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सामान्य अध्ययन-3:विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास तथा अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: संयुक्त राज्य अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उसने “कक्षा (ऑर्बिट) में अंतरिक्ष नियंत्रण हथियार” तैनात किए हैं, जिससे अंतरिक्ष के बढ़ते शस्त्रीकरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • अमेरिका ने इन हथियारों के प्रकार, संख्या या परिचालन संबंधी विवरण का प्रकटीकरण नहीं किया है, लेकिन इन्हें शत्रुतापूर्ण कार्रवाई से संयुक्त सैन्य बल की रक्षा करने के उद्देश्य से विकसित क्षमताओं के रूप में वर्णित किया है।
  • यह प्रकटीकरण अंतरिक्ष-रोधी क्षमताओं के बढ़ते विकास के बीच हुआ है। इससे यह चिंता उत्पन्न हुई है कि अंतरिक्ष शक्तियों द्वारा एक-दूसरे की कार्रवाइयों के जवाब में अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाना सुरक्षा दुविधा और बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे सकता है।
  • उपग्रहों द्वारा महत्वपूर्ण असैन्य और सैन्य कार्यों को समर्थन दिए जाने के साथ, यह घटनाक्रम अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण के विभिन्न रूपों, मौजूदा कानूनी ढाँचे की कमियों तथा तनाव को बढ़ने से रोकने के उपायों की जाँच करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

अंतरिक्ष का सैन्यीकरण बनाम शस्त्रीकरण

  • अंतरिक्ष का सैन्यीकरण: पृथ्वी पर सैन्य गतिविधियों को समर्थन देने के लिए अंतरिक्ष-आधारित परिसंपत्तियों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग, जैसे संचार, नौवहन, निगरानी, टोह एवं मिसाइल चेतावनी।
  • अंतरिक्ष का शस्त्रीकरण: ऐसी क्षमताओं का विकास या तैनाती, जिनका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी की अंतरिक्ष या अंतरिक्ष-सक्षम क्षमताओं को नष्ट, क्षतिग्रस्त, बाधित, कमजोर या निष्क्रिय करना हो।
  • अतः, अंतरिक्ष का सैन्यीकरण आवश्यक रूप से यह नहीं दर्शाता कि अंतरिक्ष में हथियार तैनात किए गए हैं; जबकि शस्त्रीकरण, आक्रामक या रक्षात्मक सैन्य उद्देश्यों के लिए अंतरिक्ष अथवा प्रति-अंतरिक्ष क्षमताओं के उपयोग की दिशा में एक अगला चरण है।

अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण को समझना एवं इसके रूप

  • अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण में गतिज (Kinetic) और गैर-गतिज (Non-Kinetic) दोनों साधन शामिल हैं। गतिज प्रणालियाँ किसी अंतरिक्ष वस्तु को भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त या नष्ट करती हैं अथवा उसकी कक्षा में परिवर्तन करती हैं, जबकि गैर-गतिज विधियाँ आवश्यक रूप से भौतिक विनाश किए बिना उसके कार्यों को बाधित करती हैं।
  • उपग्रह-रोधी (Anti-Satellite—ASAT) हथियार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई सबसे प्रमुख गतिज प्रति-अंतरिक्ष क्षमता हैं। अमेरिका, रूस, चीन और भारत ने प्रत्यक्ष-उत्थान (Direct-Ascent) उपग्रह-रोधी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।
  • भारत ने 2019 में मिशन शक्ति के माध्यम से अपनी स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन किया।
  • गैर-गतिज क्षमताओं में जैमिंग और साइबर ऑपरेशन शामिल हैं, जो किसी उपग्रह को भौतिक रूप से नष्ट किए बिना संचार, संकेतों या सहायक जमीनी अवसंरचना में हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष बल के अनुसार, अंतरिक्ष नियंत्रण में गतिज और गैर-गतिज दोनों साधन शामिल होते हैं।
  • यह चुनौती द्वि-उपयोगी अंतरिक्ष प्रणालियों के कारण और जटिल हो जाती है, क्योंकि एक ही उपग्रह या सहायक अवसंरचना का उपयोग नागरिक तथा सैन्य दोनों कार्यों के लिए किया जा सकता है।
  • अतः, अंतरिक्ष का शस्त्रीकरण केवल उपग्रहों को भौतिक रूप से नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरिक्ष-सक्षम क्षमताओं को निष्क्रिय करने, बाधित करने या कमजोर करने की व्यापक क्षमता भी शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढाँचा एवं नियामक अंतराल

  • बाह्य अंतरिक्ष संधि, 1967 (Outer Space Treaty—OST): बाह्य अंतरिक्ष संधि (OST) पृथ्वी की कक्षा में परमाणु हथियारों या अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों (WMDs) की तैनाती पर रोक लगाती है तथा चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर सैन्य अड्डों की स्थापना, हथियारों के परीक्षण और सैन्य युद्धाभ्यास को प्रतिबंधित करती है। हालाँकि, यह बाह्य अंतरिक्ष में पारंपरिक हथियारों पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध नहीं लगाती है।
  • पृथ्वी-आधारित प्रति-अंतरिक्ष हथियार: यह संधि प्रत्यक्ष-उत्थान उपग्रह-रोधी (Direct-Ascent ASAT) हथियारों जैसी पृथ्वी-आधारित पारंपरिक प्रणालियों पर भी व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाती। इससे अंतरिक्ष में तैनात हथियारों और पृथ्वी से अंतरिक्ष परिसंपत्तियों के विरुद्ध उपयोग किए जाने वाले हथियारों के बीच नियामक अंतर बना रहता है।
  • बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ की रोकथाम (PAROS): PAROS का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय नियमों और समझौतों के माध्यम से बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकना है। इस मुद्दे पर निरस्त्रीकरण सम्मेलन के अंतर्गत विचार किया जाता है और भारत कानूनी रूप से बाध्यकारी साधन के लिए वार्ता का समर्थन करता है।
  • PPWT का मसौदा: रूस और चीन ने 2008 में बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती तथा बाह्य अंतरिक्ष वस्तुओं के विरुद्ध बल के प्रयोग या बल प्रयोग की धमकी की रोकथाम संबंधी संधि (PPWT) का मसौदा प्रस्तावित किया था। हालाँकि, यह प्रस्ताव अभी तक किसी बाध्यकारी संधि में परिणत नहीं हुआ है तथा इसके दायरे और सत्यापन संबंधी प्रावधानों को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं।
  • आर्टेमिस समझौते: आर्टेमिस समझौते शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सतत नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए स्वैच्छिक सिद्धांत निर्धारित करते हैं तथा बाह्य अंतरिक्ष संधि को सुदृढ़ करते हैं। हालाँकि, ये अंतरिक्ष हथियारों के लिए व्यापक हथियार-नियंत्रण ढाँचा नहीं हैं। भारत 2023 में इसका हस्ताक्षरकर्ता बना।
  • नियामक अंतराल: इस प्रकार, जहाँ बाह्य अंतरिक्ष संधि बाह्य अंतरिक्ष के लिए आधारभूत कानूनी ढाँचा प्रदान करती है, वहीं पारंपरिक अंतरिक्ष हथियार, पृथ्वी-आधारित उपग्रह-रोधी प्रणालियाँ तथा कई गैर-गतिज प्रति-अंतरिक्ष क्षमताएँ अभी भी अपर्याप्त रूप से विनियमित हैं। यह अधिक व्यापक अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

वैश्विक सुरक्षा एवं भारत पर प्रभाव

  • युद्ध संचालन के क्षेत्र के रूप में अंतरिक्ष का उभरना: बढ़ती प्रति-अंतरिक्ष क्षमताएँ उपग्रहों और उनसे संबंधित जमीनी अवसंरचना को संभावित लक्ष्य बना सकती हैं, जिससे सैन्य प्रतिस्पर्धा का विस्तार बाह्य अंतरिक्ष तक हो सकता है।
  • व्यापक व्यवधान एवं अंतरिक्ष मलबे का जोखिम: अंतरिक्ष परिसंपत्तियों से संबंधित हमले या हस्तक्षेप महत्वपूर्ण सेवाओं को बाधित कर सकते हैं। साथ ही, विनाशकारी उपग्रह-रोधी (ASAT) कार्रवाइयों के मामले में उत्पन्न मलबा अन्य अंतरिक्ष यानों तथा दीर्घकालिक अंतरिक्ष संचालन के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
  • भारत की रणनीतिक भेद्यता: भारत संचार, नौवहन, पृथ्वी अवलोकन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता रखता है। इसलिए अपनी अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा और उनकी प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सुरक्षा आवश्यकता है।
  • भारत की अंतरिक्ष-सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाने की आवश्यकता: भारत ने मिशन शक्ति (2019) के माध्यम से गतिज उपग्रह-रोधी क्षमता का प्रदर्शन किया है और आईएस4ओएम (IS4OM), नेत्रा (NETRA) तथा मलबा-मुक्त अंतरिक्ष मिशन जैसी पहलों के माध्यम से अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (SSA), अंतरिक्ष वस्तुओं की ट्रैकिंग और अंतरिक्ष स्थिरता को सुदृढ़ कर रहा है।

आगे की राह

  • कानूनी रूप से बाध्यकारी PAROS ढाँचे को आगे बढ़ाना: बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए सार्वभौमिक, सत्यापन योग्य और कानूनी रूप से बाध्यकारी साधन विकसित करने हेतु निरस्त्रीकरण सम्मेलन में वार्ताओं को आगे बढ़ाना।
  • नियामक अंतराल को समाप्त करना: भविष्य के नियमों में अंतरिक्ष में तैनात हथियारों तथा पृथ्वी-आधारित गतिज और गैर-गतिज क्षमताओं, दोनों को शामिल किया जाना चाहिए, जो अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को बाधित करने में सक्षम हैं।
  • जिम्मेदार व्यवहार एवं विश्वास-निर्माण को सुदृढ़ करना: गलत आकलन और अनपेक्षित तनाव-वृद्धि को कम करने के लिए पारदर्शिता, सूचना-साझाकरण, पूर्व सूचना और संचार तंत्र को बढ़ावा देना।
  • लचीलापन बढ़ाना और मलबे को न्यूनतम करना: अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता, साइबर लचीलापन, वैकल्पिक/अतिरिक्त प्रणालियों और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अवसंरचना की सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा विनाशकारी उपग्रह-रोधी परीक्षण जैसी मलबा उत्पन्न करने वाली गतिविधियों के विरुद्ध मजबूत अंतर्राष्ट्रीय मानदंड विकसित करना।
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