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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसधानों को उतने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय| अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण का प्रभाव, औद्योगिकी नीति में परिवर्तन और औद्योगिकी विकास पर उनके प्रभाव|

संदर्भ: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने संशोधित 2022-23 आधार वर्ष श्रृंखला के तहत औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के प्रथम अखिल भारतीय अनुमान जारी किए, जिसके अनुसार अप्रैल 2026 में औद्योगिक उत्पादन में 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु

  • औद्योगिक वृद्धि: अप्रैल 2026 में भारत का औद्योगिक उत्पादन वार्षिक आधार पर 4.9% बढ़ा है।
    • अप्रैल 2025 के 113.4 की तुलना में अप्रैल 2026 का IIP त्वरित अनुमान 118.9 रहा।
  • वृद्धि का मुख्य चालक रहा ‘विनिर्माण क्षेत्र’: विनिर्माण क्षेत्र, जिसका सूचकांक में सर्वाधिक भारांश (76.06%) है, ने 6.2% की वृद्धि दर्ज की और यह औद्योगिक विस्तार का मुख्य चालक बनकर उभरा।
  • क्षेत्रवार प्रदर्शन: विद्युत और गैस आपूर्ति में 4.9% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन  में 6.6% का विस्तार हुआ।
    • इस माह के दौरान खनन और उत्खनन क्षेत्र में 5.1% का संकुचन आया।
  • विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन: अप्रैल 2026 में 23 विनिर्माण उद्योग समूहों में से सत्रह ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
    • इसमें सबसे मजबूत योगदानकर्ता विद्युत उपकरण (19.2%), अन्यत्र वर्गीकृत नहीं की गई मशीनरी और उपकरण  (12.9%), तथा मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर (12.7%) रहे।
  • अन्य तीव्र गति से बढ़ने वाले विनिर्माण उद्योग: अन्य परिवहन उपकरणों में 18.9%, वस्त्रों में 15.6%, कागज और कागज उत्पादों में 13.8%, निर्मित धातु उत्पादों में 11.7% तथा मूल धातुओं में 5.8% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • उपयोग-आधारित वर्गीकरण: पूंजीगत वस्तुओं में सर्वाधिक 16.0% की वृद्धि दर्ज की गई और मध्यवर्ती वस्तुओं में 7.7% और अवसंरचना/निर्माण वस्तुओं में 7.1% की वृद्धि दर्ज की गई।
    • उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं में क्रमशः 4.3% और 2.8% की वृद्धि हुई।
  • औद्योगिक विकास में प्रमुख योगदानकर्ता: अप्रैल 2026 के दौरान समग्र औद्योगिक विकास में मध्यवर्ती वस्तुओं, पूंजीगत वस्तुओं और अवसंरचना/निर्माण वस्तुओं का योगदान सर्वाधिक रहा।
  • संशोधित ऐतिहासिक विकास दर: संशोधित IIP श्रृंखला के अनुसार, औद्योगिक विकास दर वर्ष 2023-24 में 6.7%, 2024-25 में 6.4% और 2025-26 में 4.3% रही, जो अधिकांश वर्षों में पिछली श्रृंखला के संगत अनुमानों से अधिक है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बारे में

