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सामान्य अध्ययन-2: भारतीय संविधान—संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान और मूल ढाँचा; संघीय ढाँचे से संबंधित विषय और चुनौतियाँ; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ; विभिन्न संवैधानिक निकायों के कार्य और उत्तरदायित्व।

संदर्भ: हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लागू करने के भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्णय का समर्थन किया। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण और उन्हें अद्यतन करना निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिदेश के अंतर्गत आता है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह चुनौती उन याचिकाओं से उभरी थी जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए थे, और यह आरोप लगाया गया था कि इस प्रक्रिया से बड़े पैमाने पर मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं तथा मतदाताओं पर कठिन दस्तावेजीकरण की आवश्यकताएँ थोपी जा सकती हैं।
  • ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ मामले में उच्चतम न्यायालय की एक दो-न्यायाधीशों की पीठ ने निर्वाचन आयोग की पुनरीक्षण करने की शक्ति का समर्थन किया। पीठ ने यह टिप्पणी की कि सटीक मतदाता सूची तैयार करना और उसका रखरखाव करना संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग की एक मुख्य संवैधानिक जिम्मेदारी है।
  • न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि हालांकि निर्वाचन आयोग के पास मतदाता सूचियों को सत्यापित करने का अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया संवैधानिक गारंटियों के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से संचालित की जानी चाहिए।
  • यह निर्णय चुनावी अखंडता, मतदाता पंजीकरण, प्रवासन, प्रविष्टियों के दोहराव और मतदाता सूची प्रबंधन में समावेशन-अपवर्जन संतुलन पर चल रही व्यापक बहस के दौरान दिया गया है।

निर्णय के मुख्य बिंदु

1. संवैधानिक कर्तव्य के रूप में मतदाता सूची का शुद्धिकरण

  • न्यायालय ने यह माना कि मतदाता सूचियों को तैयार करना, उनका रखरखाव करना और समय-समय पर उनका शुद्धिकरण करना, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की भारत के निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का एक अभिन्न हिस्सा है।
  • न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक सटीक मतदाता सूची चुनावी लोकतंत्र की आधारशिला है और प्रविष्टियों के दोहराव, स्थान परिवर्तन, मृत  तथा अन्य अपात्र मतदाताओं को हटाने के लिए समय-समय पर सत्यापन आवश्यक है।

2. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराने का निर्वाचन आयोग का अधिकार

  • इस निर्णय ने पुनः पुष्टि की कि निर्वाचन आयोग के पास आवश्यकता पड़ने पर विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950  के तहत संवैधानिक और वैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं।
  • न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएँ अपने वैधानिक कार्यों के निर्वहन में वैधानिकता की धारणा की हकदार हैं, और अदालतों को तब तक इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जब तक कि उनके कार्यों को मनमाना या कानून के विरुद्ध सिद्ध न कर दिया जाए।

3. इस प्रक्रिया की वैधता और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता

  • न्यायालय ने यह माना कि विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता, विश्वसनीयता और समावेशिता की रक्षा करने के वैध संवैधानिक उद्देश्य का अनुसरण करता है और आनुपातिकता के परीक्षण को संतुष्ट करता है।
  • न्यायालय ने आगे यह पाया कि यह प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के अनुरूप है, जो दावों, आपत्तियों, संशोधनों और अपीलों के माध्यम से सुरक्षा उपाय प्रदान करते हैं।

4. नागरिकता सत्यापन और मतदाता पात्रता

  • न्यायालय ने टिप्पणी की कि मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता एक वैधानिक आवश्यकता है और इसलिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान इसे पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
  • हालांकि, न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भारत का निर्वाचन आयोग की भूमिका केवल चुनावी पात्रता निर्धारित करने तक सीमित है और वह नागरिकता न्यायनिर्णयन प्राधिकरण या न्यायाधिकरण के रूप में कार्य नहीं कर सकता है।

निर्णय का महत्व

  • चुनावी अखंडता को बनाए रखना: यह निर्णय सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची बनाए रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अधिकार को सुदृढ़ करता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ता है।
  • संस्थागत स्वतंत्रता की पुनः पुष्टि: निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका को मान्यता देकर, यह निर्णय चुनाव-प्रबंधन कार्यों को निष्पादित करने में आयोग की स्वायत्तता को सुदृढ़ करता है।
  • समावेशन और सटीकता में संतुलन: न्यायालय ने चुनावी धोखाधड़ी को रोकने और वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा करने के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का समर्थन: सटीक मतदाता सूचियाँ लोकतांत्रिक वैधता की आधारशिला हैं और स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बारे में

  • विशेष गहन पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए शुरू किया जाने वाला एक व्यापक सत्यापन अभ्यास है, जिसके तहत घर-घर जाकर सत्यापन और मतदाता अभिलेखों की संवीक्षा की जाती है।
  • सामान्य वार्षिक पुनरीक्षणों के विपरीत, विशेष गहन पुनरीक्षण में व्यापक क्षेत्रीय सत्यापन  शामिल होता है, जिसका उद्देश्य प्रविष्टियों के दोहराव, मृत मतदाताओं, स्थान परिवर्तित करने वाले मतदाताओं, अपात्र व्यक्तियों और मतदाता सूची से छूटे हुए नामों की पहचान करना है।
  • इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक, समावेशी और फर्जी या दोहरे पंजीकरण से मुक्त रहे, जिससे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखा जा सके।
  • सटीक मतदाता सूचियों का महत्व संविधान के अनुच्छेद 326 से उत्पन्न होता है, जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों का प्रावधान करता है।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 मतदाता सूचियों को नियंत्रित करने वाला वैधानिक ढांचा प्रदान करते हैं। ये कानून भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) को मतदाता सूची में नाम दर्ज करने (नामांकन), संशोधन करने, नाम हटाने और पुनरीक्षण करने की शक्ति प्रदान करते हैं, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर विशेष गहन पुनरीक्षण अभ्यास भी शामिल हैं।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
    • धारा 16 : गैर-नागरिकों को मतदाता सूची में पंजीकृत होने से प्रतिबंधित किया गया है।
    • धारा 21 : यह मतदाता सूचियों को तैयार करने और उनके पुनरीक्षण से संबंधित है।
      • धारा 21(2): यह उप-धारा मतदाता सूचियों के सामान्य वार्षिक या सामान्य पुनरीक्षण का प्रावधान करती है।
      • धारा 21(3): इसके तहत भारत का निर्वाचन आयोग किसी भी निर्वाचन क्षेत्र या उसके किसी हिस्से के लिए “विशेष पुनरीक्षण” (विशेष गहन पुनरीक्षण सहित) का निर्देश दे सकता है।
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत, भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण या तो गहन रूप से, या संक्षिप्त रूप से या आंशिक रूप से गहन और आंशिक रूप से संक्षिप्त रूप से किया जा सकता है।
    • गहन पुनरीक्षण (Intensive Revision) में, क्षेत्रीय सत्यापन के माध्यम से मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की जाती है।
    • संक्षिप्त पुनरीक्षण (Summary Revision) में, वर्तमान मतदाता सूची को ही नाम जोड़ने, हटाने और संशोधनों के माध्यम से अद्यतन किया जाता है।

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) के बारे में

  • भारत का निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है। इसमें निर्वाचकों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के साथ-साथ मतदाता सूचियों को तैयार करने और उनके पुनरीक्षण की शक्ति निहित है।
  • यह लोक सभा, राज्य सभा, राज्य विधानसभाओं, तथा भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत, भारत निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और उतनी संख्या में निर्वाचन आयुक्त (ECs) शामिल होते हैं, जितने राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किए जाएं।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक त्रिसदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसमें शामिल हैं:
    • प्रधानमंत्री (अध्यक्ष),
    • लोक सभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े एकल विपक्षी दल के नेता),
    • प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री।

SOURCES:
The Hindu
Scobserver
The wire
Livelaw

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