संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: एक महत्वपूर्ण संरक्षण पहल के तहत, राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के सम क्षेत्र में बंदी-प्रजनन से तैयार दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इसके साथ ही इस संकटग्रस्त प्रजाति के पुनर्वनीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत हुई।
अन्य संबंधित जानकारी

• दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा जाना भारत की संरक्षण रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है—बंदी-प्रजनन के माध्यम से एक व्यवहार्य आबादी तैयार करने से लेकर पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने तक।
• कुल 11 बंदी-प्रजनित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ने के लिए निर्धारित किया गया है। पहले चरण में 2 को छोड़ा गया है, जबकि शेष 9 को बाद के चरणों में पक्षियों के अनुकूलन, व्यवहार और जीवित रहने की क्षमता के आधार पर छोड़ा जाएगा।
• पहला चरण एक पायलट अभ्यास के रूप में कार्य करेगा। वैज्ञानिक टेलीमेट्री और अन्य विधियों के माध्यम से पक्षियों की निगरानी करेंगे, ताकि उनकी आवाजाही, आवास के उपयोग और अनुकूलन को समझा जा सके।
• इन निष्कर्षों से भविष्य में पक्षियों को जंगल में छोड़ने के लिए प्रोटोकॉल को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

प्रमुख खतरे
• घासभूमि आवास का ह्रास और विखंडन।
• प्राकृतिक घासभूमियों को अन्य भूमि उपयोगों में परिवर्तित करना।
• प्रजनन काल के दौरान व्यवधान।
• ऐतिहासिक रूप से शिकार और अवैध शिकार।
• अवसंरचना तथा मानव-जनित अन्य व्यवधान।
• अत्यंत धीमी प्रजनन दर तथा जीवन-इतिहास से जुड़ी अन्य विशेषताएँ, जो आबादी की पुनर्बहाली को कठिन बनाती हैं।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण के प्रयास
• प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड: इसकी परिकल्पना 2011 में की गई और इसे औपचारिक रूप से 2016 में शुरू किया गया। प्रोजेक्ट GIB एक दीर्घकालिक पुनर्बहाली कार्यक्रम है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इसे राष्ट्रीय CAMPA और इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन का समर्थन प्राप्त है। इसका ध्यान बंदी प्रजनन, आवास प्रबंधन, खतरों को कम करने और पुनःस्थापन पर है।
• संरक्षण प्रजनन एवं पुनर्वनीकरण: जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित संरक्षण-प्रजनन केंद्रों में वर्तमान में 97 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हैं, जिनमें से 11 को जंगल में छोड़ने के लिए निर्धारित किया गया है। इनमें से 2 को पहले ही जंगल में छोड़ा जा चुका है, जो बंदी आबादी के निर्माण से पुनर्वनीकरण की दिशा में संक्रमण को दर्शाता है।
• ‘जंपस्टार्ट’ दृष्टिकोण: ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक के तहत बंदी अवस्था में दिए गए अंडों को प्राकृतिक ऊष्मायन के लिए जंगली GIB के घोंसलों में रखा जाता है।
- इस विधि से राजस्थान में 6 और गुजरात में 2 चूजे प्राप्त हुए हैं तथा इसे 2026 में अंतर-राज्यीय पहल के माध्यम से विस्तारित किया गया।
• आवास पुनर्बहाली एवं वैज्ञानिक प्रबंधन: डेजर्ट नेशनल पार्क में लगभग 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ से घिरे घासभूमि क्षेत्र स्थापित किए गए हैं।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान के दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययनों से प्रजनन आवासों की पहचान करने तथा आवास प्रबंधन और भविष्य के पुनःस्थापन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने में सहायता मिलती है।
• सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप: सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के निर्णय में GIB को बिजली की लाइनों से टकराने से बचाने के लिए विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।
- न्यायालय ने आवास हानि, विखंडन और कम प्रजनन दर जैसे व्यापक खतरों को भी मान्यता दी तथा संरक्षण उपायों के मार्गदर्शन के लिए एक विशेषज्ञ समिति का प्रावधान किया।
