी जुड़ाव: आलोचकों का तर्क है कि नागरिकता सत्यापन पर जोर देने के कारण SIR “परोक्ष रूप से एनआरसी” बन सकता है।
  • आधार संबंधी चिंताएँ: चूंकि आधार को केवल पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है, नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं, इसलिए कई संवेदनशील नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
  • अभ्यास का राजनीतिकरण: विपक्षी दलों ने सरकारी मशीनरी के संभावित दुरुपयोग और मतदाताओं के मनमाने ढंग से विलोपन के संबंध में चिंताएँ व्यक्त की हैं।

आगे की राह

  • राजनीतिक आम सहमति बनाना: राजनीतिक दलों के साथ व्यापक परामर्श से SIR प्रक्रिया के प्रति विश्वास, पारदर्शिता और स्वीकार्यता में सुधार हो सकता है।
  • प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना: एआई (AI) सक्षम सत्यापन प्रणाली, बहुभाषी मंच और मतदाता हेल्पलाइन अपवर्जन की त्रुटियों को कम कर सकती हैं और सुलभता में सुधार कर सकती हैं।
  • दस्तावेजीकरण के मानदंडों में ढील: लचीली दस्तावेजीकरण आवश्यकताएं और अनंतिम प्रमाणन संवेदनशील समूहों को प्रभावी ढंग से भाग लेने में मदद कर सकते हैं।
  • आवधिक SIR को संस्थागत बनाना: चरणबद्ध तरीके से नियमित अंतराल पर SIR अभ्यास आयोजित करने से तैयारी में सुधार हो सकता है और राजनीतिकरण कम हो सकता है।
  • मतदाताओं में जागरूकता का प्रसार करना: जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से नागरिकों को पात्रता, दस्तावेजीकरण और पुनरीक्षण प्रक्रिया की समय-सीमा के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।

Sources:
PIB
News On Air
Indian Express

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