संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—विकास एवं अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनका प्रभाव; जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जागरूकता एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारतीय पेटेंट कार्यालय ने दवा-प्रतिरोधी तपेदिक (DR-TB) के उपचार में उपयोग किए जाने वाले BPaL दवा संयोजन के लिए अमेरिका स्थित टीबी एलायंस के पेटेंट आवेदन को अस्वीकार कर दिया है। इससे जेनेरिक दवाओं के प्रतिस्पर्धी उत्पादन में आने वाली एक संभावित बाधा दूर हुई है और उपचार को अधिक किफायती बनाने की संभावना बढ़ी है।

अन्य संबंधित  जानकारी

  • पेटेंट आवेदन: अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन टीबी एलायंस ने दवा-प्रतिरोधी तपेदिक के उपचार हेतु बेडाक्विलीन, प्रेटोमैनिड और लाइनज़ोलिड के BPaL संयोजन के लिए पेटेंट आवेदन किया था।
  • अनुदान-पूर्व विरोध: इस आवेदन के विरुद्ध पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 25(1) के तहत रोगी समूहों और जनस्वास्थ्य संगठनों के नेतृत्व में दो अनुदान-पूर्व विरोध दर्ज किए गए।
  • विरोध के आधार: विरोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि मौजूदा दवाओं का यह संयोजन पहले ही पूर्ववर्ती शोध और नैदानिक परीक्षणों में प्रकट किया जा चुका था तथा इसमें पर्याप्त नवीनता या दूरदर्शी कदम का अभाव था।
  • पेटेंट कार्यालय का निर्णय: पेटेंट आवेदन को धारा 15 के तहत अस्वीकार कर दिया गया, क्योंकि यह पेटेंट-योग्यता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता था। इनमें नवीनता, आविष्कारशील कदम और पर्याप्त प्रकटीकरण से संबंधित शर्तें शामिल थीं।

BPaL उपचार पद्धति को समझना

  • संघटन: BPaL में तीन दवाएँ शामिल हैं:
    • B – बेडाक्विलीन : एक तपेदिक-रोधी दवा, जिसका उपयोग दवा-प्रतिरोधी जीवाणु उपभेदों के विरुद्ध किया जाता है।
    • Pa – प्रेटोमैनिड: टीबी एलायंस द्वारा विकसित एक नवीन टीबी-रोधी दवा।
    • L – लाइनज़ोलिड: दवा-प्रतिरोधी तपेदिक के उपचार में उपयोग की जाने वाली एक पएंटीबायोटिक दवा।
  • कम अवधि का उपचार: BPaL विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा दवा-प्रतिरोधी तपेदिक (DR-TB) के कुछ प्रकारों से पीड़ित पात्र रोगियों के लिए अनुशंसित छह माह का पूर्णतः मौखिक उपचार है। यह पुराने उपचार विकल्पों का एक विकल्प प्रदान करता है, जिनकी अवधि 18–24 माह तक हो सकती थी और जिनमें कभी-कभी पीड़ादायक इंजेक्शन भी शामिल होते थे।
  • BPaLM उपचार पद्धति: BPaLM में BPaL की तीन दवाओं के साथ मोक्सीफ्लॉक्सासिन (M) को भी शामिल किया जाता है। भारत के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) ने बहुदवा-प्रतिरोधी या रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी तपेदिक से पीड़ित पात्र रोगियों के लिए इस छह माह की उपचार पद्धति को अपनाया है।
  • उपचार के परिणाम: BPaLM उपचार पद्धति में 89% की उपचार सफलता दर दर्ज की गई है, जबकि मानक उपचार पद्धतियों में यह दर 52–75% है। भारत के राष्ट्रीय तपेदिक कार्यक्रम के तहत 15,000 से अधिक रोगियों ने BPaLM उपचार शुरू किया है।
  •  अंतरराष्ट्रीय पेटेंट की स्थिति: बताया जाता है कि टीबी एलायंस के पास दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और रूसी संघ सहित 11 देशों में BPaL संयोजन को कवर करने वाले पेटेंट हैं। इन पेटेंटों की अवधि वर्ष 2036 में समाप्त होनी निर्धारित है।

