संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जनवरी-मार्च 2026 के लिए गैर-निगमित क्षेत्र के उद्यमों पर त्रैमासिक बुलेटिन (QBUSE) जारी किया गया था।

अन्य संबंधित जानकारी

  • QBUSE, गैर-निगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) का त्रैमासिक संस्करण है और विनिर्माण, व्यापार एवं अन्य सेवाओं (निर्माण क्षेत्र को छोड़कर) को शामिल करते हुए भारत के गैर-निगमित गैर-कृषि क्षेत्र के लिए उच्च-आवृत्ति अनुमान प्रदान करता है।
  • इस बुलेटिन का उद्देश्य आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) जैसे सर्वेक्षणों के पूरक के रूप में अनौपचारिक क्षेत्र के लिए समयबद्ध श्रम-बाजार और उद्यम-स्तरीय संकेतकों की उपलब्धता बढ़ाना है।
  • यह सर्वेक्षण गैर-निगमित उद्यमों की आर्थिक और परिचालन विशेषताओं को दर्शाता है, जिसमें उनके प्रतिष्ठान, रोजगार, डिजिटल स्वीकार्यता, स्वामित्व के पैटर्न और औपचारिक पंजीकरण की प्रवृत्तियां शामिल हैं।

QBUSE (जनवरी–मार्च 2026) के मुख्य निष्कर्ष

  • प्रतिष्ठानों में विस्तार
  • गैर-निगमित गैर-कृषि क्षेत्र ने प्रतिष्ठानों की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष 16.69% की वृद्धि दर्ज की, जिसमें अनुमानित प्रतिष्ठानों की संख्या जनवरी-मार्च 2026 के दौरान बढ़कर 9.16 करोड़ हो गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 7.85 करोड़ थी।
  • ग्रामीण क्षेत्र विकास के प्राथमिक चालक के रूप में उभरा, जिसने 20.46% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की, जबकि इसी अवधि के दौरान शहरी क्षेत्र में 12.59% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • रोजगार में वृद्धि
  • जनवरी-मार्च 2026 के दौरान गैर-निगमित गैर-कृषि क्षेत्र में रोजगार 15.17 करोड़ तक पहुंच गया, जिसने पहली बार 15 करोड़ का आंकड़ा पार किया है। इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष 15.51% की रोजगार वृद्धि दर्ज की।
  • सेवा क्षेत्र में विशेष रूप से तीव्र वृद्धि देखी गई, जिसमें पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में प्रतिष्ठानों की संख्या में 24.82% और रोजगार में 31.13% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • कार्यबल की संरचना में बदलाव
  • जनवरी-मार्च 2026 के दौरान गैर-निगमित क्षेत्र के कार्यबल में कार्यकारी स्वामियों का हिस्सा सबसे अधिक रहा, जो कुल श्रमिकों का 60.97% था, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 58.29% था।
  • इसके विपरीत, इसी अवधि के दौरान काम पर रखे गए श्रमिकों का हिस्सा 26.86% से मामूली रूप से घटकर 24.77% रह गया।
  • इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी
  • जनवरी-मार्च 2026 के दौरान गैर-निगमित क्षेत्र के कुल रोजगार में महिला श्रमिकों की हिस्सेदारी लगभग 29% रही, जो एएसयूएसई (ASUSE) 2025 की समान तिमाही के दौरान दर्ज किए गए स्तर से थोड़ी अधिक है।
  • ये निष्कर्ष महिलाओं के रोजगार और समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने में इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हैं।
  • डिजिटल स्वीकार्यता और औपचारिकीकरण
  • गैर-निगमित क्षेत्र के लगभग 81% प्रतिष्ठानों ने उद्यमशीलता के उद्देश्यों के लिए इंटरनेट का उपयोग करने की सूचना दी, जो उद्यमों में बढ़ती डिजिटल स्वीकार्यता को दर्शाता है।
  • लगभग 81% प्रतिष्ठानों ने कैशलेस लेनदेन (नकद रहित लेन-देन) के तरीकों जैसे कि ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई (UPI), पीओएस (POS) उपकरणों और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाया।

गैर-निगमित क्षेत्र का महत्व

  • रोजगार का प्रमुख स्रोत: यह क्षेत्र विशेष रूप से स्व-नियोजित श्रमिकों, अनौपचारिक श्रम, प्रवासियों और कम कुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था का समर्थन: ग्रामीण गैर-निगमित उद्यमों में वृद्धि गैर-कृषि आजीविका में विविधता लाने और कृषि पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में सहायता करती है।
  • उद्यमिता और एमएसएमई (MSME) इकोसिस्टम: यह क्षेत्र छोटे उद्यमियों के लिए एक प्रवेश बिंदु (शुरुआती मंच) के रूप में कार्य करता है और स्थानीय उत्पादन, व्यापार एवं सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • समावेशी और महिलाओं के नेतृत्व में विकास: गैर-निगमित क्षेत्र के अंतर्गत बड़ी संख्या में महिला नेतृत्व वाले उद्यम और घरेलू व्यवसाय संचालित होते हैं, जो लैंगिक-समावेशी आर्थिक भागीदारी का समर्थन करते हैं।

गैर-निगमित क्षेत्र के समक्ष चुनौतियाँ

  • अत्यधिक अनौपचारिक: अधिकांश उद्यम औपचारिक नियामक और सामाजिक-सुरक्षा ढाँचे से बाहर संचालित होते हैं, जिससे श्रम संरक्षण और संस्थागत सहायता सीमित हो जाती है।
  • ऋण तक सीमित पहुँच: छोटे उद्यमों को अक्सर किफायती संस्थागत वित्त और औपचारिक ऋण चैनलों तक पहुँच प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • निम्न उत्पादकता और प्रौद्योगिकी स्वीकार्यता: कई उद्यम लगातार निम्न पूँजी गहनता, सीमित प्रौद्योगिकी उपयोग और निम्न उत्पादकता स्तरों के साथ काम कर रहे हैं।
  • आय और सामाजिक सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: इस क्षेत्र के श्रमिकों को अक्सर कम मजदूरी, आय की असुरक्षा, अनुबंधों के अभाव और सामाजिक सुरक्षा लाभों की अनुपस्थिति का सामना करना पड़ता है।

क्षेत्र का समर्थन करने वाली सरकारी पहल

  • पीएम स्वनिधि योजना: रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे अनौपचारिक व्यवसायों को बिना किसी संपार्श्विक के कार्यशील पूँजी ऋण प्रदान करती है।
  • मुद्रा (Mudra) योजना : सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए संस्थागत ऋण सहायता को सुगम बनाती है।
  • डिजिटल इंडिया और यूपीआई (UPI) विस्तार: छोटे उद्यमों के लिए डिजिटल भुगतान, औपचारिकीकरण और ऑनलाइन व्यवसाय एकीकरण को बढ़ावा देता है।
  • ई-श्रम पोर्टल: सामाजिक-सुरक्षा लाभों के वितरण में सुधार के लिए गैर-निगमित श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करता है।

Source:
Pib
Economictimes
Business

Shares: