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संदर्भ: दूरसंचार विभाग ने हाल ही में वैश्विक दूरसंचार इकोसिस्टम में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए ‘प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन’ (TDIP) योजना हेतु संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन (TDIP) योजना के विषय में
- प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन (TDIP) योजना दूरसंचार विभाग की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के दूरसंचार नवाचार इकोसिस्टम और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
- यह भारतीय हितधारकों को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार मानकीकरण प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने हेतु सक्षम बनाने पर ध्यान केंद्रित करती है, जिससे केवल वैश्विक तकनीकी मानकों को अपनाने के बजाय उन्हें प्रभावित किया जा सके।
- यह योजना ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, बौद्धिक संपदा (IP) और मानक-आधारित समाधानों के विकास का समर्थन करती है।
- इसका उद्देश्य उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को सुगम बनाकर अनुसंधान, नवाचार और वाणिज्यिक परिनियोजन के बीच के अंतराल को पाटना है।
- यह योजना भारतीय दूरसंचार उत्पादों और समाधानों के लिए निवेश तथा वैश्विक बाजार तक पहुंच को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में उनके एकीकरण को बढ़ावा मिल सके।
संशोधित दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ
- विस्तृत कार्यक्षेत्र और हितधारकों की भागीदारी: संशोधित योजना पात्रता के दायरे को व्यापक बनाती है, जिसमें स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs), शिक्षा जगत, अनुसंधान एवं विकास (R&D) संस्थान, दूरसंचार सेवा प्रदाता और उद्योग जगत के प्रतिभागी शामिल हैं, जो एक सहयोगात्मक नवाचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देते हैं।
- वित्तीय सहायता और परिव्यय: वर्ष 2026-31 के लिए इस योजना का कुल परिव्यय ₹203 करोड़ है, जो वैश्विक भागीदारी, तकनीकी योगदान, अंतर्राष्ट्रीय निकायों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं और भारत में वैश्विक दूरसंचार कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- नवाचार और व्यावसायीकरण हेतु समर्थन: यह योजना पायलट परियोजनाओं, संकल्पना प्रमाण पहल और तकनीकी प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करती है, जिससे अनुसंधान और बाजार के लिए तैयार दूरसंचार समाधानों के बीच के अंतराल को पाटने में सहायता मिलती है।
- वैश्विक मानकीकरण पर ध्यान: इस योजना का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), 3GPP और oneM2M जैसे वैश्विक मानक-निर्धारण निकायों में भारत की उपस्थिति बढ़ाना है, जिससे भारत भविष्य के दूरसंचार मानकों को प्रभावित करने में सक्षम हो सके।
- भविष्य के दूरसंचार विजन के साथ संरेखण: संशोधित रूपरेखा 5G एडवांस्ड और 6G पारिस्थितिकी तंत्र सहित अगली पीढ़ी के दूरसंचार में तकनीकी नेतृत्वकर्ता बनने के भारत के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- संस्थागत कार्यान्वयन ढांचा: प्रभावी समन्वय और निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए इस योजना को TSDSI, दूरसंचार उत्कृष्टता केंद्र (TCoE) और TCIL जैसी प्रमुख एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।
- नीतिगत अभिसरण: यह योजना ‘दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष’ (TTDF) और ‘भारत 6G मिशन’ जैसी मौजूदा पहलों की पूरक है, जो दूरसंचार नवाचार के लिए एक सुसंगत नीतिगत इकोसिस्टम का निर्माण करती है।
महत्व और अपेक्षित परिणाम
- प्रतिभागी से मानक-निर्धारक की ओर: इस योजना का उद्देश्य भारत को केवल प्रौद्योगिकी अपनाने वाले देश से बदलकर एक वैश्विक मानक-निर्धारक के रूप में स्थापित करना है, जिससे दूरसंचार शासन में रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाया जा सके।
- स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा: घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) और वैश्विक मंचों पर भागीदारी का समर्थन करके, यह योजना बौद्धिक संपदा के सृजन और नवाचार-प्रेरित विकास को प्रोत्साहित करती है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: वैश्विक मानकों में भारतीय प्रौद्योगिकियों का एकीकरण होने से दूरसंचार उत्पादों के निर्यात की क्षमता और बाजार तक पहुंच में सुधार होगा।
- दूरसंचार इकोससिस्टम का सुदृढ़ीकरण: यह समावेशी दृष्टिकोण स्टार्टअप, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे समग्र दूरसंचार नवाचार इकोसिस्टम सशक्त होता है।
