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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का पाँचवाँ परीक्षण संस्करण जारी किया। इसके अनुसार, अगस्त 2026 में निगरानी के अंतर्गत शामिल 19 सेवा उप-क्षेत्रों में से 17 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 13 उप-क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के प्रमुख निष्कर्ष (अगस्त 2026)
- व्यापक आधार पर वृद्धि: अगस्त 2026 में 19 सेवा उप-क्षेत्रों में से 17 में वर्ष-दर-वर्ष सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जो जुलाई के समान थी।
- दो अंकों की वृद्धि: दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज करने वाले उप-क्षेत्रों की संख्या जुलाई के 10 से बढ़कर 13 हो गई।
- अनुमानित समग्र वृद्धि: अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगस्त में सेवा उत्पादन में लगभग 14% की वृद्धि हुई, जबकि जुलाई में यह वृद्धि 13.5% थी। मंत्रालय ने अभी तक ISP की समग्र वृद्धि दर जारी नहीं की है।
- सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ने वाले क्षेत्र: खुदरा व्यापार में सर्वाधिक 19.9% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद रियल एस्टेट और मरम्मत सेवाओं में 17.6% की वृद्धि दर्ज की गई।
- अन्य प्रमुख प्रदर्शनकर्ता: बीमा (16.5%), बैंकिंग (14.9%), अनुसंधान एवं विकास (R&D) सहित व्यावसायिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सेवाएँ (14.2%), आईटी एवं कंप्यूटर-संबंधी सेवाएँ (13.8%) तथा प्रशासनिक एवं सहायता सेवाएँ (13.1%)।
- परिवहन क्षेत्र: जल परिवहन (9.5%), सड़क परिवहन (9.4%) और रेल परिवहन (3.7%) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। भंडारण एवं परिवहन संबंधी सहायक गतिविधियों में 11.2% की वृद्धि हुई।
- संकुचन दर्ज करने वाले क्षेत्र: हवाई परिवहन में सर्वाधिक 9.6% का संकुचन दर्ज किया गया, जो लगातार पाँचवें महीने की गिरावट थी। कला, मनोरंजन एवं आमोद-प्रमोद क्षेत्र में भी 4.7% का संकुचन दर्ज किया गया।
- वृद्धि की गति: ईवाई इंडिया के अनुसार, जून 2026 से ISP में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त 2026 को समाप्त होने वाली तीन महीने की अवधि में औसत वृद्धि दर 13.6% रही।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के बारे में

- प्रकृति: एक मासिक उच्च-आवृत्ति वाला व्यापक आर्थिक संकेतक, जो भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र द्वारा उत्पादित उत्पादन की मात्रा में अल्पकालिक परिवर्तनों को मापता है।
- प्रस्तुतकर्ता: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के माध्यम से।
- उद्देश्य: सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का समयबद्ध मासिक मापन करना तथा भारत के व्यापक आर्थिक सांख्यिकीय ढाँचे को सुदृढ़ करना।
- समकक्ष: यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के सेवा क्षेत्र संबंधी समकक्ष के रूप में कार्य करता है, जो विनिर्माण, खनन एवं विद्युत क्षेत्रों के उत्पादन को मापता है।
- आधार वर्ष: 2024–25।
- कवरेज: परीक्षण ISP में 19 चयनित औपचारिक सेवा उप-क्षेत्र शामिल हैं, जो औपचारिक सेवा क्षेत्र का लगभग 60% हिस्सा हैं।
- दायरा: इसमें केवल औपचारिक क्षेत्र के उद्यम शामिल हैं। सरकारी क्षेत्र की मुख्य गतिविधियाँ, गैर-बाजार गतिविधियाँ तथा अनौपचारिक क्षेत्र को फिलहाल इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
- आँकड़ों के स्रोत: वस्तु एवं सेवा कर (GST) संबंधी आँकड़े, प्रशासनिक आँकड़े तथा निगमित सेवा क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASISSE)।
- जारी किया जाता है: मासिक; इसे प्रत्येक माह की 29 तारीख को जारी किया जाना निर्धारित है।
- परीक्षण प्रकृति: प्रारंभ में इसे प्रायोगिक श्रृंखला के रूप में प्रकाशित किया गया, ताकि आँकड़ों की गुणवत्ता का आकलन किया जा सके, कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जा सके तथा हितधारकों की प्रतिक्रियाओं को शामिल किया जा सके।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का महत्त्व
- सांख्यिकीय कमी को दूर करना: सेवा क्षेत्र के उत्पादन के लिए समर्पित मासिक संकेतक की लंबे समय से चली आ रही अनुपलब्धता को दूर करता है। इससे भारत के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र के मापन में सुधार होता है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एवं सकल मूल्य वर्धित (GVA) के आकलन में सुधार: सेवा क्षेत्र के उत्पादन से संबंधित समयबद्ध जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे सकल मूल्य वर्धित (GVA) के आकलन में सहायता मिलती है तथा तिमाही एवं वार्षिक जीडीपी अनुमानों में सुधार होता है।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सहायता: सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), व्यवसायों, निवेशकों एवं शोधकर्ताओं को क्षेत्रवार प्रदर्शन की निगरानी करने और सूचित आर्थिक निर्णय लेने में सहायता करता है।
- रोजगार एवं निर्यात को समर्थन: सेवा गतिविधियों का बेहतर मापन ऐसे क्षेत्र के विकास का आकलन करने में सहायता कर सकता है, जो रोजगार, निवेश और भारत के सेवा निर्यात में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
- वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप: भारत के सांख्यिकीय ढाँचे को जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ जैसी अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष लाता है, जो इसी प्रकार के सेवा उत्पादन संकेतक प्रकाशित करती हैं।
