पूर्वोत्तर के लिए जैविक मत्स्य पालन प्रमाणन की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का शुभारंभ
संदर्भ: केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन के जैविक प्रमाणन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का शुभारंभ किया है। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत सिक्किम के सोरेंग जिले को भारत के पहले अधिसूचित जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर के रूप में रेखांकित किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर: 6 जनवरी 2025 को अधिसूचित सोरेंग क्लस्टर हानिकारक रसायनों, एंटीबायोटिक और कीटनाशकों के उपयोग के बिना पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ मछली पालन को बढ़ावा देता है। इसमें अमूर कार्प, भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) और ट्राउट पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- प्रमाणन ढाँचा: हाल ही में शुरू की गई SOP जैविक मछली उत्पादन एवं प्रमाणन के लिए एक संरचित ढाँचा प्रदान करती है तथा संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में उत्पादों की अनुरेखणीयता को बढ़ावा देती है।
- अवसंरचनात्मक सहायता: PMMSY के अंतर्गत ₹375 लाख की मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। इनमें मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र (Hatcheries), चारा मिलें, शीत भंडारण सुविधाएँ तथा बायोफ्लॉक और पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणालियों (RAS) जैसी प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
महत्त्व
- एकीकृत मूल्य श्रृंखला: PMMSY का क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण चिह्नित भौगोलिक क्षेत्रों में उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को एकीकृत करता है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर भी शामिल हैं।
- बाजार तक पहुँच: जैविक प्रमाणन और अनुरेखणीयता से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ सकता है तथा पूर्वोत्तर के मत्स्य उत्पादों को घरेलू और निर्यात के प्रीमियम बाजारों तक पहुँचने में सहायता मिल सकती है।
- संस्थागत बाजार संपर्क: सिक्किम ने स्थानीय स्तर पर उत्पादित रेनबो ट्राउट की संस्थागत खरीद के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसका उद्देश्य ट्राउट किसानों को एक स्थिर बाजार उपलब्ध कराना है।
प्रथम बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास
संदर्भ: भारत ने 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के श्री विजयपुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में प्रथम बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास की मेजबानी की।
प्रमुख विशेषताएँ
- भाग लेने वाले देश: बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देश — बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड।
- मेजबान कमान: इस अभ्यास की मेजबानी अंडमान और निकोबार कमान (ANC) के तत्वावधान में की गई। यह भारत की पहली एकीकृत त्रि-सेवा कमान है।
- उद्देश्य: अंतर-संचालनीयता को बढ़ाना, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA) को सुदृढ़ करना, समन्वय तंत्र में सुधार करना तथा सदस्य देशों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना।
- क्षेत्रीय केंद्रबिंदु: इस अभ्यास में बंगाल की खाड़ी में समुद्री सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह एक रणनीतिक समुद्री क्षेत्र है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है तथा व्यापार, संपर्क और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
भारत–कोरिया गणराज्य नौसेना द्विपक्षीय अभ्यास
संदर्भ: भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से अभिकल्पित एवं निर्मित निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि ने 29 अक्टूबर 2026 को कोरिया गणराज्य के बुसान में आयोजित भारत–कोरिया गणराज्य नौसेना (IN-RoKN) द्विपक्षीय अभ्यास में अपनी भागीदारी सफलतापूर्वक पूरी की।
प्रमुख विशेषताएँ
- भाग लेने वाली नौसेनाएँ: भारतीय नौसेना और कोरिया गणराज्य की नौसेना (RoKN)।
- बंदरगाह चरण : इसमें पेशेवर चर्चाएँ, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, परिचालन संबंधी जानकारी देना तथा विषय विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान (SMEEs) शामिल थे। इसके साथ ही सांस्कृतिक एवं खेलकूद संबंधी गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
- समुद्री चरण: आईएनएस सह्याद्रि और कोरिया गणराज्य की नौसेना के आरओकेएस मुनमु द ग्रेट ने समन्वित नौवहन, हेलीकॉप्टर परिचालन तथा संयुक्त समुद्री युद्धाभ्यास किए।
- उद्देश्य: पेशेवर आदान-प्रदान और समुद्र में व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, परिचालन अंतर-संचालनीयता और पारस्परिक समझ को बढ़ाना।
अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026
संदर्भ: अभ्यास टाइगर ट्रायम्फ 2026 का पाँचवाँ संस्करण, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभ्यास, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया।
प्रमुख विशेषताएँ
- भाग लेने वाली सेनाएँ: इस अभ्यास में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के सशस्त्र बलों ने भाग लिया। इसमें दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और वायु सेना के घटकों के साथ-साथ विशेषीकृत कर्मी शामिल थे।
- अभ्यास का प्रारूप: वर्ष 2026 के संस्करण में स्टाफ अभ्यास (STAFFEX) और टेबलटॉप अभ्यास (TTX) पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें परिचालन योजना निर्माण, संयुक्त समन्वय और आपदा प्रतिक्रिया से संबंधित अनुकरणीय परिदृश्यों पर बल दिया गया।
- भारत की भागीदारी: तीनों सेनाओं के कर्मियों ने भाग लिया, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक टीम पहली बार इस अभ्यास में शामिल हुई।
- अमेरिका की भागीदारी: अमेरिकी दल में उसकी थल सेना, नौसेना, वायु सेना और मरीन कॉर्प्स के विशेषज्ञों के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर, चिकित्सा सेवाओं और विस्फोटक आयुध निष्क्रियकरण (EOD) के विशेषज्ञ कर्मी शामिल थे।
अभ्यास मालाबार 2026
संदर्भ: भारतीय नौसेना का स्वदेशी निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि, जो पूर्वी बेड़े का हिस्सा है, 4 नवंबर 2026 को बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मालाबार 2026 में भाग लेने के लिए जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे पर पहुँचा।
प्रमुख विशेषताएँ
- भाग लेने वाले देश: भारत, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया — ये चारों देश चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) के सदस्य हैं।
- भारत की भागीदारी: आईएनएस सह्याद्रि, स्वदेशी रूप से अभिकल्पित एवं निर्मित निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट, भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व करता है।
- अभ्यास के चरण:
- बंदरगाह चरण: इसमें भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच पेशेवर संवाद और समन्वित योजना निर्माण शामिल हैं।
- समुद्री चरण: इसमें आईएनएस सह्याद्रि तथा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान की भाग लेने वाली नौसैनिक इकाइयाँ शामिल होंगी।
- उद्देश्य: परिचालन समन्वय को बढ़ाना, अंतर-संचालनीयता को सुदृढ़ करना तथा भाग लेने वाली समुद्री सेनाओं के बीच पेशेवर विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
- रणनीतिक सामंजस्य: यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा देता है तथा भारत के MAHASAGAR (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) विजन के अनुरूप है।
