संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-1: जनसंख्या और उससे संबंधित मुद्दे, गरीबी एवं विकास संबंधी मुद्दे, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ तथा उनके समाधान।

सामान्य अध्ययन-2: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियाँ एवं हस्तक्षेप तथा उनके निर्माण एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

संदर्भ: भारत के दो सबसे नए केंद्रशासित प्रदेशों में से एक, लद्दाख, स्वतंत्र भारत में नियमित जनगणना के अंतर्गत जाति की गणना करने वाला पहला क्षेत्र बनेगा। जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण की शुरुआत लद्दाख में अगस्त 2026 से होगी।

अन्य संबंधित जानकारी 

• लद्दाख देश के अन्य हिस्सों से पहले जनसंख्या गणना शुरू करेगा, क्योंकि यह एक हिमाच्छादित क्षेत्र है और सामान्यतः फरवरी 2027 में होने वाली गणना के दौरान सर्दियों तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गणना करना कठिन होगा।

• स्व-गणना की अवधि 17–31 अगस्त 2026 तक होगी। इसके बाद 1–30 सितंबर 2026 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी तथा 1–5 अक्टूबर 2026 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जाएगा।

• इस प्रक्रिया में जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा, जबकि देश के शेष हिस्सों में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। 

• लद्दाख में डिजिटल गणना के साथ-साथ कागजी प्रपत्रों का भी उपयोग किया जाएगा, क्योंकि चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के निकट स्थित रक्षा प्रतिष्ठानों का सुरक्षा कारणों से भू-स्थानिक चिह्नांकन नहीं किया जा सकता।

• लद्दाख उन 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल नहीं था, जहाँ 1–20 जुलाई 2026 के दौरान जनसंख्या गणना प्रश्नावली का पूर्व-परीक्षण किया गया था।

भारत की जनगणना 2027 के बारे में

• जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी, जिसका संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत किया जाएगा।

• जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:

  • मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (अप्रैल–सितंबर 2026): इसमें सभी भवनों और संरचनाओं की सूची तैयार करना, उनका भू-स्थानिक चिह्नांकन करना तथा उन्हें विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करना शामिल है। साथ ही, आवास की स्थिति, सुविधाओं, परिसंपत्तियों और परिवार की विशेषताओं से संबंधित 33 प्रश्नों वाली अनुसूची के माध्यम से विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।
  • जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): इसमें जनसांख्यिकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक मानकों से संबंधित आँकड़े एकत्र किए जाएंगे, जिनमें प्रवासन और प्रजनन संबंधी जानकारी भी शामिल होगी।

• देश के अधिकांश हिस्सों के लिए 1 मार्च 2027 संदर्भ तिथि होगी, जबकि हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 संदर्भ तिथि होगी।

• जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें वास्तविक समय में आँकड़े एकत्र करने के लिए मोबाइल अनुप्रयोग, जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली, मकान सूचीकरण खंड निर्माता वेब मानचित्र अनुप्रयोग, स्व-गणना तथा आँकड़ा-सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। 

• जनगणना-एक-सेवा के माध्यम से मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और उपयोगी आँकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ गाँव और वार्ड स्तर तक डैशबोर्ड तथा दृश्यांकन उपकरण भी उपलब्ध होंगे।

• संभावित पद्धति के अनुसार खुली प्रकृति का जाति कॉलम रखा जाएगा, जिसमें उत्तरदाता अपनी जाति बताएंगे और गणनाकर्मी उसे उत्तरदाता द्वारा घोषित रूप में दर्ज करेंगे।

भारत में जनगणना का ऐतिहासिक परिदृश्य

स्वतंत्रता-पूर्व काल:

  • पहली जनगणना संबंधी कवायद 1824 में इलाहाबाद और 1827–28 में बनारस में जेम्स प्रिंसेप द्वारा की गई थी, जबकि किसी भारतीय शहर की पहली पूर्ण जनगणना 1830 में ढाका में हेनरी वाल्टर द्वारा की गई।
  • पहली राष्ट्रव्यापी जनगणना 1872 में लॉर्ड मेयो के अधीन आयोजित की गई।
  • ब्रिटिश भारत में कश्मीर को छोड़कर पूरे क्षेत्र को शामिल करने वाली पहली आधुनिक समकालिक जनगणना 1881 में डब्ल्यू.सी. प्लोडेन के अधीन आयोजित की गई, जिससे प्रत्येक दस वर्ष में जनगणना कराने की परंपरा स्थापित हुई।
  • 1931 की जनगणना स्वतंत्रता से पहले प्रकाशित अंतिम व्यापक जाति जनगणना थी, जिसमें 4,147 जातियों को दर्ज किया गया था।
  • 1941 की जनगणना में भी जाति संबंधी विवरण एकत्र किए गए थे, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण उनके प्रसंस्करण और प्रकाशन में व्यवधान उत्पन्न हुआ।

स्वतंत्रता के बाद:

• 1951 की जनगणना, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत आयोजित पहली जनगणना थी। स्वतंत्रता के बाद सामान्य आबादी के लिए जाति की गणना बंद कर दी गई, जबकि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की गणना जारी रही।

• राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की शुरुआत 2010 में हुई और इसे 2015 में अद्यतन किया गया।

• सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 नियमित जनगणना से अलग आयोजित की गई थी और यह जनगणना अधिनियम, 1948 के दायरे से बाहर थी। इसमें खुले उत्तर के माध्यम से जाति संबंधी जानकारी एकत्र की गई, जिससे 46 लाख से अधिक जाति नाम प्राप्त हुए।

• 2015 में सरकार ने जाति संबंधी आँकड़ों की जाँच और वर्गीकरण के लिए तत्कालीन नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया था; हालाँकि, जाति संबंधी आँकड़े कभी जारी नहीं किए गए।

• जनगणना 2027 एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, क्योंकि इसमें जाति की गणना को नियमित वैधानिक जनगणना में शामिल किया जा रहा है।

Shares: