चर्चा में रहे महत्वपूर्ण शब्द
- V2X (व्हीकल–टू–एवरीथिंग)
- V2X तकनीक वाहनों को गति, स्थिति (लोकेशन) और अन्य डेटा का आदान-प्रदान करने वाले उपकरणों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ (V2V), पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के साथ (V2P), तथा सड़क के किनारे की अवसंरचना के साथ (V2I) संचार करने में सक्षम बनाती है।
- यह वास्तविक समय में सूचनाओं के साझाकरण को सक्षम बनाकर सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वायत्त ड्राइविंग क्षमताओं और परिवहन दक्षता में सुधार करती है।
- हंतावायरस
- हंतावायरस, हंताविरिडे कुल के जूनोटिक (पशुजन्य) विषाणु हैं, जो प्राकृतिक रूप से कृंतकों (जैसे चूहे आदि) को संक्रमित करते हैं और कभी-कभी मनुष्यों में भी फैल सकते हैं।
- मनुष्यों में, ये ‘हंतावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम’ (HCPS) और ‘रेनल सिंड्रोम के साथ रक्तस्रावी बुखार’ (HFRS) का कारण बन सकते हैं, जो फेफड़ों, हृदय, गुर्दों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करते हैं।
- वॉयजर 1
- नासा (NASA) द्वारा वर्ष 1977 में प्रक्षेपित किया गया वॉयजर 1, पृथ्वी से सबसे दूर स्थित मानव-निर्मित वस्तु है और यह वर्ष 2012 से हेलियोस्फीयर से परे अंतरतारकीय अंतरिक्ष में यात्रा कर रहा है।
- सूर्य के हेलियोस्फीयर से बाहर निकलने वाला पहला अंतरिक्ष यान बनने से पहले, इसने बृहस्पति के चारों ओर नए वलयों और चंद्रमाओं तथा शनि के पांच चंद्रमाओं की खोज की थी।
- पाथफाइंडर
- पिक्सेल और सर्वम मिलकर ‘पाथफाइंडर’ को विकसित कर रहे हैं, जो भारत का पहला कक्षीय डेटा केंद्र उपग्रह है।
- अंतरिक्ष में स्थित यह 200 किलोग्राम का “कंप्यूटर” पृथ्वी अवलोकन डेटा का वास्तविक समय में विश्लेषण करने और उससे प्राप्त अंतर्दृष्टि को वापस भेजने के लिए हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग, जीपीयू (GPUs) और कृत्रिम मेधा का उपयोग करेगा।
- पारिस्थितिकी संहार/इकोसाइड
- इकोसाइड मानव गतिविधियों द्वारा पर्यावरण या पारिस्थितिकी तंत्र को बड़े पैमाने पर, जानबूझकर या लापरवाही से पहुंचाई गई ऐसी क्षति है, जो स्थायी या दीर्घकालिक विनाश का कारण बनती है।
- इस शब्द को वर्ष 1970 में प्रोफेसर आर्थर डब्ल्यू गाल्स्टन द्वारा गढ़ा गया था, जो एक पादप जीवविज्ञानी थे, और जिनके शुरुआती शोध ने ‘एजेंट ऑरेंज’ के विकास में योगदान दिया था।
- एंटरप्राइज़ एआई
- एंटरप्राइज़ एआई से तात्पर्य निर्णय लेने की प्रक्रिया, स्वचालन, उत्पादकता और ग्राहक सेवाओं में सुधार के लिए व्यावसायिक संचालन में कृत्रिम मेधा प्रौद्योगिकियों के एकीकरण से है।
- इसमें विभिन्न उद्योगों में प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, जेनरेटिव एआई, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन और एआई-संचालित साइबर सुरक्षा जैसे अनुप्रयोग शामिल हैं।
- पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS)
- PMOS हाल ही में प्रस्तावित एक व्यापक चिकित्सा फ्रेमवर्क है, जो ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ (PCOS) को एक जटिल चयापचय और अंतःस्रावी विकार के रूप में देखता है, जो अंडाशय के अतिरिक्त शरीर की कई अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित करता है।
- इसने तब ध्यान आकर्षित किया जब शोधकर्ताओं ने यह सुझाव दिया कि PCOS शब्द इस सिंड्रोम के चयापचय, हार्मोनल और हृदय संबंधी आयामों को पर्याप्त रूप से व्यक्त नहीं करता है।
- थ्यूसिडाइड्स ट्रैप
- थ्यूसिडाइड्स ट्रैप से तात्पर्य उस समय संघर्ष के बढ़े हुए जोखिम से है, जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित वर्चस्वशाली शक्ति को चुनौती देती है।
- इस शब्द को राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने लोकप्रिय किया था, जो प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसिडाइड्स द्वारा एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध के संबंध में लिखे गए लेखों पर आधारित है।
