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सामान्य अध्ययन-1: जनसंख्या और संबद्ध मुद्दे।

संदर्भ: भारत सरकार ने अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने तथा इन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से निपटने के उपायों के लिए सुझाव देने हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति के बारे में

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान “उच्च अधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन” की घोषणा की थी।

• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर 2025 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को इस समिति का गठन किया।

• अध्यक्ष और सदस्य: इस समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) करेंगे।

  • भारत के जनगणना आयुक्त, दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त IAS), बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त IPS) और शमिका रवि इस समिति के सदस्य होंगे।
  • गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इसमें सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

• समिति का कार्यकाल: समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

  • यदि आवश्यक हो तो गृह मंत्रालय इसके कार्यकाल को छह महीने तक के लिए बढ़ा सकता है।

संवैधानिक प्रावधान

• अनुच्छेद 246 और संघ सूची: नागरिकता, आप्रवासन, विदेशियों और सीमा प्रबंधन से संबंधित मामले संविधान के अनुच्छेद 246 और संघ सूची के तहत केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में आते हैं।

• अनुच्छेद 355: अनुच्छेद 355 के अनुसार बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की रक्षा करने का दायित्व केंद्र सरकार का है। अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन से जुड़ी चिंताएं अक्सर इस दायित्व से जुड़ी होती हैं।

• अनुच्छेद 21: अवैध प्रवासियों की पहचान, निरोध (हिरासत) या निर्वासन से संबंधित कोई भी तंत्र अनुच्छेद 21 के दायरे में ही किया जाना चाहिए चाहिए। अनुच्छेद 21 विधि की उचित प्रक्रिया के माध्यम से प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण की गारंटी देता है।

कानूनी ढांचा

• नागरिकता अधिनियम, 1955: यह अधिनियम भारतीय नागरिकता के अर्जन और निरसन को विनियमित करता है।

• विदेशी विषयक अधिनियम, 1946: यह अधिनियम सरकार को विदेशियों के प्रवेश, उपस्थिति और निर्वासन को विनियमित करने की शक्ति प्रदान करता है।

• पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920: यह अधिनियम वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश को नियंत्रित करता है।

• विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम, 1939: यह अधिनियम विदेशी नागरिकों के पंजीकरण और उनकी निगरानी का प्रावधान करता है।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन के बारे में

• जनसांख्यिकीय परिवर्तन से तात्पर्य समय के साथ जनसंख्या के आकार, संरचना, संघटन और वितरण में होने वाले बदलावों से है।

• जनसंख्या परिवर्तन आमतौर पर जन्म, मृत्यु और प्रवासन द्वारा निर्धारित होता है।

  • जनसंख्या परिवर्तन = जन्म – मृत्यु + शुद्ध प्रवासन

• प्रजनन दर: प्रजनन दर से तात्पर्य किसी जनसंख्या के भीतर होने वाले जन्मों की संख्या से है। इसे आमतौर पर कुल प्रजनन दर (TFR) के माध्यम से मापा जाता है, जो एक महिला द्वारा उसके संपूर्ण जीवनकाल में जन्मे बच्चों की औसत संख्या को दर्शाती है।

  • वर्ष 2024 में भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 थी।

• मृत्यु दर: मृत्यु दर से तात्पर्य किसी जनसंख्या के भीतर होने वाली मौतों से है और इसे मृत्यु दर तथा जीवन प्रत्याशा जैसे संकेतकों के माध्यम से मापा जाता है।

  • घटती मृत्यु दर से आमतौर पर जनसंख्या बढ़ती है, जबकि उच्च मृत्यु दर, जनसंख्या संरचना को बदल सकती है।

• प्रवासन: प्रवासन से तात्पर्य जनसंख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने (गमन) से है। यह आंतरिक या अंतर्राष्ट्रीय, और वैध या अवैध हो सकता है।

  • प्रवासन, जनसांख्यिकीय पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों, जनजातीय क्षेत्रों, शहरी केंद्रों और औद्योगिक कॉरिडोर में।

आवश्यकता और महत्व

• राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता: सरकार ने अवैध प्रवासन से होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तन को संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता से जुड़ी एक गंभीर चुनौती कहा है।

• कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं: सरकार के अनुसार, अवैध घुसपैठ और असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन कई क्षेत्रों में प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से संबंधित चुनौतियां उत्पन्न कर सकते हैं।

• जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों का संरक्षण: सरकार ने अवैध प्रवासन के कारण उत्पन्न होने वाले जनसांख्यिकीय दबावों से जनजातीय समाजों और सीमावर्ती क्षेत्रों के संरक्षण से संबंधित चिंताओं को रेखांकित किया है।

• जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों का वैज्ञानिक आकलन: ऐसा अनुमान  है कि यह समिति देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का एक वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित आकलन प्रदान करेगी।

• संस्थागत और नीतिगत सुधार: समिति की सिफारिशें सीमा प्रबंधन, पहचान प्रणालियों, जनसंख्या स्थिरीकरण तंत्र और प्रवासन से जुड़े मुद्दों पर केंद्र-राज्य समन्वय को सुदृढ़ करने में मदद कर सकती हैं।

• जनगणना के संदर्भ में महत्व: भारत की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी, जबकि अगली जनगणना की प्रक्रिया वर्ष 2027 में निर्धारित है। इसलिए, शासन, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण, नियोजन और संसाधन प्रबंधन के लिए सटीक जनसांख्यिकीय आकलन महत्वपूर्ण है।

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