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सामान्य अध्ययन-3: देशज रुप से प्रौद्योगिकी का विकास एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष एवं कंप्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के अंतर्गत ओडिशा तट के निकट डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ का सफल उड़ान परीक्षण किया।
प्रलय मिसाइल के बारे में
• प्रलय स्वदेशी रूप से विकसित, ठोस प्रणोदक-आधारित, कैनिस्टराइज्ड, सतह-से-सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे पारंपरिक आयुध ले जाने के लिए अभिकल्पित किया गया है।
• इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर विकसित किया है।
• भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इसके विकास-सह-उत्पादन भागीदारों में से एक है और इसने मिसाइल प्रणाली का निर्माण किया है।
• इस मिसाइल को विभिन्न लक्ष्यों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के पारंपरिक आयुध ले जाने के लिए अभिकल्पित किया गया है।
• इसके उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण के सफलतापूर्वक पूरा होने से सशस्त्र बलों में इसे शीघ्र शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
प्रलय मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ
• मारक क्षमता: इसकी परिचालन मारक क्षमता लगभग 150–500 किमी है।
• पेलोड क्षमता: यह लगभग 500–1,000 किग्रा तक के पारंपरिक आयुध ले जा सकती है (कुछ रिपोर्टों में यह क्षमता 350–1,000 किग्रा बताई गई है)। पूर्ण पेलोड के साथ यह लगभग 350 किमी दूर स्थित लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है, जबकि हल्के पेलोड के साथ इसकी मारक क्षमता लगभग 500 किमी तक बढ़ जाती है।
• प्रणोदन: इसमें ठोस प्रणोदक-आधारित प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
• मार्गदर्शन एवं नौवहन: उच्च सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इसमें उन्नत मार्गदर्शन एवं नौवहन तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

• गति: यह अंतिम चरण में लगभग मैक 5–6.1 की बताई गई हाइपरसोनिक गति प्राप्त कर सकती है।
• गतिशीलता: यह उड़ान के मध्य चरण तथा अंतिम चरण में दिशा एवं पथ बदल सकती है। इससे इसका प्रक्षेप पथ कम पूर्वानुमेय हो जाता है और इसे रोकना अधिक कठिन हो जाता है।
• तैनाती: इसका कैनिस्टरयुक्त डिज़ाइन भंडारण, परिवहन तथा प्रक्षेपण के लिए तत्परता को सुगम बनाता है।
बैलिस्टिक मिसाइलों के बारे में
• ये ऐसी मिसाइलें हैं, जो बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती हैं तथा उड़ान के केवल प्रारंभिक चरण में ही संचालित होती हैं, जबकि उनकी अधिकांश यात्रा बिना प्रणोदन के होती है।
• इन्हें स्थिर प्रक्षेपण स्थलों या मोबाइल प्लेटफॉर्मों से प्रक्षेपित किया जा सकता है। इनमें भूमि-आधारित वाहन, विमान, युद्धपोत एवं पनडुब्बियाँ शामिल हैं।

• कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें सामान्यतः पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर ही रहती हैं, जबकि अधिकांश लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें वायुमंडल से बाहर यात्रा करती हैं।
• क्रूज़ मिसाइलों से अंतर: बैलिस्टिक मिसाइलें अपने प्रारंभिक संचालित चरण के बाद बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती हैं, जबकि क्रूज़ मिसाइलें अपनी पूरी उड़ान के दौरान वायुगतिकीय प्रणोदन एवं मार्गदर्शन के माध्यम से संचालित होती हैं।
अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइलों के बारे में
• अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल अपेक्षाकृत कम ऊँचाई वाले एवं उथले बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण करती है तथा पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर ही रहती है।
• पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, यह उड़ान के दौरान निरंतर दिशा-परिवर्तन करने में सक्षम होती है, जिसमें ऊँचाई एवं दिशा में परिवर्तन शामिल हैं।
• उड़ान के मध्य एवं अंतिम चरण में किए जाने वाले ये दिशा-परिवर्तन इसके प्रक्षेप पथ को कम पूर्वानुमेय बनाते हैं, लक्ष्य निर्धारण में लचीलापन बढ़ाते हैं तथा इसे रोकना अधिक कठिन बनाते हैं।
