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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने,प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2024–25 को आधार वर्ष मानते हुए 19 उप-क्षेत्रों के लिए भारत का पहला सेवा उत्पादन सूचकांक का परीक्षण संस्करण जारी किया है। यह देश का पहला मासिक सूचकांक है, जो औपचारिक सेवा क्षेत्र में अल्पकालिक आर्थिक गतिविधियों का मापन करता है।
मुख्य निष्कर्ष
- अप्रैल 2026 के लिए जारी प्रथम सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) में सेवा क्षेत्र के 19 उप-क्षेत्र शामिल किए गए हैं, जो भारत के सेवा क्षेत्र का लगभग 60% का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- इनमें से 14 उप-क्षेत्रों ने वर्ष-दर-वर्ष दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की, जबकि लगभग सभी अन्य उप-क्षेत्रों में भी सकारात्मक वृद्धि देखी गई।
- आवास एवं खाद्य सेवाएँ (37.2%), खुदरा व्यापार (30.8%), प्रशासनिक एवं सहायता सेवाएँ (28.7%) तथा रियल एस्टेट गतिविधियाँ (27.7%) सर्वाधिक प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र रहे।
- अन्य प्रमुख योगदानकर्ताओं में दूरसंचार (22.8%), मरम्मत सेवाएँ (19.2%), सड़क परिवहन (18.5%), भंडारण एवं परिवहन सहायता गतिविधियाँ (18.2%) शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सेवाएँ, कला एवं मनोरंजन, बीमा, थोक व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर संबंधी सेवाएँ तथा बैंकिंग में भी दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
- वायु परिवहन सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जिसमें 13.9% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि रेल परिवहन में 0.4% की मामूली गिरावट रही।
- MoSPI भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा तथा स्वामित्व वाले आवास को भी इसमें शामिल कर कवरेज को 85–90% तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। परीक्षण श्रृंखला के मूल्यांकन के बाद समग्र सेवा उत्पादन सूचकांक जारी किया जाएगा।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के बारे में
- यह एक मासिक उच्च-आवृत्ति व्यापक आर्थिक सूचकांक है, जो भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र द्वारा उत्पादित सेवाओं के उत्पादन की मात्रा में होने वाले अल्पकालिक परिवर्तनों का मापन करता है।
- यह निर्धारित आधार वर्ष की तुलना में औपचारिक सेवा क्षेत्र द्वारा उत्पादित सेवाओं की मात्रा में होने वाले अल्पकालिक परिवर्तनों का आकलन करता है।
- यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का सेवा क्षेत्र संबंधी समकक्ष है। जहाँ IIP विनिर्माण, खनन तथा विद्युत क्षेत्र के उत्पादन का मापन करता है, वहीं ISP सेवा क्षेत्र के उत्पादन का मापन करता है।
उद्देश्य
- सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का समयबद्ध मासिक आकलन उपलब्ध कराना, जिससे भारत की व्यापक आर्थिक सांख्यिकीय प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
- यह नीति-निर्माताओं, व्यवसायों तथा शोधकर्ताओं को देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्र की अल्पकालिक गतिविधियों की नियमित निगरानी करने में सक्षम बनाता है।
- आधार वर्ष: 2024–25
- कवरेज: वर्तमान परीक्षण ISP में औपचारिक सेवा क्षेत्र के 19 उप-क्षेत्र शामिल हैं, जो भारत के सेवा क्षेत्र का लगभग 60% प्रतिनिधित्व करते हैं।
- कार्यक्षेत्र: यह सूचकांक केवल औपचारिक क्षेत्र के उद्यमों को शामिल करता है तथा मुख्यतः GST एवं प्रशासनिक आँकड़ों पर आधारित है।
- सरकार के मुख्य कार्यों से संबंधित सेवाएँ, गैर-बाजार गतिविधियाँ तथा अनौपचारिक क्षेत्र को वर्तमान में इसमें शामिल नहीं किया गया है।
- आँकड़ों के स्रोत:
- GST डेटा
- प्रशासनिक आँकड़े
- निगमित सेवा क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASISSE)
- ISP प्रत्येक माह की 29 तारीख को जारी किया जाएगा।
- प्रारंभिक चरण में इसे प्रायोगिक (Trial) श्रृंखला के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि आँकड़ों की गुणवत्ता का मूल्यांकन, कार्यप्रणाली का परीक्षण तथा हितधारकों के सुझावों को शामिल किया जा सके।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का महत्व

- सांख्यिकीय कमी की पूर्ति: यह सेवा क्षेत्र के लिए मासिक उत्पादन सूचकांक की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करता है। सेवा क्षेत्र का भारत के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 56.4% योगदान है (वित्त वर्ष 2025–26 के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार)।
- व्यापक आर्थिक संकेतकों को सुदृढ़ बनाना: यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का पूरक है तथा सेवा क्षेत्र के उत्पादन का नियमित उच्च-आवृत्ति संकेतक उपलब्ध कराता है।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन: यह नीति-निर्माताओं, व्यवसायों, निवेशकों तथा शोधकर्ताओं को मासिक रुझानों की निगरानी कर समय पर निर्णय लेने में सहायता करता है।
- GDP के आकलन में सुधार: यह सेवा क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA) के आकलन के लिए विश्वसनीय उच्च-आवृत्ति संकेतक उपलब्ध कराता है, जिससे तिमाही एवं वार्षिक GDP के अनुमान अधिक सटीक बनते हैं।
- रोजगार एवं निर्यात को समर्थन: सेवा क्षेत्र भारत के कुल रोजगार का लगभग 30% प्रदान करता है तथा पिछले 6 वर्षों में लगभग 4 करोड़ (40 मिलियन) रोजगार सृजित कर चुका है।
- वित्त वर्ष 2026–27 में भारत के सेवा निर्यात ने मजबूत गति बनाए रखी है तथा सरकार का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक सेवा निर्यात में 10% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।
- आँकड़ा-आधारित सुशासन को बढ़ावा: यह GST अभिलेखों, प्रशासनिक डेटाबेस तथा उद्यम सर्वेक्षणों के आँकड़ों का एकीकरण कर आँकड़ों की गुणवत्ता में सुधार करता है तथा रिपोर्टिंग का बोझ कम करता है।
- वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप: यह भारत को जापान, चीन, दक्षिण कोरिया तथा यूरोपीय संघ जैसी अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष लाता है, जहाँ पहले से ही सेवा उत्पादन सूचकांक प्रकाशित किए जाते हैं।
