संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण का प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: केंद्र सरकार ने विदेश व्यापार नीति (एफटीपी), 2023 में संशोधन कर बलात् श्रम के माध्यम से पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • विदेश व्यापार नीति, 2023 में एक नया पैरा जोड़ा गया है, जिसके तहत बलात् श्रम का उपयोग करके पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से उत्पादित या निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  • इस संशोधन को विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा अधिसूचित किया गया है तथा यह राजपत्र में प्रकाशन के 30 दिन बाद प्रभावी होगा।
  • केंद्र सरकार को उन निर्दिष्ट वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया गया है, जिनके संबंध में जाँच अथवा अन्य प्रासंगिक सामग्री से यह सिद्ध हो जाए कि उनका उत्पादन बलात् श्रम के माध्यम से किया गया है।
  • ऐसी जाँच की प्रक्रिया प्रक्रिया पुस्तिका, 2023 में नया अनुच्छेद जोड़कर निर्धारित की गई है, जिसके अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय स्वयं संज्ञान लेते हुए अथवा विश्वसनीय सूचना या शिकायत के आधार पर जाँच प्रारम्भ कर सकता है।
  • इस संशोधन में बलात् श्रम की परिभाषा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बलात् श्रम अभिसमय, 1930 (अभिसमय संख्या–29) के अनुरूप निर्धारित की गई है।

भारत ने यह संशोधन अभी क्यों किया?

  • वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बलात् श्रम एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, जिसके कारण अनेक देशों ने आयात नियमों तथा आपूर्ति शृंखला में समुचित सावधानी संबंधी आवश्यकताओं को कड़ा किया है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बलात् श्रम से जुड़ी वस्तुओं के बाज़ार तक पहुँच सीमित करने के लिए विभिन्न उपाय लागू किए हैं, जिससे निर्यातकों के लिए अनुपालन अपेक्षाएँ बढ़ गई हैं।
  • इसी पृष्ठभूमि में भारत ने विदेश व्यापार नीति, 2023 के अंतर्गत बलात् श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने तथा अपने व्यापार ढाँचे को नैतिक व्यापार के उभरते वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने हेतु यह कानूनी प्रावधान किया है।

संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ

  • आयात पर व्यापक प्रतिबंध: यह प्रतिबंध उन वस्तुओं पर लागू होगा जिनका उत्पादन या निर्माण पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से बलात् श्रम के माध्यम से किया गया हो।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परिभाषा: बलात् श्रम से आशय ऐसे कार्य या सेवा से है, जिसे किसी व्यक्ति से दंड के भय के तहत कराया जाए और जिसे उसने स्वेच्छा से स्वीकार न किया हो। यह परिभाषा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बलात् श्रम अभिसमय, 1930 के अनुरूप है।
  • जाँच एवं प्रवर्तन: विदेश व्यापार महानिदेशालय स्वयं संज्ञान लेते हुए अथवा विश्वसनीय शिकायत या सूचना के आधार पर जाँच कर सकता है। जाँच के निष्कर्षों अथवा अन्य प्रासंगिक सामग्री के आधार पर केंद्र सरकार उन निर्दिष्ट वस्तुओं को अधिसूचित कर सकती है, जिनके आयात पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
  • भावी प्रभाव: यह संशोधन राजपत्र में प्रकाशन के 30 दिन बाद प्रभावी होगा, जिससे आयातकों को अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

महत्त्व

  • नैतिक एवं उत्तरदायी व्यापार को बढ़ावा: शोषणकारी श्रम प्रथाओं से जुड़ी वस्तुओं के आयात को रोककर उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण को प्रोत्साहित करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप: भारत की व्यापार नीति को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बलात् श्रम अभिसमय, 1930 के अनुरूप बनाते हुए वैश्विक श्रम अधिकार सिद्धांतों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है।
  • नियामकीय प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाता है: सरकार को बलात् श्रम से जुड़ी वस्तुओं की जाँच एवं आयात प्रतिबंधित करने का अधिकार देकर अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
  • वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है: नैतिक स्रोतों से प्राप्त वस्तुओं तथा उत्तरदायी आपूर्ति शृंखलाओं से संबंधित वैश्विक अपेक्षाओं के अनुरूप भारत के व्यापार ढाँचे को सशक्त बनाकर व्यापार वार्ताओं एवं निर्यात बाज़ारों में उसकी विश्वसनीयता बढ़ाता है।
Shares: