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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनका प्रभाव; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और फ्रांस की सैफरान हेलीकॉप्टर इंजन प्राइवेट लिमिटेड ने संयुक्त रूप से ‘अरावली’ विकसित करने के लिए अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह भारत में उच्च-शक्ति वाले हेलीकॉप्टर इंजन के डिजाइन और विकास का पहला उदाहरण है।

अन्य संबंधित जानकारी

• HAL और सैफरान ने SAFHAL हेलीकॉप्टर इंजन प्राइवेट लिमिटेड नामक अपने 50:50 संयुक्त उद्यम के माध्यम से अरावली कार्यक्रम के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। 

• यह समझौता नए-पीढ़ी के हेलीकॉप्टर इंजन के संयुक्त डिजाइन, विकास, विनिर्माण, आपूर्ति और जीवनचक्र सहायता को शामिल करता है। 

• यह कार्यक्रम हेलीकॉप्टर-इंजन प्रौद्योगिकी में दीर्घकालिक HAL– सैफरान साझेदारी पर आधारित है और सहयोग को नई उच्च-शक्ति प्रणोदन प्रणाली के संयुक्त विकास की दिशा में आगे बढ़ाता है। 

• अरावली कार्यक्रम से भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस-प्रणोदन क्षमताओं तथा व्यापक रक्षा-औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की उम्मीद है।

अरावली इंजन कार्यक्रम को समझना

• उच्च-शक्ति टर्बोशाफ्ट इंजन: अरावली नई पीढ़ी का 3,500–4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर (shp) टर्बोशाफ्ट इंजन है, जिसमें उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं और इसे कठिन परिचालन परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। 

• प्रस्तावित प्लेटफॉर्म: इस इंजन का चयन HAL के 13-टन भारतीय मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) तथा भारतीय नौसेना के लिए विकसित किए जा रहे इसके 12.5-टन नौसैनिक संस्करण, डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) के लिए किया गया है। 

• SAFHAL और विनिर्माण: यह कार्यक्रम SAFHAL, HAL– सैफरान के 50:50 संयुक्त उद्यम के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इंजन का विनिर्माण तुमकुरु, कर्नाटक में किया जाएगा। 

• प्रौद्योगिकी तक पहुँच: इस कार्यक्रम के माध्यम से HAL को उच्च-दाब कंप्रेसर, पावर टर्बाइन, ईंधन एवं तेल प्रणालियों, एक्सेसरी गियरबॉक्स तथा इंजन की बाहरी प्रणालियों जैसी महत्वपूर्ण इंजन प्रौद्योगिकियों तक पहुँच प्राप्त होगी। विकास के दौरान भारतीय इंजीनियर Safran के इंजीनियरों के साथ मिलकर कार्य करेंगे। 

• विकास समय-सीमा: अरावली इंजन का डिजाइन और विकास 2032-33 तक पूरा होने की उम्मीद है।

भारत के रक्षा और एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्त्व

• लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से सह-विकास की ओर: अरावली कार्यक्रम HAL–Safran के पहले के सहयोग से आगे बढ़कर लाइसेंस प्राप्त उत्पादन/सह-उत्पादन और मौजूदा इंजन प्रौद्योगिकियों से उच्च-शक्ति वाले इंजन के संयुक्त डिजाइन एवं विकास की ओर बदलाव को दर्शाता है। इससे महत्वपूर्ण प्रणोदन प्रौद्योगिकियों में गहन क्षमता निर्माण संभव होगा। 

• एयरो-इंजन में आत्मनिर्भरता: भारत में उच्च-शक्ति वाले हेलीकॉप्टर इंजन का विकास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल प्रणोदन क्षेत्र में क्षमताओं को मजबूत करेगा तथा समय के साथ विदेशी इंजन प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करेगा। 

• प्रौद्योगिकी का अवशोषण: महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच, HAL के नेतृत्व वाले डिजाइन क्षेत्रों में बौद्धिक संपदा तथा भारतीय इंजीनियरों की भागीदारी से इंजन डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन और जीवनचक्र सहायता में घरेलू क्षमताएँ मजबूत होंगी। 

• स्वदेशी रोटरक्राफ्ट क्षमता: अरावली IMRH और DBMRH को प्रणोदन प्रदान करेगा, जिससे स्वदेशी मध्यम-भार वाले सैन्य हेलीकॉप्टर विकसित करने और आयातित प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयासों को समर्थन मिलेगा। 

• एयरोस्पेस औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र: घरेलू विनिर्माण से सटीक इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण, घटक आपूर्ति शृंखला और MRO में क्षमताएँ विकसित हो सकती हैं, जिससे भविष्य के एयरोस्पेस कार्यक्रमों के लिए व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा। 

स्वदेशी एयरो-इंजन विकास की चुनौतियाँ

• तकनीकी जटिलता: उच्च-शक्ति वाले टर्बोशाफ्ट इंजनों के लिए कंप्रेसर, टर्बाइन, दहन, तापीय प्रबंधन, सामग्री और सटीक विनिर्माण में उन्नत क्षमताओं की आवश्यकता होती है। 

• परीक्षण और प्रमाणन: विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में विश्वसनीयता, सुरक्षा, टिकाऊपन और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक परीक्षण और प्रमाणन आवश्यक होगा। 

• प्रौद्योगिकी का अवशोषण: साझेदारी का दीर्घकालिक मूल्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रौद्योगिकी तक पहुँच और संयुक्त इंजीनियरिंग को निरंतर भारतीय डिजाइन एवं विकास क्षमताओं में किस प्रकार परिवर्तित किया जाता है। 

• कार्यक्रम का क्रियान्वयन: निरंतर वित्तपोषण, कुशल जनशक्ति, परीक्षण अवसंरचना और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला क्षमता 2032-33 के विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण होंगी।

आगे की राह

• स्वदेशी डिजाइन क्षमता का निर्माण: अरावली कार्यक्रम का उपयोग मुख्य इंजन संरचना, डिजाइन और विकास में भारतीय विशेषज्ञता को क्रमिक रूप से बढ़ाने के लिए करना। 

• घरेलू विनिर्माण को गहरा करना: एक मजबूत स्वदेशी प्रणोदन आपूर्ति शृंखला विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण घटकों, उन्नत सामग्रियों और सटीक विनिर्माण क्षमताओं को घरेलू स्तर पर विकसित करना। 

• परीक्षण और MRO को मजबूत करना: इंजन के पूरे जीवनचक्र में घरेलू परीक्षण, प्रमाणन, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) क्षमताओं का विस्तार करना। 

• भविष्य के प्लेटफॉर्मों का लाभ उठाना: अरावली द्वारा निर्मित तकनीकी आधार का उपयोग भविष्य के उच्च-शक्ति वाले सैन्य और संभावित नागरिक रोटरक्राफ्ट अनुप्रयोगों के लिए करना, जहाँ यह तकनीकी और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हो।

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