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सामान्य अध्ययन-2: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां, विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

संदर्भ: पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने साक्ष्य-आधारित राजकोषीय विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने और पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के लिए वित्तीय हस्तांतरण की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से राज्य वित्त आयोगों (SFCs) के लिए डेटासेट पर समिति की रिपोर्ट जारी की।

रिपोर्ट के बारे में

  • राज्य वित्त आयोगों (SFCs) के लिए डेटासेट पर समिति का गठन पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकास के लिए हस्तांतरण पर वित्त आयोगों के सम्मेलन (नवंबर 2024) के दौरान राज्य वित्त आयोगों के लिए विश्वसनीय डेटासेट तक अपर्याप्त पहुँच के संबंध में उठाई गई चिंताओं के बाद किया गया था।
  • रिपोर्ट उन आवश्यक डेटासेट की पहचान करती है जिनकी SFCs को आवश्यकता होती है और यह डेटा की उपलब्धता, मानकीकरण, इंटरऑपरेबिलिटी और संस्थागत क्षमता में सुधार के उपाय सुझाती है।
  • यह स्थानीय शासन का समर्थन करने वाले सूचना ढांचे को सुदृढ़ करने और अधिक प्रभावी राजकोषीय विकेंद्रीकरण को सक्षम बनाने का प्रयास करती है।
  • यह रिपोर्ट भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा जारी की गई थी।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • मौजूदा डेटा इकोसिस्टम में चुनौतियाँ:
    • कई विभागों में डेटा का विखंडन, जिसमें स्थानीय सरकार के वित्त और सेवा वितरण के लिए कोई एकीकृत डेटाबेस नहीं है।
    • ग्राम पंचायत-स्तर पर डेटा की सूक्ष्मता का अभाव।
    • राज्यों के बीच लेखांकन पद्धतियों में भिन्नता, जो डेटा की तुलनात्मकता में बाधा डालती है।
    • क्षेत्र-वार और कार्यात्मक व्यय डेटा की सीमित उपलब्धता।
    • स्थानीय स्तर पर क्षमता की बाधाएं, जिसमें लेखांकन और डेटा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी शामिल है।
    • राज्य वित्त आयोग (SFC) की रिपोर्टों के गठन और प्रस्तुति में देरी, तथा उनकी गुणवत्ता और कार्यप्रणाली में व्यापक भिन्नता।
    • जनगणना 2011 और SECC डेटा जैसे पुराने डेटासेट पर निरंतर निर्भरता।
  • चिह्नित आवश्यक डेटासेट: रिपोर्ट उन डेटासेट के मानकीकरण की आवश्यकता पर जोर देती है जो निम्नलिखित से संबंधित हैं:
    • जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक संकेतक
    • राजस्व, व्यय, वित्तीय हस्तांतरण और ऋण
    • शासन और विकेंद्रीकरण संकेतक
    • अवसंरचना अंतराल और परिसंपत्ति सूचियाँ
    • सार्वजनिक सेवा वितरण के परिणाम
  • मुख्य सिफारिशें:
    • डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करना: ग्राम पंचायत-स्तर पर मजबूत राजकोषीय डेटाबेस विकसित करना, मानक ढांचे के माध्यम से पंचायत-स्तरीय डेटा की व्यवस्थित उपलब्धता सुनिश्चित करना और जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत डेटासेट को कवर करते हुए एक संयुक्त MoPR–MoSPI डेटा हैंडबुक प्रकाशित करना।
    • पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) का बेहतर उपयोग: राज्य वित्त आयोगों द्वारा उपयोग के लिए PAI संकेतकों को आवश्यकता-आधारित, प्रदर्शन और समानता/पिछड़ापन श्रेणियों में वर्गीकृत करना।
    • संस्थागत सुधार: स्थायी राज्य वित्त आयोग प्रकोष्ठ की स्थापना करना, राज्य वित्त आयोगों के बीच बातचीत और ज्ञान-साझाकरण के लिए एक औपचारिक मंच बनाना, और एक व्यापक राज्य वित्त आयोग नियमावली तैयार करना।
    • क्षमता निर्माण: उपलब्ध डेटासेट और ‘ई-ग्राम स्वराज’ पोर्टल पर जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाना, क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार में NIRDPR की भूमिका को मजबूत करना, और पंचायत सांख्यिकी का आवधिक प्रकाशन फिर से शुरू करना।
    • मानकीकरण और पारदर्शिता: स्थानीय निकायों को हस्तांतरण के लिए एकसमान लेखांकन शीर्ष लागू करना, SFC रिपोर्टों के लिए एक सामान्य रिपोर्टिंग प्रारूप अपनाना, और ग्राम पंचायत-वार आवंटन के साथ ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरण का विवरण देने वाला एक पूरक बजट दस्तावेज शामिल करना।
    • जवाबदेही उपाय: CAG से 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन का प्रदर्शन ऑडिट करने का अनुरोध करना और MoPR, MoSPI तथा अन्य हितधारकों को शामिल करके एक विशेषज्ञ समूह के माध्यम से ‘स्थानीय सांख्यिकी प्रणाली’ को पुनर्जीवित करना।

राज्य वित्त आयोगों (SFCs) के बारे में

  • राज्य वित्त आयोग (SFC) एक संवैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 243-I और 243-Y के तहत की गई है और इसका गठन राज्यपाल द्वारा हर पाँच वर्ष में किया जाता है।
  • यह पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है और उनके वित्तीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय सुझाता है।
  • आयोग राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के बीच राज्य कर राजस्व के वितरण की सिफारिश करता है।
  • यह राज्य की संचित निधि से करों, शुल्कों, टोल, फीस और सहायता अनुदान के आवंटन पर भी सलाह देता है।
  • इस प्रकार, राज्य वित्त आयोग स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने और राजकोषीय विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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