सीमा सड़क संगठन (BRO) का प्रोजेक्ट ब्रह्मांक

संदर्भ: हाल ही में सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अरुणाचल प्रदेश के रानाघाट में ‘प्रोजेक्ट ब्रह्मांक’  का 16वां स्थापना दिवस मनाया। यह इस क्षेत्र में रणनीतिक सीमा अवसंरचना और कनेक्टिविटी विकसित करने में इसके पंद्रह वर्षों के समर्पित सेवाकाल का प्रतीक है।

प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के बारे में

  • इसे 29 जून 2011 को शुरू किया गया था और यह 3 दिसंबर 2011 से पूर्णतः परिचालन में है।
  • यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश के सियांग, पूर्व सियांग, पश्चिम सियांग, ऊपरी सियांग और शि-योमी जिलों के साथ-साथ असम के धेमाजी जिले के कुछ हिस्सों में रणनीतिक सड़क अवसंरचना के लिए उत्तरदायी है।
    • इसका मुख्यालय रानाघाट (पासीघाट), अरुणाचल प्रदेश में स्थित है।
  • वर्तमान में यह 811 किलोमीटर लंबी सड़कों और लगभग 86 पुलों (छोटे पुलों से लेकर बड़े स्टील और आर्क पुलों तक) का रखरखाव करता है।
  • इसमें सियोम नाला पर 100 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज और सिमंग नाला पर 165 मीटर लंबा पीएससी (PSC) ब्रिज शामिल है।

सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में

  • BRO की स्थापना 7 मई 1960 को हुई थी। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और भारत की प्रमुख सीमा अवसंरचना विकास एजेंसी है।
  • यह सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, सुरंगों, हवाई पट्टियों और अन्य रणनीतिक अवसंरचना के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।
  • BRO राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में दोहरी भूमिका निभाता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आरोग्य सेतु 2.0′ लॉन्च किया

संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में ‘आरोग्य सेतु 2.0’ का शुभारंभ किया है। यह कोविड-काल के कांटेक्ट-ट्रेसिंग एप्लिकेशन को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत एक व्यापक ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य ऐप’ के रूप में पुनर्गठित करता है।

आरोग्य सेतु 2.0 के बारे में

  • मूल रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान संपर्क ट्रेसिंग, जोखिम जागरूकता और नागरिक जुड़ाव के लिए विकसित इस एप्लिकेशन को अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा एक ‘पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड’ (PHR) एप्लिकेशन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक एकल नागरिक-केंद्रित डिजिटल गेटवे के रूप में पुनर्गठित किया गया है।
  • यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है:
    • आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (ABHA): उपयोगकर्ता अपना ABHA खाता बना और प्रबंधित कर सकते हैं।
    • डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स: अपनी सहमति से डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंच प्राप्त करना और उन्हें साझा करना।
    • एकीकृत इंटरफ़ेस: एक एकीकृत इंटरफ़ेस के माध्यम से विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करना।
  • महत्व: लगभग 20 करोड़ डाउनलोड के साथ, इस एप्लिकेशन से भारत के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम के अंगीकरण में तेजी आने और देश भर में ABDM सेवाओं के उपयोग को मुख्यधारा में लाने की उम्मीद है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के बारे में

  • इसे वर्ष 2021 में लॉन्च किया गया था। ABDM का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान प्रदान करके और सहमति के साथ स्वास्थ्य रिकॉर्ड के निर्बाध आदान-प्रदान को सक्षम करके एक अंतर संचालनीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
  • प्रमुख घटक: इसके मुख्य स्तंभों में शामिल हैं: ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता), HPR: स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर रजिस्ट्री, HFR: स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, सहमति-आधारित स्वास्थ्य सूचना साझाकरण ढांचा।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए ‘ SUMAN रोडमैप 2030′

संदर्भ: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में ‘सुमन रोडमैप 2030’ का शुभारंभ किया है। यह एक व्यापक रणनीतिक ढांचा है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को मजबूत करना और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति में तेजी लाना है।

