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सामान्य अध्ययन-3: मुख्य फसलें देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न -सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएं; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।

संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ़ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है।

अन्य संबंधित जानकारी

• खरीफ़ फसलों के MSP में यह वृद्धि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए की गई है। यह केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

• MSP में सबसे अधिक पूर्ण वृद्धि की घोषणा सूरजमुखी के बीज (₹622 प्रति क्विंटल) के लिए की गई, इसके बाद कपास (₹557), रामतिल/नाइजरसीड (₹515) और तिल/सेसमम (₹500) का स्थान है।

• उत्पादन लागत पर अपेक्षित लाभ का मार्जिन सबसे अधिक मूँग (61%) के लिए है, इसके बाद बाजरा और मक्का (56%) तथा तुअर/अरहर (54%) का स्थान है। शेष फसलों के लिए यह मार्जिन 50% अनुमानित है।

• सरकार ने स्पष्ट किया है कि दालों, तिलहनों और पोषक अनाजों (श्री अन्न) के लिए उच्च MSP का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और पारंपरिक अनाजों (जैसे चावल-गेहूँ) पर निर्भरता को कम करना है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 

• MSP भारत सरकार द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का बाजार हस्तक्षेप है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकों (किसानों) को कृषि कीमतों में एकाएक और भारी गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना है।

• MSP की घोषणा आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा बुवाई के मौसम की शुरुआत में की जाती है। यह घोषणा कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कुछ चुनिंदा फसलों के लिए की जाती है।

• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • किसानों को लाभकारी मूल्य प्रदान करना। 
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए खरीद के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • आवश्यक फसलों के उत्पादन को बढ़ावा करना।

• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए सिफारिशें तैयार करते समय, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) विभिन्न कारकों पर विचार करता है जैसे-

  • उत्पादन लागत (A2+FL पद्धति)
  • मांग और आपूर्ति की स्थिति
  • अंतर-फसल मूल्य समता 
  • सामान्य मूल्य स्तर पर प्रभाव
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कीमतें, आदि।

• वर्तमान में, सरकार 22 अनिवार्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) की घोषणा करती है।

  • इसके अतिरिक्त, तोरिया और बिना छिलके वाले नारियल के MSP क्रमशः सरसों/तोरिया और खोपरा के निर्धारित MSP के आधार पर तय किए जाते हैं।

कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP)

• CACP भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है।

• यह जनवरी 1965 में ‘कृषि मूल्य आयोग’ के रूप में अस्तित्व में आया था। बाद में 1985 में इसका नाम बदलकर CACP कर दिया गया।

• वर्तमान में, आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य सचिव, एक सदस्य (सरकारी) और दो सदस्य (गैर-सरकारी) शामिल हैं।

  • गैर-सरकारी सदस्य किसान समुदाय के प्रतिनिधि होते हैं और आमतौर पर किसान समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़े होते हैं।

गन्ने के लिए मूल्य निर्धारण नीति के बारे में 

• गन्ने का मूल्य निर्धारण आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 द्वारा शासित होता है।

• 2009-10 से पहले, सरकार गन्ने के लिए सांविधिक न्यूनतम मूल्य (Statutory Minimum Price – SMP) निर्धारित करती थी।

• वर्ष 2009 में, गन्ना (नियंत्रण) आदेश में संशोधन के बाद SMP को उचित और लाभकारी मूल्य प्रणाली से बदल दिया गया।

• FRP में एक वैधानिक कारक के रूप में “जोखिम और लाभ के कारण उत्पादकों के लिए उचित मार्जिन” शामिल है।

• FRP निर्धारित करते समय विचार किए जाने वाले कारक: कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करता है:

  • गन्ने की उत्पादन लागत
  • वैकल्पिक फसलों से प्राप्त होने वाला लाभ
  • उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर चीनी की उपलब्धता
  • चीनी की कीमतें
  • गन्ने से चीनी की रिकवरी दर 
  • उप-उत्पादों (जैसे शीरा, खोई और प्रेस मड) का मूल्य
  • किसानों के लिए उचित लाभ मार्जिन

• राज्य,  राज्य परामर्शित मूल्य (State Advisory Price – SAP) की घोषणा भी कर सकते हैं, जो आमतौर पर केंद्र द्वारा निर्धारित FRP से अधिक होता है।

Sources:
PIB
The Hindu
New Indian Express
Vikaspedia
PIB

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