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सामान्य अध्ययन 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय ।

संदर्भ: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट, “बदलते श्रम बाजारों में सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा: सभी प्रकार के रोजगार में श्रमिकों का संरक्षण”, अनौपचारिकता, गिग वर्क और गैर-मानक रोजगार सहित बदलते श्रम बाजार की वास्तविकताओं के जवाब में सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
सामाजिक संरक्षण के बारे में
- सामाजिक संरक्षण/ सुरक्षा से तात्पर्य उन नीतियों और कार्यक्रमों से है जिनका उद्देश्य जीवन चक्र के दौरान गरीबी और सुभेद्यता को कम करना और उसे रोकना है।
- इसमें नौ प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं: बाल और परिवार लाभ, मातृत्व संरक्षण, बेरोजगारी सहायता, रोजगार चोट लाभ, बीमारी लाभ, स्वास्थ्य सुरक्षा, वृद्धावस्था लाभ, दिव्यांगता लाभ और उत्तरजीवी लाभ।
सामाजिक संरक्षण को सुदृढ़ करने की आवश्यकता
- न्यूनीकरण से निवारण की ओर स्थानांतरण: प्रणालियों को केवल गरीबी कम करने के बजाय सुभेद्यता को रोकने की दिशा में विकसित होना चाहिए, ताकि व्यक्तियों के जोखिम में पड़ने से पहले ही उन्हें सहायता सुनिश्चित की जा सके।
- बदलते श्रम बाजारों के अनुरूप अनुकूलन: अस्थायी, अंशकालिक, स्वरोजगार और अनौपचारिक कार्यों की बढ़ती संख्या के साथ, सामाजिक सुरक्षा को पर्याप्त और व्यापक लाभों तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।
- कवरेज और समावेशन का विस्तार: कृषि, घरेलू कार्य, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों और जटिल रोजगार व्यवस्थाओं में लगे श्रमिकों तक सामाजिक बीमा का विस्तार करने से आय सुरक्षा, निष्पक्षता और समावेशन में सुधार होता है।
- संकटों के प्रति लचीलापन निर्माण: सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ जलवायु परिवर्तन, तकनीकी व्यवधानों और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के बीच स्थिरता को बढ़ाती हैं (उदाहरण: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना)।
- लैंगिक असमानताओं को कम करना: लिंग-उत्तरदायी सामाजिक सुरक्षा उपाय श्रम बाजार की विषमताओं को दूर करने में मदद करते हैं (उदाहरण: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना)।
सामाजिक बीमा की भूमिका:
- यह पुरुषों और महिलाओं, उच्च एवं निम्न आय समूहों, तथा निरंतर या बीच-बीच में बाधित करियर वाले श्रमिकों के बीच जोखिम-साझाकरण और पुनर्वितरण को सक्षम बनाता है।
- यह श्रम बाजारों में व्याप्त लैंगिक असमानताओं को कम करने में सहायक है।
- यह वित्तपोषण का एक स्थिर स्रोत बना हुआ है, जो वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर पर कुल कराधान का 18.8% और जीडीपी का 5.7% था।
- यूरोप और मध्य एशिया में कुल कराधान में इसकी हिस्सेदारी 27% से अधिक है, तथा अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी के बावजूद अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्रों में भी इसका महत्व बना हुआ है।
- अनौपचारिक अर्थव्यवस्था तक कवरेज का विस्तार करने की चुनौतियों के बावजूद, यह एक प्रमुख भूमिका निभाना जारी रखता है।
प्रमुख चिंताएँ
- रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि वर्तमान सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ आधुनिक श्रम बाजारों की वास्तविकताओं को संबोधित करने के लिए अपर्याप्त हैं, जो अनौपचारिक रोजगार, ‘गिग वर्क’ और विविध प्रकार की रोजगार व्यवस्थाओं द्वारा रेखांकित हैं।
- सुधारों के बिना, श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग सामाजिक और आर्थिक जोखिमों के प्रति असुरक्षित बना रहेगा।
प्रमुख सिफारिशें
- कवरेज का विस्तार: रिपोर्ट अस्थायी, अंशकालिक, स्वरोजगार और अनौपचारिक क्षेत्रों सहित सभी श्रमिकों तक कवरेज का विस्तार करके सामाजिक सुरक्षा के सार्वभौमिकरण का आह्वान करती है।
- पर्याप्तता और व्यापकता में सुधार: केवल कवरेज ही पर्याप्त नहीं है, रिपोर्ट पर्याप्त और व्यापक लाभ सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देती है।
- सामाजिक सुरक्षा को केवल न्यूनतम और प्रतिक्रियात्मक सहायता से आगे बढ़कर ‘जीवन-चक्र दृष्टिकोण’ की ओर बढ़ना चाहिए। इसमें बचपन, रोजगार परिवर्तन, बेरोजगारी, बीमारी, विकलांगता और वृद्धावस्था जैसे विभिन्न चरणों में व्यक्तियों को कवर किया जाना चाहिए।
- सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना: रिपोर्ट सतत और न्यायसंगत वित्तपोषण तंत्र के महत्व पर प्रकाश डालती है।
- प्रमुख स्रोतों में सामाजिक सुरक्षा योगदान और प्रगतिशील कराधान शामिल हैं, जिन्हें योगदान करने की सीमित क्षमता वाले श्रमिकों के लिए सार्वजनिक सब्सिडी द्वारा पूरक किया जाना चाहिए।
- कमजोर राजकोषीय क्षमता वाले देशों के लिए, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महत्व
- श्रम बाजार संक्रमण को सुगम बनाना: सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ श्रमिकों को तकनीकी बदलावों और विकसित होते रोजगार पैटर्न के अनुकूल ढलने में सहायता करती हैं।
- औपचारिकीकरण को बढ़ावा देना: कवरेज का विस्तार करके, यह प्रणाली अनौपचारिक से औपचारिक रोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे आर्थिक दक्षता में सुधार होता है।
- लचीलेपन को सुदृढ़ करना: जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और तकनीकी व्यवधानों के सामने, मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ श्रमिकों और अर्थव्यवस्थाओं दोनों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं।
- सामाजिक एकजुटता बढ़ाना: व्यापक सुरक्षा असमानताओं को कम करती है और समावेशी विकास का समर्थन करती है, जिससे सामाजिक स्थिरता बढ़ती है।

निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इस बात पर जोर देता है कि सार्वभौमिक, समावेशी और अनुकूलन योग्य सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ रोजगार के सभी रूपों में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। इन प्रणालियों को सुदृढ़ करने से तेजी से बदलती कार्य-दुनिया में सामाजिक न्याय, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
Source
Down to Earth
Lio Org
PIB
