संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संदर्भ: खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने विश्व के वनों की स्थिति (SOFO) 2026 रिपोर्ट जारी की, जिसमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि, भूमि क्षरण और खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • वैश्विक वन एवं भूमि क्षरण:
  • विस्तार: विश्व स्तर पर 460 मिलियन हेक्टेयर (ha) से अधिक वन और लगभग 1.56 बिलियन हेक्टेयर भूमि का क्षरण हो चुका है।
  • प्रमुख कारक: जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, अवसंरचना विकास, भूमि-उपयोग में परिवर्तन और संसाधनों की बढ़ती माँग।
  • बढ़ता दबाव: वन उत्पादों और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की बढ़ती माँग से पारिस्थितिक क्षमता और मानवीय आवश्यकताओं के बीच का अंतर बढ़ रहा है।
  • आर्थिक लागत: भूमि क्षरण पर कार्रवाई न करने से प्रतिवर्ष अनुमानित 878 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 6.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक की आर्थिक लागत आती है।
  • पुनर्स्थापन में प्रगति और वैश्विक लक्ष्य
  • वैश्विक प्रतिबद्धताएँ: पिछले दो दशकों में देशों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक पहलों ने 1 बिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि को पुनर्स्थापन के अंतर्गत लाने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • कार्यान्वयन संबंधी अंतराल: वित्तीय, शासन संबंधी, निगरानी संबंधी और तकनीकी बाधाओं के कारण प्रगति असमान बनी हुई है।
  • पुनर्स्थापन की आवश्यकता: वर्ष 2030 तक वैश्विक पुनर्स्थापन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कम-से-कम 470 मिलियन हेक्टेयर भूमि को पुनर्स्थापन के अंतर्गत लाने की आवश्यकता है।
  • वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा: कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा का लक्ष्य 2, वर्ष 2030 तक क्षरित स्थलीय, अंतर्देशीय जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से को प्रभावी पुनर्स्थापन के अंतर्गत लाने का लक्ष्य निर्धारित करता है।
  • वन एवं भूदृश्य पुनर्स्थापन में भारत का योगदान: भारत 18.9 मिलियन हेक्टेयर भूमि के पुनर्स्थापन के साथ विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है। चीन 127.4 मिलियन हेक्टेयर के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद सूडान, मंगोलिया और इंडोनेशिया का स्थान है।
  • क्षरित भूमि का क्षेत्रीय वितरण: रिपोर्ट में वर्ष 2019 के लिए क्षरित भूमि के निम्नलिखित आँकड़े दिए गए हैं:
  • एशिया: 583 मिलियन हेक्टेयर (19%)।
  • अफ्रीका: 334 मिलियन हेक्टेयर (12%)।
  • दक्षिण अमेरिका: 245 मिलियन हेक्टेयर (14%)।
  • पुनर्स्थापन के लाभ:
  • जलवायु और जैव विविधता: जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन, कार्बन भंडारण, प्राकृतिक आवासों की बहाली तथा प्रजातियों के संरक्षण में सहायता करता है।
  • खाद्य सुरक्षा : मृदा स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, कृषि उत्पादकता और कृषि-खाद्य प्रणाली की सुदृढ़ता में सुधार करता है।
  • आजीविका: ग्रामीण रोजगार, सतत मूल्य शृंखलाओं और सामाजिक-आर्थिक सुदृढ़ता को मजबूत करता है।
  • आर्थिक लाभ: अनुकूल परिस्थितियों में, पुनर्स्थापन में निवेश किए गए प्रत्येक 1 अमेरिकी डॉलर पर 30 अमेरिकी डॉलर तक का लाभ प्राप्त हो सकता है, हालाँकि लाभ परिस्थितियों और किए गए हस्तक्षेप के अनुसार भिन्न होते हैं।
  • निगरानी संबंधी चुनौतियाँ :
  • खंडित रिपोर्टिंग: विभिन्न परिभाषाएँ, संकेतक और कार्यप्रणालियाँ देशों तथा रूपरेखाओं के बीच तुलना को सीमित करती हैं।
  • प्रभाव का सीमित आकलन: निगरानी मुख्यतः पुनर्स्थापित क्षेत्र पर केंद्रित रहती है, न कि दीर्घकालिक जैव विविधता की बहाली, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक परिणामों पर।
  • दीर्घकालिक प्रबंधन: पुनर्स्थापन की सफलता के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेपों के बाद भी निरंतर सहभागिता और उचित प्रबंधन आवश्यक है।

रिपोर्ट की सिफारिशें

  • लोगों को सशक्त बनाना और अधिकारों के प्रति जागरूक करना : भूमि अधिकारों को सुरक्षित करना, स्वदेशी ज्ञान और सहमति का सम्मान करना तथा समावेशी भागीदारी और लाभों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना।
  • भूदृश्य-स्तरीय पुनर्स्थापन अपनाना: संरक्षण, उत्पादन और आजीविका के बीच संतुलन बनाते हुए कृषि वानिकी, प्राकृतिक पुनर्जनन और सतत भूमि प्रबंधन को एकीकृत करना।
  • वित्त जुटाना और सतत व्यावसायिक मॉडल मजबूत करना: मिश्रित वित्त सहित सार्वजनिक और निजी वित्त जुटाना तथा लाभदायक मूल्य श्रृंखलाओं और पुनर्स्थापन के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण को बढ़ावा देना।
  • नीतियों और संस्थानों को सशक्त बनाना: सुसंगत कानूनों और नीतियों को सुनिश्चित करना, भूमि पर सुरक्षित अधिकार सुनिश्चित करना, राजकोषीय प्रोत्साहनों में सामंजस्य स्थापित करना तथा संस्थानों के बीच समन्वय करना।
  • निगरानी और नवाचार में सुधार करना: संकेतकों का मानकीकरण करना, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार करना तथा जैव विविधता, वन स्वास्थ्य और आजीविका संबंधी परिणामों की निगरानी करना।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के बारे में

  • FAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है, जिसकी स्थापना 16 अक्टूबर 1945 को भुखमरी को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करने हेतु की गई थी।
  • इसका मुख्यालय रोम, इटली में स्थित है और प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है।
  • FAO खाद्य सुरक्षा, कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देता है।
  • FAO के 194 सदस्य हैं—193 देश और यूरोपीय संघ—और यह विश्वभर के 130 से अधिक देशों में कार्य करता है।
  • इसे सदस्य देशों के योगदान और अन्य स्रोतों से वित्तपोषण प्राप्त होता है।
  • तीन मुख्य उद्देश्य:
  • भूख, खाद्य असुरक्षा और कुपोषण का उन्मूलन
  • गरीबी का उन्मूलन करना तथा सभी के लिए आर्थिक और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना
  • वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करना
Shares: