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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; औद्योगिक नीति और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।
संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (BHAVYA Rasayan) योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय साझा अवसंरचना के माध्यम से रसायन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु देशभर में तीन समर्पित रसायन पार्क स्थापित करना है।

भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (BHAVYA Rasayan) योजना के बारे में
- घोषणा: केंद्रीय बजट 2026–27 में केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में।
- क्रियान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 (5 वर्ष)।
- कुल वित्तीय परिव्यय: ₹3,030 करोड़
- ₹3,000 करोड़ साझा अवसंरचना एवं बुनियादी उपयोगिताओं के विकास के लिए।
- ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के लिए।
- उद्देश्य: निवेश, घरेलू विनिर्माण तथा भारत के रसायन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए प्लग-एंड-प्ले साझा अवसंरचना एवं बुनियादी उपयोगिताओं से युक्त तीन समर्पित रसायन पार्कों की स्थापना करना।
- वित्तीय सहायता:
- प्रत्येक रसायन पार्क के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक का अनुदान।
- यह सहायता संबंधित राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम ₹500 करोड़ के अंशदान की शर्त के अधीन होगी।
- पार्कों का चयन: राज्यों के बीच चैलेंज रूट के माध्यम से किया जाएगा।
- भूमि आवश्यकता:
- प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) निरंतर एवं सभी प्रकार के कानूनी/स्वामित्व संबंधी बाधाओं से मुक्त भूमि आवश्यक होगी।
- राज्य सरकार के प्रस्ताव के अनुसार पार्क ग्रीनफील्ड अथवा ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार के हो सकते हैं।
- अनुमानित निवेश: प्रत्येक पार्क से ₹20,000–50,000 करोड़ के निवेश आकर्षित होने की अपेक्षा है, जबकि केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता केवल साझा अवसंरचना के विकास तक सीमित होगी।
- साझा अवसंरचना सुविधाएँ:
- सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (CETP)।
- उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधा (TSDF)।
- खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना।
- जल आपूर्ति एवं वितरण प्रणाली।
- विलायक पुनर्प्राप्ति एवं आसवन सुविधाएँ।
- भाप उत्पादन एवं वितरण नेटवर्क।
- परस्पर संबद्ध पाइपलाइन नेटवर्क।
- लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग (भंडारण) सुविधाएँ।
- दायरा: यह योजना रसायन उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को समर्थन प्रदान करती है, जिसमें अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम तथा सहायक उद्योग शामिल हैं।
योजना के लाभ
- रसायन उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाती है: अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम तथा सहायक उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे संसाधनों का अधिक दक्ष उपयोग होता है तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आती है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देती है: साझा अवसंरचना लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करती है, भारत का वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण मजबूत करती है, निर्यात को बढ़ावा देती है, आयात-प्रतिस्थापन को प्रोत्साहित करती है तथा घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ती है।
- निवेश आकर्षित करती है एवं रोजगारों का सृजन करती है: घरेलू एवं विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करती है, बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न करती है तथा डाउनस्ट्रीम उद्योगों के विकास को गति देती है।
- सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है: सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधा तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली जैसी केंद्रीकृत पर्यावरणीय अवसंरचना स्थापित कर बेहतर पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करती है।
- अर्थव्यवस्था में गुणक प्रभाव उत्पन्न करती है: कृषि, वस्त्र, औषधि, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सुदृढ़ बनाते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देती है।
