संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ एवं मंच—उनकी संरचना और अधिदेश।
संदर्भ: 30–31 अक्टूबर, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G-20 विदेश मंत्रियों की बैठक भू-राजनीतिक मतभेदों, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर मतभेदों के कारण संयुक्त विज्ञप्ति जारी किए बिना संपन्न हुई।
अन्य संबंधित जानकारी
- सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक मतभेदों के कारण बैठक संयुक्त विज्ञप्ति के बजाय अध्यक्ष का वक्तव्य जारी करने के साथ संपन्न हुई।
- विदेश मंत्रियों की बैठक: यह G-20 सदस्य देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक है, जो विदेश मंत्रियों को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने तथा बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए एक मंच प्रदान करती है।
प्रमुख प्रमुख परिणाम
- ऊर्जा सुरक्षा: किफायती, सुलभ एवं विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति पर बल दिया गया। इसके साथ ही भविष्य की ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, जिनमें असैन्य परमाणु ऊर्जा, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और सूक्ष्म रिएक्टर शामिल हैं, में निवेश पर भी जोर दिया गया।
- आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता: अधिक पारदर्शिता, निवेश, विविधीकरण, प्रसंस्करण, शोधन एवं पुनर्चक्रण के माध्यम से महत्त्वपूर्ण खनिजों, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- मनमाने निर्यात प्रतिबंधों, अत्यधिक सब्सिडी तथा गैर-बाजार नीतियों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों पर चिंता व्यक्त की गई।
- नौवहन की स्वतंत्रता: वैश्विक व्यापार एवं ऊर्जा प्रवाह की सुरक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य, बाब-अल-मंदेब, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर सहित सामरिक जलमार्गों से सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन पर बल दिया गया।
- खाद्य पदार्थों के हथियारीकरण की रोकथाम: खाद्य पदार्थों एवं कृषि व्यापार को भू-राजनीतिक और आर्थिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- भू-राजनीतिक मतभेद: सदस्य देश रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान के विरुद्ध अमेरिका-इज़राइल युद्ध, अमेरिकी टैरिफ और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों पर आम सहमति बनाने में विफल रहे।
- रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की उपस्थिति पर यूरोपीय देशों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद पारंपरिक सामूहिक फोटो लेने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
- दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर भी अमेरिका की आलोचना हुई।
- अन्य घटनाक्रम: अमेरिका ने इबोला प्रकोप से निपटने के लिए 2 अरब डॉलर जुटाए जाने की जानकारी दी।
- अगला G-20 शिखर सम्मेलन दिसंबर 2026 में मियामी, अमेरिका में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 2027 में यूनाइटेड किंगडम G-20 की अध्यक्षता करेगा।
- भारत का रुख: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा की बढ़ती लागत और आपूर्ति में व्यवधानों से जुड़ी चिंताओं को रेखांकित किया। उन्होंने स्वच्छ खाना पकाने के लिए एलपीजी की विश्वसनीय आपूर्ति तथा भारत के राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन पर जोर दिया।
- उन्होंने G-20 महत्त्वपूर्ण खनिज चक्रीयता पहल का प्रस्ताव रखा तथा ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन के क्षेत्र में सहयोग का आह्वान किया।
क्वाड की बैठक के अन्य क्षेत्र
- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने आपूर्ति शृंखलाओं की सुदृढ़ता, समुद्री सहयोग, विश्वसनीय अवसंरचना और महत्त्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा की।
- उन्होंने भारत और आसियान देशों में महत्त्वपूर्ण खनिजों के पुनर्प्राप्ति अवसंरचना के लिए अमेरिका की 1 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्धता का स्वागत किया तथा पहले क्वाड व्यापारिक नेताओं के मंच की घोषणा की।
G-20 के बारे में
- G-20 की स्थापना वर्ष 1999 में एशियाई वित्तीय संकट (1997–98) के बाद की गई थी। प्रारंभ में यह वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के मंच के रूप में स्थापित हुआ था।
- इसका पहला नेताओं का शिखर सम्मेलन वर्ष 2008 में आयोजित किया गया था।
- संरचना: इसमें 19 देश, यूरोपीय संघ (EU) और अफ्रीकी संघ (AU) शामिल हैं, जो प्रमुख विकसित एवं उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- प्रतिनिधित्व: इसके सदस्य देशों का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 85%, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 75% तथा विश्व की कुल जनसंख्या में लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
- संगठनात्मक संरचना: G-20 के दो प्रमुख कार्यक्षेत्र हैं:
- 1. फाइनेंस ट्रैक (Finance Track): वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।
- 2. शेरपा ट्रैक (Sherpa Track): विकास, व्यापार, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य सहित व्यापक नीतिगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।
- अध्यक्षता: इसकी अध्यक्षता प्रतिवर्ष सदस्य देशों के बीच क्रमवार बदलती रहती है।
- वर्ष 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका के पास इसकी अध्यक्षता है, जिसके बाद वर्ष 2027 में यूनाइटेड किंगडम इसकी अध्यक्षता करेगा।
- सचिवालय: G-20 का कोई स्थायी सचिवालय या मुख्यालय नहीं है।
- इसकी अध्यक्षता को ट्रोइका द्वारा सहयोग प्रदान किया जाता है, जिसमें पिछली, वर्तमान और आगामी अध्यक्षता वाले देश शामिल होते हैं।
G-20 और भारत
- भारत G-20 का संस्थापक सदस्य है और सितंबर 2023 में नई दिल्ली में G-20 के 18वें नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है। इसका विषय वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य था।
- अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने अफ्रीकी संघ को G-20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व सुदृढ़ हुआ।
- भारत वैश्विक दक्षिण के हितों, वैश्विक शासन सुधारों, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, समावेशी विकास तथा LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) की वकालत करता है।