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक आधार वर्ष के संदर्भ में औद्योगिक उत्पादन की मात्रा में होने वाले परिवर्तनों को मापता है।
  • यह सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा मासिक रूप से संकलित और जारी किया जाता है।
  • यह औद्योगिक क्षेत्र के प्रदर्शन और समग्र आर्थिक गतिविधि का एक प्रमुख संकेतक है।
  • आधार वर्ष में संशोधन (2011-12 से 2022-23):
    • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने ‘अखिल भारतीय IIP के आधार वर्ष संशोधन के लिए तकनीकी सलाहकार समिति’ (TAC-IIP) की सिफारिशों के तहत IIP के आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित करके 2022-23 कर दिया है।
    • इस संशोधन का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों, तकनीकी प्रगति तथा नए उद्योगों एवं उत्पादों के उद्भव को शामिल करना है।
    • वित्तीय वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष के रूप में इसलिए चुना गया है क्योंकि यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) जैसे अन्य समष्टि आर्थिक संकेतकों के आधार वर्ष के अनुरूप है।
    • वर्ष 1937 के आधार वर्ष वाली पहली श्रृंखला के बाद से, IIP के आधार वर्ष में किया गया यह 10वां संशोधन है।
  • विस्तारित क्षेत्रीय कवरेज: नई श्रृंखला में खनन और उत्खनन, विनिर्माण तथा विद्युत को बरकरार रखा गया है, जबकि गैस आपूर्ति और जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों को इसमें शामिल किया गया है।
    • खनन क्षेत्र का विस्तार: खनन क्षेत्र में अब प्रमुख खनिजों के अतिरिक्त गौण खनिजों और दुर्लभ मृदा खनिजों को भी शामिल किया गया है।
    • पृथक सूचकांक: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय विद्युत उत्पादन, ईंधन खनिजों, धात्विक खनिजों, गैर-धात्विक खनिजों, गैस आपूर्ति, तथा जल आपूर्ति एवं अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों के लिए अलग-अलग सूचकांक जारी किए जाते हैं।
  • विस्तारित उत्पाद बास्केट: IIP की नई श्रृंखला में 463 मद समूहों के तहत 1,042 उत्पादों को शामिल किया गया है, जबकि पिछली श्रृंखला में 407 मद समूहों के तहत 839 उत्पाद शामिल थे।
    • इसमें कुल 120 नए मद समूह जोड़े गए हैं, जिनमें सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, हवाई जहाज और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, गैर-बुने हुए कपड़ा उत्पाद, स्टेंट और टीके शामिल हैं।
    • इसके अतिरिक्त, 64 अप्रचलित मद समूहों को हटा दिया गया है, जैसे मिट्टी का तेल, फ्लोरोसेंट ट्यूब, सीएफएल (CFLs), छपाई मशीनरी और सिलाई मशीनें।
  • वर्तमान प्रवृत्तियों का प्रतिबिंब: यह संशोधित बास्केट वर्तमान औद्योगिक उत्पादन के पैटर्न को अधिक सटीक और बेहतर तरीके से दर्शाता है।
  • संशोधित भारांश संरचना: क्षेत्रवार भारांश वर्ष 2022-23 के लिए सकल मूल्य वर्धन (GVA) में क्षेत्रों की हिस्सेदारी पर आधारित हैं।
    • विनिर्माण क्षेत्र का भारांश सर्वाधिक 76.06% है।
    • विनिर्माण का भारांश उद्योग वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) 2022-23 के आंकड़ों पर आधारित है, जबकि विद्युत और खनन का भारांश राजस्व हिस्सेदारी तथा खनिज-वार GVA योगदान पर आधारित है।
  • पद्धतिगत सुधार: संशोधित श्रृंखला में राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) 2025 को अपनाया गया है और मूल्य-आधारित मद समूहों की संख्या 109 से बढ़ाकर 234 कर दी गई है।
    • इसमें गैर-संचालित (बंद) कारखानों को बदलने और अनुपलब्ध आंकड़ों को अधिक प्रभावी ढंग से संभालने के प्रावधान शामिल हैं।
    • यह सूचकांक निरंतर लास्पेयर निश्चित आधार पद्धति का उपयोग करके संकलित किया जा रहा है।
  • नए डेटा स्रोत: चार नई एजेंसियों को जोड़ा गया है:
    • IREL (इंडिया) लिमिटेड
    • राज्यों के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय
    • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय
    • पेयजल और स्वच्छता विभाग। ये एजेंसियां संशोधित IIP के विस्तारित कवरेज में सहायता करती हैं।
  • उपयोग-आधारित वर्गीकरण: छह उपयोग-आधारित श्रेणियां अपरिवर्तित रही हैं: प्राथमिक वस्तुएं, पूंजीगत वस्तुएं, मध्यवर्ती वस्तुएं, अवसंरचना/निर्माण वस्तुएं, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुएं।
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