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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा; विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ, देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: सरकार ने परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors–SMRs) विकसित कर उन्हें परिचालन में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • संसद ने शांति अधिनियम, 2025 (SHANTI Act, 2025) पारित किया है, जिसके माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी, विशेषकर अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया है। साथ ही, परमाणु सुरक्षा के नियामक ढाँचे को भी सुदृढ़ किया गया है।
  • केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के अनुसंधान, अभिकल्पन, विकास एवं तैनाती के लिए किया गया है।
  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) तीन स्वदेशी रिएक्टर डिज़ाइनों का विकास कर रहा है—
    • 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200)
    • 55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR-55)
    • 5 मेगावाट तापीय क्षमता तक का उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR), जिसका उपयोग हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जाएगा।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) क्या हैं?

  • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) ऐसे परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी क्षमता सामान्यतः 300 मेगावाट विद्युत (MWe) या उससे कम होती है। इन्हें मॉड्यूलर प्रौद्योगिकी के आधार पर विकसित किया जाता है, जिसमें कारखानों में निर्माण, क्रमिक उत्पादन तथा कम निर्माण अवधि जैसी विशेषताएँ शामिल होती हैं।
  • लगभग 1,000 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों की तुलना में SMRs के लिए प्रारंभिक निवेश कम होता है तथा इन्हें विद्युत माँग के अनुसार चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा सकता है।
  • निकट भविष्य में विकसित होने वाले अधिकांश SMRs हल्के जल रिएक्टर (LWR) प्रौद्योगिकी, विशेषकर दाबित जल रिएक्टर (PWR) पर आधारित हैं। वहीं उन्नत डिज़ाइनों में तीव्र न्यूट्रॉन रिएक्टर (FNR), उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGR), गलित लवण रिएक्टर (Molten Salt Reactor–MSR) शामिल हैं।
  • अपने छोटे आकार के कारण ये रिएक्टर दूरस्थ एवं ग्रिड से असंबद्ध क्षेत्रों, औद्योगिक समूहों, उद्योगों की स्व-उपयोग विद्युत आवश्यकताओं, बंद हो रहे कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के पुनः उपयोग तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माने जाते हैं।

भारत का स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) कार्यक्रम

  • यह कार्यक्रम परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) का विकास एवं परिचालन सुनिश्चित करना है।
  • वर्तमान में तीन स्वदेशी रिएक्टर डिज़ाइन विकसित किए जा रहे हैं—
    • भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर–200 (BSMR-200) (220 MWe): यह एक स्वदेशी दाबित जल रिएक्टर है, जिसे BARC एवं न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है।  इसके लिए महाराष्ट्र के तारापुर को परियोजना स्थल के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है तथा अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक (In-Principle) स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है।
    • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर–55 (SMR-55) (55 MWe): यह भी एक स्वदेशी दाबित जल रिएक्टर (PWR) है।  इसके लिए भी महाराष्ट्र के तारापुर को परियोजना स्थल के रूप में अनुमोदित किया गया है तथा अभियांत्रिकी एवं निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
    • उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (HTGCR) (अधिकतम 5 MWth): इसका विकास विशाखापत्तनम स्थित BARC में किया जा रहा है। इसे हरित हाइड्रोजन उत्पादन हेतु कॉपर–क्लोरीन ऊष्मा-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ने के लिए परमाणु ऊष्मा स्रोत के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए स्थल स्वीकृति तथा पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु संदर्भ शर्तें प्राप्त हो चुकी हैं। इन तीनों लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों की प्रथम इकाइयाँ प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के परिसरों में स्थापित की जाएँगी।

भारत में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान स्थिति

  • वर्तमान में भारत सात स्थलों पर स्थित 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का संचालन कर रहा है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट है।
  • वर्तमान में निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने पर वर्ष 2031–32 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 22 गीगावाट तक पहुँचने की संभावना है।
  • वर्ष 2032 के बाद, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) तथा हल्के जल रिएक्टर (LWR) के माध्यम से अतिरिक्त 32 गीगावाट क्षमता स्थापित किए जाने की योजना है, जिससे वर्ष 2047 तक कुल क्षमता लगभग 54 गीगावाट हो जाएगी।
  • शेष 46 गीगावाट क्षमता का विकास केंद्रीय एवं राज्य सार्वजनिक उपक्रमों, राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र तथा संयुक्त उपक्रमों द्वारा विभिन्न व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है।
  • परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

इस पहल का महत्त्व

  • ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना: यह पहल विश्वसनीय, निम्न-कार्बन आधारभूत विद्युत उपलब्ध कराकर भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाएगी तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करेगी।
  • औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी: यह इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट तथा अन्य धातु उद्योगों जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं समर्पित विद्युत उपलब्ध कराएगी तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन को भी बढ़ावा देगी।
  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति: यह पहल वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तथा वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक होगी।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन: यह स्वदेशी रिएक्टर विकास, घरेलू विनिर्माण, परमाणु अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगी तथा शांति अधिनियम, 2025 के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देगी।
  • विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति का विस्तार: यह दूरस्थ एवं ग्रिड से असंबद्ध क्षेत्रों तक बिजली पहुँचाने में सहायक होगी तथा सेवानिवृत्त हो रहे जीवाश्म ईंधन आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा देगी।
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