संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: रमन अनुसंधान संस्थान (RRI), बेंगलुरु की क्वांटम सूचना एवं कंप्यूटिंग (QuIC) प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने क्वांटम अवस्थाओं की स्थिरता बढ़ाने की एक नवीन विधि का प्रदर्शन किया है। इससे क्वांटम कंप्यूटरों में होने वाली गणनाओं की विश्वसनीयता और सटीकता में सुधार होने की संभावना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- पारंपरिक कंप्यूटरों के विपरीत, जो विद्युत अवस्थाओं को 0 और 1 के रूप में कूटबद्ध करते हैं, क्वांटम कंप्यूटर गणना के लिए क्वांटम जगत के विशिष्ट और सहज-बोध के विपरीत गुणों का उपयोग करते हैं।
- क्वांटम एंटैंगलमेंट (Quantum Entanglement) और अध्यारोपण जैसी घटनाएँ क्वांटम कंप्यूटरों को कुछ अत्यंत जटिल गणनाओं को कुशलतापूर्वक करने में सक्षम बनाती हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग के बारे में

- यह कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो क्वांटम यांत्रिकी का उपयोग करके ऐसी समस्याओं को हल करता है, जिन्हें सबसे शक्तिशाली पारंपरिक कंप्यूटर भी हल करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
- अत्यंत सूक्ष्म पैमाने पर अर्थात क्वांटम पैमाने पर, जिसमें परमाणु और उप-परमाण्विक कणों की सूक्ष्म दुनिया शामिल है, प्रकृति हमारे दैनिक अनुभव से भिन्न तरीके से व्यवहार करती है।
- सामान्य विशेषताएँ: कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अनुसार, पारंपरिक और क्वांटम कंप्यूटरों में सामान्यतः चिप, सर्किट और लॉजिक गेट होते हैं। दोनों एल्गोरिदम (क्रमिक निर्देशों) के माध्यम से कार्य करते हैं और सूचना को निरूपित करने के लिए 1 और 0 के बाइनरी कोड का उपयोग करते हैं।
- बिट्स: पारंपरिक कंप्यूटर बिट्स (बाइनरी नंबर) को दो अवस्थाओं में कूटबद्ध करने के लिए भौतिक वस्तुओं का उपयोग करते हैं—उदाहरण के लिए, विद्युत धारा का चालू या बंद होना अथवा चुंबक का ऊपर या नीचे की ओर होना।
- क्यूबिट्स: क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम बिट्स या क्यूबिट्स का उपयोग करते हैं। क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटिंग में सूचना की मूल इकाई है और पारंपरिक कंप्यूटर के बिट के क्वांटम समकक्ष के रूप में कार्य करता है।
- क्यूबिट्स का निर्माण परमाणुओं, आयनों, इलेक्ट्रॉनों या कृत्रिम परमाणुओं से किया जा सकता है। कृत्रिम परमाणुओं में अतिचालक सर्किट शामिल हैं, जिन्हें लिथोग्राफी तकनीक का उपयोग करके नैनोस्तर पर तैयार किया जाता है।
- अध्यारोपण (Superposition): जहाँ पारंपरिक बिट किसी एक समय में 1 या 0 को निरूपित करते हैं, वहीं एक क्यूबिट मापे जाने तक 1 और 0 की अध्यारोपित अवस्था में एक साथ रह सकता है।
- चरघातांकीय वृद्धि (Exponential Growth): जैसे-जैसे क्यूबिट्स एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं, संभावित अवस्थाओं की संख्या घातांकीय रूप से बढ़ती है। केवल 300 क्वांटम कणों के साथ ही संभावित विन्यासों की संख्या दृश्य ब्रह्मांड में अनुमानित परमाणुओं की संख्या से अधिक हो सकती है।
क्यूबिट्स के सामान्य प्रकार
- अतिचालक (सुपरकंडक्टिंग) क्यूबिट्स: कम तापमान पर अतिचालक पदार्थों से बनाए जाते हैं। इन्हें उनकी तेज़ गति और सटीक नियंत्रण के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
- ट्रैप्ड आयन क्यूबिट्स: फँसे हुए आयन कणों का उपयोग करते हैं। इनमें लंबा सुसंगति समय (Coherence Time) और उच्च-विश्वसनीयता वाले मापन की क्षमता होती है, लेकिन ये अतिचालक क्यूबिट्स की तुलना में धीमे होते हैं।
- क्वांटम डॉट्स: छोटे अर्धचालक होते हैं, जो एकल इलेक्ट्रॉन को क्यूबिट के रूप में सीमित रखते हैं। इनमें विस्तार-क्षमता और मौजूदा अर्धचालक प्रौद्योगिकी के साथ अनुकूलता की संभावना होती है।
- फोटॉन: प्रकाश के एकल कणों का क्यूबिट के रूप में उपयोग किया जाता है। ये ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से लंबी दूरी तक क्वांटम सूचना के संचरण में सक्षम होते हैं तथा क्वांटम संचार और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी में उपयोग किए जाते हैं।
क्वांटम यांत्रिकी के चार प्रमुख सिद्धांत

एंटैंगलमेंट और सुपरपोजिशन को बनाए रखना कठिन क्यों है?
- क्वांटम अवस्था की नाजुकता (Quantum State Fragility): क्वांटम अवस्थाएँ अत्यंत नाजुक होती हैं। तापीय कंपन, बाहरी विद्युत/चुंबकीय क्षेत्र या कॉस्मिक किरणों जैसी छोटी-सी गड़बड़ी भी अध्यारोपण और क्वांटम एंटैंगलमेंट को नष्ट कर सकती है।
- असम्बद्धता (Decoherence): बाहरी वातावरण के साथ अंतःक्रिया के कारण उलझी हुई क्वांटम अवस्था बहुत तेजी से विघटित हो सकती है। इस घटना को असम्बद्धता कहा जाता है।
- एंटैंगलमेंट सडन डेथ (Entanglement Sudden Death): कभी-कभी एंटैंगलमेंटसामान्य विघटन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अचानक समाप्त हो जाता है। इसे “एंटैंगलमेंट का अचानक अंत” कहा जाता है।
- सम्बद्धता समय (Coherence Time): वर्तमान क्यूबिट्स में त्रुटियाँ उत्पन्न होने से पहले क्वांटम सुसंगति केवल लगभग 10⁻⁵ से 10⁻⁴ सेकंड तक बनी रहती है, जबकि पारंपरिक कंप्यूटरों की मेमोरी में डेटा मिलीसेकंड से लेकर वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है।

