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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ और मंच – उनकी संरचना, अधिदेश।
संदर्भ: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक 28 अप्रैल, 2026 को बिश्केक, किर्गिस्तान में आयोजित की गई, जिसमें भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इस बैठक में भारत सहित SCO के सभी सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों ने भाग लिया। यह मुख्य रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों, रक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी समन्वय पर केंद्रित थी।
- यह बैठक बढ़ते वैश्विक विखंडन, निरंतर जारी संघर्षों और आतंकवाद, उग्रवाद एवं क्षेत्रीय अस्थिरता पर उभरती चिंताओं के बीच आयोजित की गई।
- भारत ने इस मंच का उपयोग क्षेत्रीय शांति, आतंकवाद विरोधी सहयोग और SCO सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग के महत्व को रेखांकित करने के लिए किया।
- बैठक के इतर, भारत ने चीन और रूस जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें सीमा स्थिरता, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई।
शंघाई सहयोग संगठन के बारे में
- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को चीन के शंघाई में इसके छह संस्थापक सदस्यों – चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा की गई थी।
- यह “शंघाई फाइव” से विकसित हुआ है, जो 1996 में विश्वास-निर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया एक समूह था।
- वर्तमान सदस्य: SCO में वर्तमान में 10 पूर्ण सदस्य हैं: चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
- अपने पहले विस्तार के रूप में, वर्ष 2017 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को SCO के पूर्ण सदस्यों के रूप में शामिल किया गया था।
- ईरान वर्ष 2023 में SCO में शामिल हुआ, जिससे सदस्य देशों की कुल संख्या नौ हो गई। वर्ष 2024 में, बेलारूस SCO का 10वां सदस्य देश बना।
- निर्णय लेने वाले निकाय: संगठन का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of States – CHS) है, जो महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए प्रत्येक वर्ष बैठक करती है।
- शासनाध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of Government – CHG) भी वार्षिक रूप से सहयोग रणनीतियों की योजना बनाने और संगठन के वार्षिक बजट को मंजूरी देने के लिए बैठक करती है।
- स्थायी निकाय: SCO के दो स्थायी निकाय हैं:
- सचिवालय: बीजिंग में स्थित, जो दैनिक कार्यों का संचालन करता है।
- ताशकंद में स्थित क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की कार्यकारी समिति क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोध पर ध्यान केंद्रित करती है।
- भाषाएँ: SCO की आधिकारिक भाषाएँ रूसी और चीनी हैं।
- पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी: वर्ष 2022-2023 की अवधि के दौरान वाराणसी शहर को पहली बार ‘SCO पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी’ के रूप में नामित किया गया था।
भारत के लिए SCO का महत्व
- भारत-पाकिस्तान/चीन संवाद के लिए तटस्थ मंच: SCO जैसे बहुपक्षीय संगठन ऐसे तटस्थ स्थान निर्मित करते हैं जहाँ भारत और पाकिस्तान उन सामान्य तनावों के बिना बातचीत कर सकते हैं जो उनकी चर्चाओं में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- क्षेत्रीय सहयोग: चूंकि सार्क (SAARC) वर्तमान में निष्क्रिय बना हुआ है, इसलिए SCO जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर चुनौतियों पर सहयोग करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर सकता है।
- रणनीतिक हित: SCO की सदस्यता भारत को रणनीतिक रूप से चीन के “वन बेल्ट, वन रोड” (OBOR) और “चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा” (CPEC) जैसे मुद्दों को संबोधित करने की अनुमति देती है।
- इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) रूस, ईरान और मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी को सुगम बनाकर भारत के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।
- सुरक्षा सहयोग: क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) आतंकवादियों और नशीले पदार्थों के तस्करों की गतिविधियों पर महत्वपूर्ण जानकारी और खुफिया जानकारी साझा करके भारत के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में मदद करती है।
- आर्थिक सहयोग: SCO भारत को बुनियादी ढांचे, ऊर्जा परियोजनाओं और व्यापार पहल पर सहयोग करने के अवसर प्रदान करता है, विशेष रूप से संसाधन संपन्न मध्य एशियाई क्षेत्र में।
- तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) पाइपलाइन और ईरान-पाकिस्तान-भारत (IPI) पाइपलाइन जैसी परियोजनाएं पारस्परिक लाभ प्रदान करती हैं और भारत एवं पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दे सकती हैं।
चुनौतियाँ
- भिन्न रणनीतिक हित: सदस्य देशों के बीच परस्पर विरोधी भू-राजनीतिक हितों की उपस्थिति, विशेष रूप से भारत, चीन और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे, अक्सर आम सहमति बनाने में बाधा उत्पन्न करते हैं और संगठन की प्रभावशीलता को सीमित करते हैं।
- आतंकवाद पर असंगत दृष्टिकोण: आतंकवाद की परिभाषा और उससे निपटने के तरीकों (जिसमें राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा भी शामिल है) के संबंध में सदस्य देशों के बीच मतभेद, SCO के सामूहिक आतंकवाद विरोधी प्रयासों को कमजोर करते हैं।
- SCO के भीतर चीन का प्रभुत्व: संगठन के भीतर चीन का बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव एजेंडा निर्धारण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में असंतुलन पैदा करता है, जो भारत सहित अन्य सदस्यों की भूमिका और प्रभाव को सीमित कर सकता है।
- सीमित संस्थागत प्रभावशीलता: SCO में सुदृढ़ प्रवर्तन तंत्र का अभाव है, जो नीतिगत प्रतिबद्धताओं को धरातल पर ठोस और प्रभावी कार्यों में बदलने की इसकी क्षमता को प्रतिबंधित करता है।
आगे की राह
- आतंकवाद की एक साझा और गैर-चयनात्मक परिभाषा विकसित करनी चाहिए और वस्तुनिष्ठ एवं प्रभावी आतंकवाद विरोधी प्रयासों को सुनिश्चित करने के लिए ‘RATS’ जैसे तंत्रों के माध्यम से खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना चाहिए।
- रणनीतिक और आर्थिक संलग्नता बढ़ाना: भारत को मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा संबंधों का विस्तार करने के लिए SCO का लाभ उठाना चाहिए, साथ ही कनेक्टिविटी सुधारने के लिए ‘INSTC’ और चाबहार बंदरगाह जैसी पूरक पहलों का उपयोग करना चाहिए।
- संतुलित और समावेशी बहुपक्षीय व्यवस्था को बढ़ावा देना: भारत को एक बहुध्रुवीय, नियम-आधारित व्यवस्था की वकालत करने के लिए SCO मंच का उपयोग करना चाहिए, जिससे क्षेत्रीय पहलों में संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और पारदर्शिता के प्रति सम्मान सुनिश्चित हो सके।
- संस्थागत प्रभावशीलता और क्षेत्रीय संवाद को बढ़ाना: SCO को अपनी संस्थागत क्षमता और कार्यान्वयन तंत्र में सुधार करना चाहिए, जबकि भारत को SCO और ‘भारत-मध्य एशिया संवाद’ जैसे मंचों के माध्यम से अपनी भागीदारी को और सशक्त बनाना चाहिए।
Sources :
Sectsco
Sectsco
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