- डोनानेमैब
- डोनानेमैब एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा है, जिसका उपयोग मस्तिष्क में अमाइलॉइड-बीटा प्लाक को लक्षित करके शुरुआती चरण के अल्जाइमर रोग के उपचार के लिए किया जाता है।
- यह दवा हाल ही में भारत में इसके लॉन्च के बाद चर्चा में रही, जो देश में उन्नत अल्जाइमर उपचार और न्यूरोडीजनरेटिव रोग देखभाल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास को रेखांकित करती है।
- म्यूल खाते
- म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग अपराधियों द्वारा साइबर धोखाधड़ी, घोटालों या अन्य वित्तीय अपराधों के माध्यम से प्राप्त धन को गैर-कानूनी रूप से स्थानांतरित करने या मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) करने के लिए किया जाता है।
- ऐसे खाते अक्सर अनभिज्ञ/संदेहहीन व्यक्तियों, नकली पहचानों, या “मनी म्यूल” कहे जाने वाले भर्ती किए गए बिचौलियों का उपयोग करके खोले या संचालित किए जाते हैं।
चर्चा में रही प्रजातियाँ
पीकॉक टारेंटुला
- आंध्र प्रदेश ने हाल ही में ‘पीकॉक टारेंटुला ‘ (Peacock Tarantula) संरक्षण सर्वेक्षण शुरू किया है।
- पीकॉक टारेंटुला (पोइसीलोथेरिया मेटालिका), जिसे ‘गुटी ऑर्नामेंटल सैफायर टारेंटुला ‘ भी कहा जाता है, आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट की एक स्थानिक, वृक्षों पर रहने वाली मकड़ी है, जो कि गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में शामिल है।
- इसे पहली बार वर्ष 1899 में गुटी (आंध्र प्रदेश) में देखा गया था, और यह अपने धात्विक नीले रंग तथा पीले-सफेद निशानों के लिए जानी जाती है।
- यह प्रजाति मुख्य रूप से नंद्याल, गिद्डालुर और शेषाचलम के वन क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ यह शुष्क पर्णपाती वनों और पेड़ों की दरारों में निवास करती है।
स्याहगोश/कैराकल
- सीमा के निकट राजस्थान के थार मरुस्थल में एक बार फिर दुर्लभ ‘कैराकल’ देखा गया है।
- कैराकल (कैराकल कैराकल), जिसे स्थानीय तौर पर “पादंग” कहा जाता है और लोकप्रिय रूप से ‘मरुस्थलीय लिंक्स’ के नाम से भी जाना जाता है, एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है। यह भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
- अपने कानों के ऊपरी हिस्से पर काले बालों के गुच्छों और शक्तिशाली छलांगों के लिए पहचानी जाने वाली यह प्रजाति शुष्क घास के मैदानों, झाड़ियों और अर्ध-मरुस्थलों में निवास करती है।
- भारत में इसकी आबादी में 95% से अधिक की गिरावट आई है, और वर्तमान में केवल लगभग 50 जीवों के ही जीवित होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात में ही पाए जाते हैं।
श्वेत उदर वाला बगुला/व्हाइट-बैलिट हेरॉन
- पर्यावरण पैनल ने ‘व्हाइट-बैलिट हेरॉन’ (श्वेत उदर वाला बगुला) के संरक्षण से जुड़ी चिंताओं के बीच कलाई-II परियोजना को मंजूरी दे दी है।
- व्हाइट-बैलिट हेरॉन (Ardea insignis) एशिया के सबसे दुर्लभ और सबसे कम अध्ययन किए गए पक्षियों में से एक है। यह IUCN की ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ सूची में शामिल है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
- वैश्विक स्तर पर 60 से भी कम व्हाइट-बैलिट हेरॉन जीवित बचे हैं, जिनमें से लगभग 10 भारत में हैं। ये मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के नामदफा और वालॉन्ग क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यह पक्षी मुक्त रूप से बहने वाली नदियों के आवासों में रहता है और वर्तमान में बांधों के निर्माण, आवास के विनाश, शिकार और मानवीय हस्तक्षेपों के कारण आवास के संकट का सामना कर रहा है।
रस्टी-स्पॉटेड कैट
- दिल्ली-एनसीआर के अरावली क्षेत्र में पहली बार ‘रस्टी-स्पॉटेड कैट’ के प्रजनन को दर्ज किया गया है।
- विश्व की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में से एक, रस्टी-स्पॉटेड कैट की लंबाई 35–48 सेमी होती है, जिसमें से लगभग आधी इसकी पूंछ घनी होती है। इसके शरीर पर छोटे लाल-धूसर रंग के रोएँ होते हैं, जिसकी पीठ और पार्श्व भागों पर जंग के रंग जैसे धब्बे होते हैं।
- भारत, नेपाल और श्रीलंका की मूल निवासी यह प्रजाति आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में ‘निकट संकटग्रस्त’ के रूप में सूचीबद्ध है और भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन
- असम के होलोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभ्यारण्य में रेलवे पटरियों के ऊपर विशेष रूप से निर्मित ‘कैनोपी ब्रिजों’ (वृक्ष-वितान पुलों) के सफल उपयोग के बाद हाल ही में ‘वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन’ चर्चा में रहा।
- वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन (हूलॉक हूलॉक) भारत की एकमात्र कपि (ape) प्रजाति है। यह मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश और म्यांमार के वनाच्छादित क्षेत्रों में पाई जाती है।
- यह वृक्षों पर रहने वाला एक प्राइमेट है, जो अपनी तेज आवाजों और ‘ब्रेकिएशन’ (Brachiation – पेड़ों पर हाथों के सहारे झूलकर चलने की गति) के लिए जाना जाता है। यह उष्णकटिबंधीय सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वनों में निवास करता है।
- यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ के रूप में सूचीबद्ध है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित है।
चर्चा में रहे स्थान (भारत)
धार
- मध्य प्रदेश का धार जिला हाल ही में तब चर्चा में आया, जब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने चल रहे भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में भोजशाला प्रांगण को सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता दी।
- भोजशाला परमार राजा भोज से जुड़ा एक मध्यकालीन स्मारक है, और हिंदुओं द्वारा इसे ज्ञान का एक केंद्र तथा देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर माना जाता है।
- यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है और दशकों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच धार्मिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है।
त्रिपुरा
- त्रिपुरा हाल ही में ‘राष्ट्रीय अनुपालन न्यूनीकरण और वि-नियमन पहल’ के चरण I और चरण II के तहत सभी वि-नियमन प्राथमिकता क्षेत्रों को पूरा करने वाला भारत का पहला राज्य बनने के कारण चर्चा में रहा।
- इस पहल का उद्देश्य विनियामक बोझ को कम करना, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना, व्यापार से जुड़े मामूली प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ इकोसिस्टम में सुधार करना है।
थूथुकुड़ी
- भारत–कोरिया गणराज्य समुद्री सहयोग ढांचे “VOYAGES” के तहत, भारत के पहले ‘मेगा ग्रीनफील्ड शिपयार्ड’ के विकास के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद हाल ही में तमिलनाडु का थूथुकुड़ी चर्चा में रहा।
- इस प्रस्तावित शिपयार्ड की वार्षिक जहाज निर्माण क्षमता 2.5 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) परिकल्पित की गई है, और यह ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ का एक हिस्सा है।
- थूथुकुड़ी मन्नार की खाड़ी पर स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है और यहाँ वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह स्थित है, जो भारत के प्रमुख बंदरगाहों (में से एक है तथा समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स का एक प्रमुख केंद्र है।
वारंगल (भारत का पहला पीएम मित्र पार्क)
- भारत के पहले पीएम मित्र (PM MITRA – मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क के उद्घाटन के बाद हाल ही में तेलंगाना का वारंगल चर्चा में रहा।
- पीएम मित्रा पार्कों का विकास विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स सहायता और ‘प्लग-एंड-प्ले’ सुविधाओं के साथ एकीकृत वस्त्र निर्माण इकोसिस्टम बनाने के लिए किया जा रहा है।