निर्णय का महत्त्व

  • जेनेरिक दवाओं के प्रतिस्पर्धी उत्पादन की संभावना: इस पेटेंट आवेदन के खारिज होने से इससे उत्पन्न संभावित पेटेंट बाधा दूर हो गई है। इससे अन्य निर्माता भारत में लागू नियामक आवश्यकताओं के अधीन BPaL संयोजन का उत्पादन करने की संभावनाएँ तलाश सकते हैं।
  • सरकारी व्यय में संभावित कमी: दवा-प्रतिरोधी तपेदिक (DR-TB) की दवाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से पात्र रोगियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसलिए, दवाओं की खरीद कीमतों में कमी से सरकार को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है तथा समान बजट में अधिक रोगियों को उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
  • पूर्ववर्ती जेनेरिक प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाना: वर्ष 2023 में बेडाक्विलीन पर द्वितीयक पेटेंट खारिज होने के बाद जेनेरिक प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप छह माह के BPaLM उपचार की बताई गई लागत वर्ष 2022 के 588 अमेरिकी डॉलर से घटकर 284 अमेरिकी डॉलर हो गई।
  • एवरग्रीनिंग पर अंकुश: यह निर्णय मौजूदा दवाओं और उनके संयोजनों पर द्वितीयक पेटेंट की कड़ी जाँच को प्रोत्साहित करता है। यह पर्याप्त नवीन एवं आविष्कारशील योगदान के बिना बाजार में विशिष्ट अधिकार (एकाधिकार) की अवधि बढ़ाने से रोकने में भारत के पेटेंट-योग्यता मानकों की भूमिका को रेखांकित करता है।

चुनौतियाँ एवं सीमाएँ

  • कीमतों में स्वतः कमी नहीं: पेटेंट आवेदन खारिज होने से दवाओं की कीमतें स्वयं निर्धारित नहीं होतीं और न ही जेनेरिक विकल्पों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित होती है। वास्तविक लाभ गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाले निर्माताओं के बाजार में प्रवेश और प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
  • नियामक अनुमोदन आवश्यक: पेटेंट आवेदन का खारिज होना दवा के नियामक अनुमोदन से अलग है। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत उपयोग के लिए बेडाक्विलीन और प्रेटोमैनिड को मंजूरी दी है। निर्माताओं को अपने उत्पादों का विपणन करने से पहले संबंधित नियामक आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
  • सार्वजनिक खरीद एवं आपूर्ति संबंधी बाधाएँ: यदि अधिक निर्माता बाजार में प्रवेश भी करते हैं, तब भी पात्र रोगियों को बिना किसी देरी के उपचार उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा समय पर खरीद और निर्बाध आपूर्ति आवश्यक होगी।
  • दवाओं से इतर अन्य लागतें: रोगियों को यात्रा, सार्वजनिक कार्यक्रम के दायरे से बाहर की जाँच, पोषण तथा आय की हानि पर व्यय करना पड़ सकता है। केवल दवाओं की कीमतों में कमी से इन वित्तीय एवं सामाजिक बाधाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता।

आगे की राह

  • कम अवधि वाले उपचार की पहुँच का विस्तार: राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिफैम्पिसिन-प्रतिरोधी एवं बहुदवा-प्रतिरोधी तपेदिक से पीड़ित सभी चिकित्सकीय रूप से पात्र रोगियों का राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार BPaL/BPaLM उपचार के लिए आकलन किया जाए।
  • गुणवत्ता-आश्वस्त जेनेरिक दवा निर्माण को बढ़ावा: जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं प्रभावकारिता की कठोर जाँच बनाए रखते हुए अधिक निर्माताओं को बाजार में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  •  खरीद एवं आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करना: सरकारी खरीद एजेंसियों को प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया अपनाकर किफायती कीमतें सुनिश्चित करनी चाहिए तथा सभी उपचार केंद्रों पर दवाओं की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखनी चाहिए।
  • रोगियों को व्यापक सहायता प्रदान करना: दवा-प्रतिरोधी तपेदिक (DR-TB) के रोगियों के समक्ष आने वाली व्यापक बाधाओं को दूर करने के लिए कम अवधि वाले उपचार को समय पर निदान, दवाओं की सुरक्षा की निगरानी, पोषण संबंधी सहायता तथा उपचार के प्रति अनुपालन सुनिश्चित करने वाली सहायता के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।
Shares: