संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय; न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली।  

संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR) योजना के अंतर्गत बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने पुनः स्पष्ट किया कि APAAR में नामांकन पूरी तरह स्वैच्छिक होगा तथा केवल अभिभावकों की सूचित सहमति के आधार पर ही किया जाएगा।

अन्य संबंधित जानकारी

  • सर्वोच्च न्यायालय ने अभिषेक बक्शी बनाम भारत संघ (2026) मामले में उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों को देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही शिक्षा मंत्रालय को APAAR के आदर्श सहमति-पत्र में आवश्यक संशोधन करने के लिए भी कहा।
  • न्यायालय ने निर्देश दिया कि सहमति-पत्र में ‘नामांकन से इंकार/बाहर रहने’ का स्पष्ट विकल्प अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि माता-पिता या अभिभावक बिना किसी प्रतिकूल परिणाम के अपने बच्चे का आधार विवरण उपलब्ध कराने से मना कर सकें या APAAR में नामांकन न कराने का निर्णय ले सकें।
  • न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि बच्चों के व्यक्तिगत आँकड़ों, जिनमें आधार संबंधी जानकारी भी शामिल है, के संग्रह, प्रोसेसिंग, भंडारण, संरक्षण, उपयोग तथा साझा करने की प्रत्येक प्रक्रिया डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप ही की जाएगी। साथ ही ऐसे आँकड़ों को कानून के अनुसार अनुमति प्राप्त परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
  • APAAR योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निस्तारण करते हुए न्यायालय ने योजना की संवैधानिक वैधता पर कोई निर्णय नहीं दिया, बल्कि सहमति एवं डेटा संरक्षण से संबंधित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया।

APAAR के बारे में

  • APAAR (स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री) ‘एक राष्ट्र, एक विद्यार्थी पहचान’ पहल के अंतर्गत विकसित 12 अंकों की एक विशिष्ट आजीवन विद्यार्थी पहचान संख्या है।
  • यह प्रत्येक विद्यार्थी के लिए डिजिटल शैक्षणिक पहचान-पत्र (शैक्षणिक पासपोर्ट) के रूप में कार्य करती है तथा उसकी संपूर्ण शैक्षणिक यात्रा के दौरान एक एकीकृत शैक्षणिक प्रोफ़ाइल तैयार करती है।
  • यह स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास तथा आजीवन शिक्षण से संबंधित सत्यापित शैक्षणिक अभिलेखों को एकीकृत करती है, जिससे शिक्षा में निरंतरता तथा सुगम स्थानांतरण सुनिश्चित होता है।
  • प्रत्येक APAAR पहचान संख्या को विद्यार्थी के डिजिलॉकर तथा शैक्षणिक क्रेडिट बैंक खाते से जोड़ा जाता है, जिससे शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सुरक्षित भंडारण, प्राप्ति तथा साझा करना संभव हो पाता है।
  • यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के उद्देश्यों को समर्थन प्रदान करती है। इसके माध्यम से सुरक्षित, स्थानांतरित किए जा सकने वाले तथा सत्यापन योग्य शैक्षणिक अभिलेखों को बढ़ावा मिलता है तथा लचीले शिक्षण मार्गों को प्रोत्साहन मिलता है।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश

  • स्वैच्छिक नामांकन: APAAR में नामांकन अनिवार्य नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों को नामांकन से इंकार करने अथवा इससे बाहर रहने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी।
  • सार्थक एवं सूचित सहमति: आदर्श सहमति-पत्र में ‘नामांकन से इंकार/बाहर रहने’ का स्पष्ट विकल्प होना चाहिए, ताकि अभिभावकों की सहमति स्वतंत्र, सूचित एवं स्पष्ट हो।
  • बच्चों के डेटा की सुरक्षा: बच्चों के आधार तथा अन्य व्यक्तिगत डेटा को कानून के प्रावधानों के अतिरिक्त किसी भी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का अनुपालन: बच्चों के व्यक्तिगत आँकड़ों के संग्रह, प्रसंस्करण, भंडारण, संरक्षण, उपयोग तथा साझाकरण की सभी प्रक्रियाएँ डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप होंगी।
  • देश भर में लागू करना: उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा उपायों को देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।

आगे की राह

  • सहमति व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाना: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट, सूचित एवं बहुभाषी सहमति सुनिश्चित की जाए तथा नामांकन से इंकार/बाहर करने का स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
  • गोपनीयता-केंद्रित प्रणाली अपनाना: न्यूनतम आवश्यक डेटा का संग्रह, उद्देश्य-सीमित उपयोग, आँकड़ों का एनक्रिप्शन तथा सुरक्षित आँकड़ा प्रबंधन को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप अपनाया जाए।
  • संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ बनाना: कार्यान्वयन संबंधी मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित किए जाएँ, साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाए तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों की क्षमता का विकास किया जाए।
  • सुशासन एवं निगरानी को मजबूत करना: नियमित लेखा-परीक्षण (ऑडिट), प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था तथा स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा जनता का विश्वास बना रहे।
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