- वारंगल का चयन उसके मजबूत वस्त्र आधार, कनेक्टिविटी और कपास उत्पादक क्षेत्रों से निकटता के कारण किया गया था। इस परियोजना से भारत के वस्त्र निर्यात को मजबूत करने और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
चर्चा में रहे स्थान (विश्व)
माउंट डुकोनो
- इंडोनेशिया में माउंट डुकोनो के पास ज्वालामुखी विस्फोट से जुड़ी एक घटना के दौरान तीन पर्वतारोहियों की मृत्यु हो गई।
- माउंट डुकोनो इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय जटिल ज्वालामुखियों में से एक है, जो उत्तरी मलूकू के हलमहेरा द्वीप पर स्थित है।
- वर्ष 1933 से ही इस ज्वालामुखी में लगभग निरंतर विस्फोटक गतिविधियाँ देखी जा रही हैं, जिनमें विस्फोटक उद्गार, राख के बादल और पंक का प्रवाह शामिल हैं।
- मार्च 2026 से अब तक इस ज्वालामुखी में 200 से अधिक बार विस्फोट हो चुका है और यह वर्तमान में भी इंडोनेशिया की ‘स्तर-दो’ ज्वालामुखी चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत बना हुआ है।
- इंडोनेशिया में बार-बार ज्वालामुखी गतिविधियाँ इसलिए होती हैं क्योंकि यह प्रशांत महासागरीय “रिंग ऑफ फायर” के किनारे स्थित है, जहाँ विवर्तनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं।
सूरीनाम
- भारत के विदेश मंत्री की हालिया यात्रा के बाद सूरीनाम चर्चा में रहा, जो भारत–कैरीकॉम (India–CARICOM) और दक्षिण अमेरिका के प्रति बढ़ते संपर्क को रेखांकित करता है।
- सूरीनाम (राजधानी – पारामारिबो) दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित एक छोटा देश है, जिसकी सीमाएं गुयाना, ब्राजील, फ्रेंच गुयाना और अटलांटिक महासागर से लगती हैं।
- यहाँ भारतीय मूल की एक महत्वपूर्ण आबादी निवास करती है, जो औपनिवेशिक काल के दौरान लाए गए गिरमिटिया मजदूरों के वंशज हैं। यह ऐतिहासिक संबंध सूरीनाम को भारत की प्रवासी कूटनीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाता है।
वियतनाम
- दोनों देशों के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को मजबूत करने के उद्देश्य से वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद हाल ही में वियतनाम (राजधानी – हनोई) चर्चा में रहा।
- दक्षिण चीन सागर के किनारे दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित वियतनाम, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आसियान (ASEAN) संरचना में रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
- भारत और वियतनाम रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा अन्वेषण और क्षेत्रीय संपर्क में घनिष्ठ सहयोग करते हैं, विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर को लेकर बनी चिंताओं के बीच यह सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- दोनों देश द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास “VINBAX” (वियतनाम-भारत द्विपक्षीय सेना अभ्यास) का भी आयोजन करते हैं, जो मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति स्थापना अभियानों और रक्षा सहयोग पर केंद्रित है।
कैस्पियन सागर
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों और चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच, रूस और ईरान के बीच एक वैकल्पिक व्यापार और लॉजिस्टिक्स गलियारे के रूप में उभरने के कारण हाल ही में कैस्पियन सागर चर्चा में रहा।
- यह विश्व का सबसे बड़ा अंतर्देशीय जल निकाय है, जिसकी सीमाएं रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अजरबैजान से लगती हैं। यह यूरेशियाई ऊर्जा और व्यापार कनेक्टिविटी (संपर्क) के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- कैस्पियन क्षेत्र ऊर्जा संसाधनों, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) तथा भारत, रूस और मध्य एशिया को शामिल करने वाली यूरेशियाई व्यापार कनेक्टिविटी के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।