संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
संदर्भ: भारत ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर कन्वेंशन के तहत ‘अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि’ की सूची में शामिल किया है। इसके साथ ही देश में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 99 हो गई है।
अन्य संबंधित जानकारी
- इस वृद्धि के साथ, उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या 12 हो गई है, जो इसे आर्द्रभूमि संरक्षण में अग्रणी राज्यों में से एक बनाती है।
- यह मान्यता विशेष रूप से सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के साथ प्रवासी और निवासी पक्षी प्रजातियों के आवास के रूप में शेखा झील के पारिस्थितिक महत्व को स्वीकार करती है।
शेखा झील पक्षी अभयारण्य के बारे में
- शेखा हील यह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में गांगिरी रोड पर अलीगढ़ से लगभग 17 किमी दूर स्थित एक मीठे पानी की आर्द्रभूमि है, जो लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
- इस आर्द्रभूमि का निर्माण 1852 में ‘ऊपरी गंगा नहर’ से रिसाव के कारण हुआ था, जो इसे मानव निर्मित होने के बावजूद पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण आवास बनाता है।
- यह ‘सेंट्रल एशियन फ्लाईवे’ पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ प्रतिवर्ष लगभग 20,000 प्रवासी पक्षी आते हैं।
- यहाँ पक्षियों की लगभग 249 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 60 से अधिक आर्द्रभूमि पर निर्भर हैं।
- मुख्य पक्षियों में बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क, विभिन्न बत्तखें और सारस क्रेन (उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी) शामिल हैं। इसके अलावा यहाँ नीलगाय, काला हिरण और नेवला जैसे स्थलीय जीव भी पाए जाते हैं।
रामसर कन्वेंशन के बारे में
- रामसर कन्वेंशन 1971 में ईरान के रामसर शहर में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
- इसका उद्देश्य आर्द्रभूमि का संरक्षण, जैव विविधता को बनाए रखना और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करना।
- यह कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के ‘समझदारी से उपयोग’ को बढ़ावा देता है और आर्द्रभूमि के संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन बनाने पर बल देता है।
- इसके अनुसार, दलदल, फेन, पीटभूमि या पानी के क्षेत्र, चाहे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, जहाँ पानी स्थिर या बहता हुआ, मीठा, खारा या नमकीन हो, उन्हें आर्द्रभूमि माना जाता है। इसमें समुद्री पानी के वे क्षेत्र भी शामिल हैं जिनकी गहराई कम ज्वार के समय छह मीटर से अधिक न हो।
- विश्व आर्द्रभूमि दिवस 1997 से प्रतिवर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।
भारत में रामसर स्थल
- भारत 1 फरवरी, 1982 को रामसर कन्वेंशन में शामिल हुआ।
- भारत में एशिया के सर्वाधिक (99) रामसर स्थल हैं। विश्व में इसका स्थान तीसरा (यूनाइटेड किंगडम और मैक्सिको के बाद) है।
- भारत में तमिलनाडु में सर्वाधिक (20) रामसर स्थल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (12) का स्थान है।
- पश्चिम बंगाल का सुंदरवन आर्द्रभूमि, जो 4,230 वर्ग किलोमीटर में फैला है, भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल है, जबकि हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील, जिसका क्षेत्रफल 0.2 वर्ग किलोमीटर है, सबसे छोटा स्थल है।
- इन आर्द्रभूमियों को वन (संरक्षण) अधिनियम (1980), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (1986), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (1972) और आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत सुरक्षा प्रदान की जाती है।