SUMAN रोडमैप 2030 के बारे में

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा RMNCHA+N ढांचे के तहत विकसित यह रोडमैप ‘साक्ष्य-आधारित’ और ‘जीवन-चक्र’ दृष्टिकोण को अपनाता है, जिसमें गर्भावस्था-पूर्व, प्रसव-पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव-पश्चात देखभाल शामिल है।
  • इसका लक्ष्य 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना, नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करना, ‘रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को शून्य करना’ है।
  • इस रोडमैप का एक मुख्य केंद्र 13 राज्यों के 130 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में लक्षित हस्तक्षेपों का कार्यान्वयन करना है, जहां मातृ और नवजात स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अभी भी अधिक हैं।
  • यह स्वास्थ्य-प्रणाली को मजबूत करने, डिजिटल नवाचार, बेहतर रेफरल तंत्र, सामुदायिक भागीदारी, उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्था प्रबंधन और निगरानी को बढ़ाने पर केंद्रित है।

SUMAN के बारे में

  • ‘सुमन’ (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) की शुरुआत वर्ष 2019 में गर्भवती महिलाओं, माताओं, नवजात शिशुओं और शिशुओं को सुनिश्चित, गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए की गई थी।
  • यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं से इनकार करने के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति का पालन करती है और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच के माध्यम से रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को समाप्त करने का प्रयास करती है।

उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)

संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत विदेश भेजे जाने वाले धन में गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 2.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसका मुख्य कारण विदेशी जमा में कमी और विदेशी इक्विटी एवं ऋण साधनों में निवेश का कम होना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • मार्च 2026 में 2.59 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में, अप्रैल 2026 में विदेश भेजे जाने वाले धन में माह-दर-माह 11.9% की गिरावट देखी गई।
  • यह गिरावट मुख्य रूप से विदेशी जमा में 46% की कमी और विदेशी इक्विटी एवं ऋण साधनों में निवेश में भारी कमी के कारण हुई, जो लगभग 440 मिलियन डॉलर से घटकर 239 मिलियन डॉलर रह गया।
  • समग्र गिरावट के बावजूद, ‘पारिवारिक रखरखाव’ विदेश भेजे जाने वाले धन का सबसे बड़ा घटक बना हुआ है, जो कुल LRS बहिर्वाह के आधे से अधिक है। इसके अलावा, यात्रा, शिक्षा और विदेशी निवेश भी महत्वपूर्ण श्रेणियां बनी हुई हैं।

उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के बारे में

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत शुरू की गई यह योजना, नाबालिगों सहित निवासी व्यक्तियों को अनुमत चालू और पूंजी खाता लेनदेन के लिए विदेश में पैसा भेजने की अनुमति देती है।
  • इस योजना के तहत, एक निवासी व्यक्ति बिना किसी पूर्व RBI अनुमोदन के, अनुमेय उद्देश्यों के लिए प्रति वित्तीय वर्ष (अप्रैल–मार्च) 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक की राशि विदेश भेज सकता है।
  • इसमें विदेशी शिक्षा, चिकित्सा उपचार, यात्रा, करीबी रिश्तेदारों का रखरखाव, उपहार, उत्प्रवास (emigration), और विदेशी प्रतिभूतियों एवं परिसंपत्तियों में निवेश शामिल हैं।
  • यह योजना कुछ लेनदेन की अनुमति नहीं देती है, जिसमें लॉटरी टिकट, मार्जिन ट्रेडिंग, निषिद्ध सट्टा गतिविधियां और FEMA नियमों के तहत अन्य प्रतिबंधित लेनदेन शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने हूल दिवसपर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि दी

संदर्भ: ‘हूल दिवस’ (30 जून) के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 1855 के संथाल हूल (विद्रोह) के जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सबसे प्रारंभिक और महत्वपूर्ण जनजातीय विद्रोहों में से एक था।

हूल दिवस के बारे में

  • ‘हूल दिवस’ प्रतिवर्ष 30 जून को 1855 के संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। ‘हूल’ का अर्थ ‘क्रांति’ या ‘विद्रोह’ होता है।
  • यह आंदोलन सिधो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, उनके भाई चांद और भैरव मुर्मू, तथा उनकी बहनों फुलो और झानो के नेतृत्व में ब्रिटिश प्रशासन, ज़मींदारों, साहूकारों और अन्य बाहरी लोगों (दिकुओं) की शोषणकारी प्रथाओं के विरुद्ध छेड़ा गया था।
  • विद्रोह की शुरुआत 30 जून 1855 को वर्तमान झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव में हुई थी, जहाँ हजारों संथालों ने एकत्र होकर औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध की घोषणा की थी।
  • यद्यपि यह विद्रोह वर्तमान झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के बड़े हिस्सों में तेजी से फैल गया, लेकिन 1856 की शुरुआत तक अंग्रेजों ने मार्शल लॉ और सैन्य बल का प्रयोग करके इसे क्रूरतापूर्वक दबा दिया, जिसमें हजारों संथाल मारे गए।
  • इस विद्रोह ने जनजातीय समुदायों के गहरे शोषण को उजागर किया और प्रशासनिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया, जिसमें जनजातीय संरक्षण के लिए विशेष प्रावधानों के साथ संथाल परगना क्षेत्र का निर्माण शामिल था।

