असम के नामेरी बाघ अभयारण्य को संरक्षण संबंधी कार्यप्रणालियों के लिए वैश्विक मान्यता

संदर्भ: हाल ही में, असम स्थित नामेरी बाघ अभयारण्य को बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन के निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए संरक्षण आश्वासित बाघ मानक (Conservation Assured । Tiger Standards — CA।TS) के अंतर्गत अनुमोदित  दर्जा प्राप्त हुआ।

अन्य संबंधित जानकारी

  • असम के सभी चार बाघ अभयारण्य: काजीरंगा, मानस, ओरांग और नामेरी—अब CA।TS के अंतर्गत अनुमोदित दर्जा प्राप्त कर चुके हैं।
  • CA।TS के अंतर्गत भारत की स्थिति: नवीनतम अभयारण्य के शामिल होने के बाद, विश्व स्तर पर कुल 34 CA।TS-अनुमोदित स्थलों में से 26 स्थल भारत में हैं। अन्य स्थलों में भूटान में 4, रूस में 2 तथा नेपाल और मलेशिया में 1-1 स्थल शामिल हैं।

संरक्षण आश्वासित बाघ मानक (Conservation Assured । Tiger Standards — CA।TS) के बारे में

  • प्रकृति: CA।TS एक स्वैच्छिक, स्वतंत्र और वैश्विक रूपरेखा है, जो यह आकलन करती है कि बाघ संरक्षण क्षेत्र प्रभावी प्रबंधन और बाघों की सुरक्षा के न्यूनतम मानकों को पूरा करते हैं या नहीं। यह कोई रैंकिंग प्रणाली नहीं है।
  • उत्पत्ति: इसकी शुरुआत वर्ष 2013 में जापान में आयोजित प्रथम एशियाई पार्क कांग्रेस (First Asian Parks Congress) में की गई थी। इसका उद्देश्य प्रबंधन की प्रभावशीलता में सुधार करना और बाघ संरक्षण क्षेत्रों में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देना है।
  • फ्रेमवर्क: इसमें 7 स्तंभ और 17 तत्व शामिल हैं, जिन्हें मानकों और आकलन संबंधी मानदंडों का समर्थन प्राप्त है। इसके सात स्तंभ निम्नलिखित हैं:
    • महत्त्व एवं स्थिति
    • प्रबंधन
    • समुदाय
    • पर्यटन (वैकल्पिक)
    • संरक्षण एवं सुरक्षा
    • पर्यावास प्रबंधन
    • बाघों की आबादी
  • आकलन एवं स्थिति: इस प्रक्रिया में स्व-मूल्यांकन, राष्ट्रीय स्तर पर लेखा-परीक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समीक्षा शामिल है। स्थलों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
    • पंजीकृत (Registered): वे स्थल जिन्होंने अभी तक निर्धारित मानकों को प्राप्त नहीं किया है।
    • अनुमोदित (Approved): वे स्थल जिनके निर्धारित मानकों की पुष्टि आकलन और स्वतंत्र समीक्षा के माध्यम से की जा चुकी है।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2026 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 124वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आपातकाल के दौरान उनके निर्भीक विरोध तथा सुशासन और वंचित वर्गों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया गया।

जयप्रकाश नारायण के बारे में

  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार–उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित सिताबदियारा (जयप्रकाश नगर) गाँव में हुआ था। उन्हें लोकप्रिय रूप से लोकनायक (जनता के नेता) के नाम से जाना जाता है।
  • स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका: वे वर्ष 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के दौरान भूमिगत प्रतिरोध में प्रमुख भूमिका निभाई। वे 9 नवंबर 1942 को हजारीबाग केंद्रीय कारागार से भाग निकले थे।
  • समाजवादी राजनीति: उन्होंने वर्ष 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) की स्थापना में सहायता की। स्वतंत्रता के बाद वे चुनावी राजनीति से दूर हो गए और आचार्य विनोबा भावे के भूदान एवं सर्वोदय आंदोलनों से जुड़ गए। इन आंदोलनों का उद्देश्य स्वैच्छिक भूमि दान और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना था।

जेपी आंदोलन और संपूर्ण क्रांति

  • पृष्ठभूमि: वर्ष 1974 में बिहार के छात्रों ने भ्रष्टाचार, बढ़ती कीमतों और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के विरोध में आंदोलन शुरू किया तथा जयप्रकाश नारायण से इसका मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। उन्होंने इस शर्त पर सहमति दी कि आंदोलन अहिंसक बना रहेगा।
  • संपूर्ण क्रांति का आह्वान: 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण ने अहिंसक तरीकों से भारतीय समाज में व्यापक परिवर्तन का आह्वान किया। यह परिवर्तन केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं था।
  • सात घटक: उनकी परिकल्पना में निम्नलिखित क्षेत्रों में परिवर्तन शामिल था:
    • सामाजिक परिवर्तन
    • आर्थिक परिवर्तन
    • राजनीतिक परिवर्तन
    • सांस्कृतिक परिवर्तन
    • शैक्षिक परिवर्तन
    • वैचारिक एवं बौद्धिक परिवर्तन
    • आध्यात्मिक परिवर्तन

इसके केंद्र में नैतिक पुनर्जागरण और सत्ता का विकेंद्रीकरण था।

  • ऐतिहासिक महत्त्व: यह आंदोलन आपातकाल (1975–1977) के विरोध का एक प्रमुख आधार बना। वर्ष 1977 के आम चुनाव के बाद जनता पार्टी ने केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।

वैचारिक विरासत एवं सम्मान

  • वैचारिक विकास: जयप्रकाश नारायण की प्रारंभिक समाजवादी और मार्क्सवादी विचारधारा धीरे-धीरे गांधीवादी सिद्धांतों की ओर विकसित हुई। इनमें अहिंसा, सत्ता का विकेंद्रीकरण, स्वैच्छिक कार्रवाई और नैतिक पुनर्जागरण प्रमुख थे।
  • सम्मान: उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका निधन 8 अक्टूबर 1979 को हुआ था।

नानाजी देशमुख की जयंती

संदर्भ: प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2026 को नानाजी देशमुख की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जमीनी स्तर पर परिवर्तन, ग्रामीण विकास, सामुदायिक भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।

नानाजी देशमुख के बारे में

  • प्रारंभिक जीवन: नानाजी देशमुख का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के कडोली में हुआ था। वे लोकमान्य तिलक के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े।
  • राजनीतिक जीवन: उन्होंने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनसंघ को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन का समर्थन किया।
    • वे वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। उन्होंने मंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया।
  • ग्रामीण विकास एवं शिक्षा: उन्होंने वर्ष 1968 में दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) की स्थापना की। इस संस्थान ने सामुदायिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता के माध्यम से एकीकृत ग्रामीण विकास को बढ़ावा दिया। गोंडा, बीड और चित्रकूट में उनके कार्य कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, स्वच्छता और आजीविका सृजन पर केंद्रित थे।
    • उन्होंने चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की भी स्थापना की, जिसे भारत का पहला ग्रामीण विश्वविद्यालय माना जाता है।
    • अन्य योगदान: उन्होंने वर्ष 1950 में गोरखपुर में पहले सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। समाज के प्रति उनके योगदान के सम्मान में वर्ष 1999 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया।
  • पुरस्कार एवं सम्मान: उन्हें वर्ष 1999 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया तथा मरणोपरांत वर्ष 2019 में भारत रत्न प्रदान किया गया। उनका निधन 27 फरवरी 2010 को हुआ था।
Shares: