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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संदर्भ: मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCCD) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (CoP17) का आयोजन 17 से 28 अगस्त 2026 तक उलानबटार, मंगोलिया में किया गया। इसका विषय “भूमि का पुनर्स्थापन। आशा का पुनर्स्थापन” (Restoring Land. Restoring Hope) था।

UNCCD CoP17 की प्रमुख विशेषताएँ

  • चरागाहों और पशुपालकों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष: CoP17 का आयोजन संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित “चरागाहों और पशुपालकों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (IYRP) 2026” के दौरान हुआ। मंगोलिया ने इस पहल को बढ़ावा दिया। इससे चरागाहों के पुनर्स्थापन, संरक्षण और सतत् प्रबंधन को प्रोत्साहित करने तथा पशुपालक समुदायों की आवश्यकताओं को उजागर करने का अवसर मिला।
  • वैश्विक भूमि संकट: सम्मेलन में बताया गया कि विश्व के 40% तक भू-भाग का क्षरण हो चुका है, जिससे जल की उपलब्धता और आर्थिक स्थिरता पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
  • मंगोलिया की पहल: मंगोलिया की लगभग 77% भूमि क्षरित हो चुकी है। इस संदर्भ में मंगोलिया ने “बिलियन ट्रीज़” अभियान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया, जिसे 2021 में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य 2030 तक 1 अरब पेड़ लगाना है।
  • सूखा वित्त: CoP17 में 23 देशों और पाँच महाद्वीपों में भूमि पुनर्स्थापन एवं सूखा-लचीलापन बढ़ाने के लिए 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण पैकेज की घोषणा की गई। इसमें 644.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नया वित्त शामिल है।
  • प्रकृति-आधारित समाधान (NbS): CoP17 में पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित अनुकूलन (EbA) तथा राष्ट्रीय नियोजन और अवसंरचना विकास में प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए वित्तपोषण को बढ़ावा दिया गया।
  • सूखा लचीलापन सूचकांक (DRI): यह विश्व का पहला व्यापक तकनीकी उपकरण है, जो एआई-आधारित विश्लेषण और संवेदनशीलता मानचित्रण का उपयोग करके सूखे से निपटने की तैयारियों का आकलन करता है और डेटा-आधारित निवेश को समर्थन देता है।
  • सूखा लचीलापन निवेश सुविधा (DRIF): यह सूखा लचीलापन बढ़ाने के लिए समर्पित पहली वैश्विक उत्प्रेरक वित्तपोषण व्यवस्था है।
    • DRIF सार्वजनिक पूंजी का उपयोग करके निवेश जोखिम को कम करेगी और संस्थागत तथा निजी वित्त के कहीं बड़े प्रवाह को आकर्षित करेगी। इसका उपयोग जल सुरक्षा, सतत् कृषि, प्रकृति-आधारित समाधान तथा भूमि पुनर्स्थापन से संबंधित परियोजनाओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
  • वैश्विक सूखा संधि (Global Drought Treaty): बढ़ते सूखे और प्रति वर्ष 278 बिलियन अमेरिकी डॉलर के लचीलेपन-वित्तपोषण अंतराल के बावजूद, सरकारें वैश्विक सूखा फ्रेमवर्क पर फिर से सहमति बनाने में विफल रहीं।
    • वार्ताकारों ने सक्रिय/पूर्व-सक्रिय सूखा प्रबंधन पर चर्चा जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। यह चर्चा मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित होने वाले CoP18 में होगी, जो CoP16 और CoP17 में हुई प्रगति पर आधारित होगी।

UNCCD CoP17 में भारत का रुख

  • समुदाय-आधारित चरागाह भूमि पुनर्स्थापन: भारत ने चरागाह भूमि की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। चरागाह भूमियाँ पशुपालक समुदायों की आजीविका को बनाए रखने, जैव-विविधता के संरक्षण तथा जल और कार्बन चक्रों के विनियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • सूखा प्रतिक्रिया से सूखा लचीलेपन की ओर बदलाव: भारत ने सूखे के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में मूलभूत बदलाव का आह्वान किया। प्रतिक्रियात्मक राहत के बजाय सक्रिय, प्रौद्योगिकी-सक्षम सूखा लचीलेपन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
  • भारत के घासभूमियों और अन्य खुले प्राकृतिक पारितंत्रों पर पहली मार्गदर्शिका: भारत ने UNCCD CoP17 में “भारत की घासभूमियों और अन्य खुले प्राकृतिक पारितंत्रों” की पहली मार्गदर्शिका” जारी की।

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