संथाल हूल का महत्व

  • औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध: संथाल हूल को 1857 के विद्रोह से पूर्व, ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सबसे प्रारंभिक और बड़े संगठित जनजातीय विद्रोहों में से एक माना जाता है।
  • भूमि और सामुदायिक अधिकारों का दावा: यह आंदोलन भूमि अलगाव (land alienation), शोषणकारी राजस्व प्रथाओं, ऋणग्रस्तता और पारंपरिक जनजातीय संस्थानों के क्षरण के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक था।
  • जनजातीय कल्याण और शासन के लिए विरासत: इस विद्रोह ने औपनिवेशिक प्रशासन को सुधार लाने और संथाल क्षेत्र के जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और भूमि अधिकारों को मान्यता देने के लिए विवश किया।

भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की स्वर्ण खनन परियोजना

संदर्भ: आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित जोन्नागिरी स्वर्ण परियोजना (अब ‘स्वर्णगिरि’ के नाम से पुनर्नामित) ने अपने वाणिज्यिक परिचालन की शुरुआत की है। यह भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की स्वर्ण खनन परियोजना है और स्वतंत्रता के बाद से देश की पहली प्रमुख निजी सोने की खदान है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस परियोजना का विकास ‘जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘दक्कन गोल्ड माइन्स’ द्वारा लगभग 405 करोड़ रुपये के निवेश के साथ किया गया है।
  • कुरनूल जिले के तुग्गाली मंडल में स्थित, यह खदान स्वर्णगिरि (जोन्नागिरी), एर्रागुडी और पागीदिराई गांवों में लगभग 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है।
  • प्रारंभिक उत्पादन लगभग 400 किलोग्राम सोना प्रति वर्ष होने की उम्मीद है। पूर्ण क्षमता पर यह उत्पादन 900–1000 किलोग्राम प्रति वर्ष तक पहुँच जाएगा, जबकि भविष्य की विस्तार योजनाओं में 2 टन प्रति वर्ष का लक्ष्य रखा गया है।
  • इस परियोजना में लगभग 13.1 टन प्रमाणित स्वर्ण संसाधन मौजूद हैं और इसका परिचालन जीवनकाल लगभग 15 वर्ष रहने का अनुमान है।

महत्व

  • घरेलू स्वर्ण उत्पादन को बढ़ावा: यह परियोजना भारत की सीमित घरेलू स्वर्ण उत्पादन क्षमता को मजबूत करती है और घरेलू स्वर्ण मूल्य श्रृंखला के विकास में सहायक है।
  • विदेशी मुद्रा की बचत: भारत प्रतिवर्ष 700–1000 टन सोने का आयात करता है; घरेलू उत्पादन में वृद्धि से आयात पर निर्भरता कम करने और समय के साथ बहुमूल्य विदेशी मुद्रा को बचाने में मदद मिल सकती है।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी: यह भारत के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और खनिज अन्वेषण तथा निष्कर्षण में निवेश को प्रोत्साहित कर सकता है।
  • क्षेत्रीय आर्थिक विकास: इस परियोजना से रोजगार सृजन, स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार और रायलसीमा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

भारत में स्वर्ण खनन के बारे में

  • दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक होने के बावजूद, भारत में घरेलू स्तर पर सोने का उत्पादन अपेक्षाकृत सीमित है।
  • वर्तमान में हट्टी गोल्ड माइन्स (कर्नाटक) भारत की प्रमुख सक्रिय स्वर्ण उत्पादक खदान है, जबकि प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) आर्थिक व्यवहार्यता न होने के कारण बंद हो गई थी।
  • परिणामस्वरूप, भारत की सोने की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है, जो स्वदेशी स्वर्ण खनन को संसाधन सुरक्षा और आयात प्रतिस्थापन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

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