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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।
संदर्भ: ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि अत्यधिक धनी लोग ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में असमान रूप से अधिक योगदान देते हैं, जबकि जलवायु संबंधी आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव गरीब समुदायों पर पड़ता है।
रिपोर्ट के बारे में
- जारीकर्ता: ऑक्सफैम, गरीबी और असमानता से निपटने के लिए कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन।
- शीर्षक: आपदा विभाजन: जलवायु संकट किस प्रकार असमानता को गहरा करता है और कुछ लोगों को समृद्ध बनाता है।
- प्रकाशन: अक्टूबर 2026 में, तुर्किये में आयोजित होने वाले COP31 से पहले।
- उद्देश्य: यह अध्ययन करना कि किस प्रकार अत्यधिक संपत्ति उत्सर्जन को बढ़ाती है, जलवायु असमानता को गहरा करती है तथा आपदाओं से अनुचित लाभ कमाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- अत्यधिक धनी लोगों द्वारा असमानुपातिक उत्सर्जन: सर्वाधिक धनी 0.1% आबादी (लगभग 80 लाख लोग) द्वारा किया जाने वाला कार्बन उत्सर्जन, सबसे गरीब 44% आबादी (लगभग 350 करोड़ लोग) के कुल उत्सर्जन से अधिक है। यह उप-सहारा अफ्रीका की आबादी (लगभग 130 करोड़ लोग) के कुल उत्सर्जन का तीन गुना से भी अधिक है।
- सर्वाधिक धनी 0.1% में शामिल एक व्यक्ति का योगदान अत्यधिक गर्मी की घटनाओं में औसत व्यक्ति की तुलना में 125 गुना और सबसे गरीब 50% आबादी के किसी व्यक्ति की तुलना में लगभग 400 गुना अधिक रहा है।
- वर्ष 1990 के बाद से वैश्विक तापवृद्धि के लिए सर्वाधिक धनी 1% आबादी लगभग 20% तक जिम्मेदार है।
- जलवायु आपदाओं से असमानता में वृद्धि: अनुमान है कि सर्वाधिक धनी 1% आबादी का वार्षिक उत्सर्जन समय के साथ गर्मी से संबंधित लगभग 19 लाख अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है।
- अधिक असमानता वाले देशों में बाढ़ से होने वाली मौतों की संख्या सात गुना अधिक है। गरीब समुदायों को आपदाओं का अधिक जोखिम झेलना पड़ता है तथा उनके पास आपदाओं का सामना करने और उनसे उबरने के लिए संसाधन भी कम होते हैं।
- आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर संकट: वर्ष 2050 तक जलवायु संकट के कारण लगभग 100 करोड़ लोग विस्थापित हो सकते हैं, जिनमें से अधिकांश वैश्विक दक्षिण (Global South) के होंगे।
- वर्षा के बदलते स्वरूप, बढ़ते तापमान और मृदा क्षरण से कृषि उत्पादन को खतरा है तथा खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि होती है।
- वर्ष 2024 में लगभग 230 करोड़ लोगों को मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ा। जलवायु संबंधी झटके इस स्थिति को और गंभीर बनाते हैं, विशेष रूप से उन गरीब परिवारों के लिए, जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं।
- निजी जेट और निवेश से होने वाला उत्सर्जन: वैश्विक आबादी के लगभग 0.003% (करीब 2.5 लाख लोग) द्वारा उपयोग किए जाने वाले निजी जेट विमानों से वर्ष 2025 में 1.6 करोड़ टन CO₂ का उत्सर्जन हुआ।
- ऑक्सफैम के अनुसार, इन विमानों से केवल दो सेकंड में उतना CO₂ उत्सर्जित होता है, जितना सबसे गरीब 50% आबादी का एक व्यक्ति पूरे वर्ष में उत्सर्जित करता है।
- वर्ष 2025 में 1,000 अरबपतियों के 1,095 कंपनियों में किए गए निवेश से 48.6 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (CO₂-eq) उत्सर्जन जुड़ा था। इनमें से 71% उत्सर्जन का संबंध तेल, गैस और रसायन जैसे जलवायु पर अधिक प्रभाव डालने वाले क्षेत्रों से था।
- जलवायु आपदाओं से लाभ कमाना: ऑक्सफैम का ‘डिस्ट्रॉय एंड रीबिल्ड इंडेक्स’ (Destroy and Rebuild Index) ऐसी 217 कंपनियों की पहचान करता है, जिन्हें प्रदूषणकारी उद्योगों के साथ-साथ आपदा की तैयारी, पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण से लाभ होता है।
- वर्ष 2029 तक वैश्विक आपदा-पुनर्प्राप्ति बाजार के प्रतिवर्ष 70 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 92 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
- वर्ष 2025 में सूचीबद्ध कंपनियों ने औसतन 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित किया और प्रत्येक कंपनी ने औसतन 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि का भुगतान शेयरधारकों को किया।
- ब्लैकरॉक और वैनगार्ड का 92% सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश है तथा उनकी संयुक्त हिस्सेदारी 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- आपदा-पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया निजीकरण, भूमि अधिग्रहण, विनियमन में ढील और कर रियायतों को भी बढ़ावा दे सकती है।
ऑक्सफैम द्वारा की गई सिफारिशें
- अत्यधिक धनी लोगों पर कर लगाना: संपत्ति, निजी जेट जैसे उच्च उत्सर्जन वाले विलासितापूर्ण उत्पादों और प्रदूषणकारी उद्योगों में किए गए निवेश पर कर लगाना।
- जलवायु वित्त में वृद्धि करना: वर्ष 2035 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करना तथा संयुक्त राष्ट्र जलवायु कोषों के माध्यम से विकासशील देशों को ऋण के बजाय अनुदान प्रदान करना।
- असमानता कम करना: आय और संपत्ति की असमानता को कम करने के लिए समयबद्ध राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित करना।
- लचीलापन बढ़ाना: आपदा-रोधी अवसंरचना, सामाजिक सुरक्षा, पूर्व चेतावनी प्रणालियों, सार्वजनिक खाद्य वितरण और कमजोर किसानों को सहायता प्रदान करने में निवेश करना।
- जलवायु आपदाओं से अनुचित लाभ कमाने की प्रवृत्ति समाप्त करना: अप्रत्याशित लाभ पर कर, मूल्य नियंत्रण, सट्टेबाजी पर प्रतिबंध और आपदा-पुनर्प्राप्ति के विनियमन के माध्यम से कॉरपोरेट शक्ति पर अंकुश लगाना।
