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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारत के ऊर्जा संक्रमण प्रयासों को आवश्यक प्रोत्साहन देने वाली एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के अंतर्गत, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के वैज्ञानिकों ने समुद्री जल से लिथियम को कुशलतापूर्वक निकालने की एक नई तकनीक विकसित की है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • अनुसंधान विकास: BARC के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित की है, जिसके निष्कर्ष टैलेंटा (Talanta) नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
  • प्रमुख उपलब्धि: अनुकूलित प्रयोगशाला परिस्थितियों में इस विधि से प्राकृतिक समुद्री जल से लगभग 90% लिथियम का निष्कर्षण किया गया।
  • विशिष्ट विशेषता: इस तकनीक में अपेक्षाकृत कम कार्बनिक विलायक और कम अतिरिक्त रसायनों का उपयोग होता है। साथ ही, विलायक का पुनः उपयोग भी किया जा सकता है। हालाँकि, विलायक की कुछ मात्रा का नष्ट होना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।

समुद्री जल से लिथियम का निष्कर्षण चुनौतीपूर्ण क्यों है?

  • रणनीतिक महत्त्व: लिथियम एक महत्त्वपूर्ण खनिज है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों में किया जाता है।
  • विशाल संसाधन क्षमता: अनुमान है कि समुद्री जल में 180–230 अरब टन घुला हुआ लिथियम मौजूद है, जो इसे एक विशाल संभावित संसाधन बनाता है। यह अनुमान आर्थिक रूप से निष्कर्षण योग्य भंडार को नहीं दर्शाता है।
  • कम सांद्रता: समुद्री जल में लिथियम की मात्रा केवल लगभग 0.17 मिलीग्राम प्रति लीटर होती है, जिसके कारण बहुत अधिक मात्रा में जल का प्रसंस्करण करना आवश्यक होता है।
  • चयनात्मक निष्कर्षण की चुनौती: मैग्नीशियम और लिथियम का अनुपात 6,000 से अधिक है, जिससे अन्य प्रतिस्पर्धी आयनों से लिथियम को अलग करना कठिन हो जाता है।
  • प्रसंस्करण संबंधी बाधाएँ: विलायक की खपत, ऊर्जा की आवश्यकता, निष्कर्षण की दक्षता और अपशिष्ट प्रबंधन व्यावसायिक व्यवहार्यता के लिए महत्त्वपूर्ण विचारणीय विषय बने हुए हैं।

इस उपलब्धि का महत्त्व

  • आपूर्ति के स्रोतों में विविधता: समुद्री जल से लिथियम का निष्कर्षण, लिथियम के पारंपरिक स्रोतों का पूरक बन सकता है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता ला सकता है।
  • भारत के लिए रणनीतिक प्रासंगिकता: यह तकनीक भविष्य में घरेलू बैटरी विनिर्माण को बढ़ावा दे सकती है और आयात में व्यवधानों के प्रति भारत की संवेदनशीलता को कम कर सकती है।
  • प्रक्रिया की संभावित दक्षता: प्रयोगशाला स्तर पर उच्च निष्कर्षण दर, विलायक की कम आवश्यकता और अतिरिक्त रासायनिक पदार्थों पर कम निर्भरता इस तकनीक को आशाजनक बनाती है।
  • संभावित पर्यावरणीय लाभ: रसायनों की कम खपत और विलायक के पुनः उपयोग से अपशिष्ट में कमी आ सकती है, लेकिन इसके समग्र पर्यावरणीय लाभ की पुष्टि होना अभी बाकी है।

सीमाएँ

  • व्यावसायिक स्तर पर विस्तार: प्रयोगशाला में प्राप्त परिणामों से औद्योगिक स्तर पर इस विधि की आर्थिक या तकनीकी व्यवहार्यता सिद्ध नहीं होती है।
  • संचालन संबंधी चुनौतियाँ: प्रत्येक पुनः उपयोग चक्र में लगभग 10% कार्बनिक विलायक भौतिक रूप से नष्ट हो गया, जबकि लंबे समय तक मिश्रण करने पर लगातार इमल्शन (पायस) बनने की समस्या प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित कर सकती है।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: ऊर्जा की खपत, रसायनों की लागत, विलायक की हानि और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पर संभावित प्रभावों का आगे आकलन करना आवश्यक है।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्राथमिकताएँ: भारत को समुद्री जल से प्रत्यक्ष लिथियम निष्कर्षण पर राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास की महत्त्वपूर्ण चुनौती शुरू करने संबंधी नीति आयोग की सिफारिश को आगे बढ़ाना चाहिए। इसमें उच्च निष्कर्षण दर, कम लागत, कम ऊर्जा खपत और कम उत्सर्जन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
  • प्रायोगिक स्तर पर प्रदर्शन: BARC की इस प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि इसके दीर्घकालिक प्रदर्शन, विलायक की पुनर्प्राप्ति, परिचालन लागत और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया जा सके।
  • समुद्री जल विलवणीकरण संयंत्रों के साथ एकीकरण: नीति आयोग की सिफारिश के अनुसार, भारत को समुद्री जल विलवणीकरण संयंत्रों से निकलने वाली अपशिष्ट जल धाराओं में लिथियम की सांद्रता और उसके निष्कर्षण की आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन करना चाहिए।
  • वैश्विक प्रौद्योगिकियों का आकलन: आयन-चयनात्मक झिल्लियों और विद्युत-रासायनिक निष्कर्षण सहित उभरती तकनीकों की तुलना BARC की विधि से लागत, दक्षता और पर्यावरणीय प्रदर्शन के आधार पर की जानी चाहिए।
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