सिलेबस GS-2: गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू; वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
संदर्भ: 2024–25 के लिए पीएम केयर्स फंड के नवीनतम लेखापरीक्षित खातों से पता चलता है कि नए अंशदान और व्यय में भारी गिरावट आई है, जबकि इसकी समापन निधि बढ़कर ₹8,452.06 करोड़ के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई।
अन्य संबंधित जानकारी
- अंशदान में भारी गिरावट: 2024–25 में कुल अंशदान घटकर ₹479.96 करोड़ रह गया, जिसमें ₹479.04 करोड़ का घरेलू दान और लगभग ₹92 लाख का विदेशी दान शामिल है। 2020–21 में अंशदान ₹7,678.70 करोड़ के उच्चतम स्तर पर था।
- पाँच वर्षों के न्यूनतम स्तर पर व्यय: व्यय घटकर ₹87.85 लाख रह गया, जबकि 2020–21 में यह ₹3,976.17 करोड़ था। लगभग ₹87.84 लाख का व्यय PM CARES for Children Scheme के लिए किया गया।
- निधि का कोष रिकॉर्ड उच्च स्तर पर: समापन निधि 2023–24 के ₹7,173.03 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹8,452.06 करोड़ हो गई, जो 17.83% की वृद्धि है।
- ब्याज से संचालित संचय: निधि ने ₹475.14 करोड़ का ब्याज अर्जित किया, जिसमें ₹469.37 करोड़ सावधि जमा से प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त, कार्यान्वयन एजेंसियों से ₹324.65 करोड़ की वापसी राशि प्राप्त हुई।
- निधि के लगभग 93% हिस्से, यानी करीब ₹7,846 करोड़, को सावधि जमा में रखा गया था।
पीएम केयर्स फंड के बारे में
- प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (PM CARES Fund) की स्थापना 27 मार्च 2020 को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों, आपदाओं और अन्य संकटों सहित आपातकालीन या संकटपूर्ण परिस्थितियों से निपटने तथा प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए एक समर्पित कोष के रूप में की गई थी।
- यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास के रूप में पंजीकृत है, जिसमें प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष तथा रक्षा, गृह और वित्त मंत्री पदेन न्यासी हैं।
- इस कोष में पूरी तरह से स्वैच्छिक अंशदान शामिल होते हैं और इसे सरकार से कोई बजटीय सहायता प्राप्त नहीं होती। अंशदान पर लागू कर प्रावधानों के अधीन आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत 100% कटौती का लाभ मिलता है तथा कंपनियों/PSUs द्वारा किए गए अंशदान को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) व्यय के रूप में मान्यता मिल सकती है।
- इस कोष को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के प्रावधानों से भी छूट प्राप्त है और एक निर्दिष्ट खाते के माध्यम से विदेशी अंशदान प्राप्त कर सकता है।
कोष से संबंधित चिंताएँ/मुद्दे
- कम उपयोग: कोष की राशि रिकॉर्ड ₹8,452.06 करोड़ के स्तर पर पहुँचने के बावजूद व्यय में भारी गिरावट आई है, जिससे आपात स्थितियों के दौरान धनराशि के समय पर उपयोग को लेकर प्रश्न उठते हैं।
- वापसी राशि में पारदर्शिता: कार्यान्वयन एजेंसियों से प्राप्त ₹324.65 करोड़ की वापसी राशि परियोजना-वार उपयोग और अप्रयुक्त धनराशि के कारणों के अधिक स्पष्ट प्रकटीकरण की आवश्यकता को दर्शाती है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में इन एजेंसियों या इन वापसी राशियों के कारणों की पहचान नहीं की गई है।
- संसदीय निगरानी: प्रधानमंत्री कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को बताया कि पीएम केयर्स से संबंधित प्रश्न और मामले निर्दिष्ट लोकसभा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि यह कोष स्वैच्छिक अंशदान पर आधारित है। इससे कोष पर संसदीय निगरानी की सीमा को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं।
- जवाबदेही का ढाँचा: एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास के रूप में, कोष के लिए लेखापरीक्षण, प्रकटीकरण और संस्थागत जवाबदेही की स्पष्ट एवं सार्वजनिक रूप से सुलभ व्यवस्थाएँ आवश्यक हैं। कोष के अनुसार, इसका लेखापरीक्षण उसके न्यासियों द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र लेखापरीक्षक द्वारा किया जाता है।
आगे की राह
- धनराशि के उपयोग की निगरानी में सुधार: कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी की गई धनराशि के समयबद्ध उपयोग और समायोजन को सुनिश्चित किया जाए तथा वापसी की गई धनराशि के कारणों का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाए।
- पारदर्शी धनराशि उपयोग ढाँचा: आपात स्थितियों के दौरान कोष के उपयोग के लिए स्पष्ट सक्रियण परिस्थितियाँ और प्राथमिकता वाले क्षेत्र निर्धारित किए जाएँ, साथ ही पर्याप्त आरक्षित निधि बनाए रखी जाए।
- प्रकटीकरण और निगरानी को मजबूत करना: प्राप्तियों, निवेश, आवंटन, व्यय और वापसी की गई धनराशि से संबंधित व्यापक वार्षिक जानकारी प्रकाशित की जाए तथा जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्थाएँ निर्धारित की जाएँ।
- आपातकालीन तत्परता बनाए रखना: बदलती आपदा एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया आवश्यकताओं के अनुरूप समय-समय पर कोष की समीक्षा की जाए, ताकि वित्तीय तैयारी का प्रभाव समय पर सहायता के रूप में दिखाई दे।

