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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास एवं रोज़गार से संबंधित विषय।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली का आधुनिकीकरण करने हेतु सांख्यिकीय रूपांतरण, विश्लेषण एवं अनुसंधान के लिए विकसित भारत पहल (VISTAR) को मंजूरी दी है। यह वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक के लिए ₹4,371.10 करोड़ के परिव्यय वाली एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।

सांख्यिकीय रूपांतरण, विश्लेषण एवं अनुसंधान के लिए विकसित भारत पहल (VISTAR) के बारे में

  • नोडल मंत्रालय: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)।
  • अवधि: पाँच वर्ष (वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक)।
  • वित्तीय परिव्यय: ₹4,371.10 करोड़।
  • उद्देश्य: बेहतर डेटा टाइमिंग, सूक्ष्मता एवं अंतःसंचालनीयता के माध्यम से एक गतिशील, वास्तविक समय में एवं भविष्य के लिए तैयार सांख्यिकीय संरचना स्थापित करना। इसे समरूप एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनुकूल डेटासेट्स का समर्थन प्राप्त होगा।
  • कवरेज: इसमें MoSPI की सभी सांख्यिकीय एवं डेटा प्रबंधन संबंधी गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनमें सर्वेक्षण, अनुसंधान, डिजिटल रूपांतरण एवं राष्ट्रीय डेटा  गवर्नेंस शामिल हैं।

इस योजना के तीन प्रमुख घटक हैं:

  • 1. व्यापक सांख्यिकीय परिचालन एवं इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण:
    • MoSPI ने  16वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान 59 सर्वेक्षण कराने का प्रस्ताव रखा, जबकि इससे पहले 43 प्रमुख सर्वेक्षण कराए गए थे।
    • डेटा प्रोसेसिंग, सत्यापन एवं विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के एकीकरण तथा संपूर्ण प्रक्रिया के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना।
    • नए संकेतकों का प्रस्ताव, जिनमें सेवा उत्पादन का प्रमुख सूचकांक तथा असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का सूचकांक शामिल हैं।
    • डेटा के सूचीकरण, अंतःसंचालनीयता, मशीन-लर्निंग, डेटा-शेयरिंग प्रोटोकॉल एवं गोपनीयता-सुनिश्चित अभिकल्पना के सिद्धांतों के माध्यम से डेटा के मानकीकरण को बढ़ावा देना।
    • सर्वेक्षणों के पूरक के तौर पर मोबाइल फोन, स्कैनर एवं ई-कॉमर्स से प्राप्त डेटा सहित वैकल्पिक डेटा स्रोतों को एकीकृत करना, ताकि उत्तरदाताओं पर पड़ने वाला भार कम हो तथा डेटा की कमियों को दूर किया जा सके।
  • 2. सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण हेतु सहायता (SSS):
    • पुनर्गठित एवं परिणाम-आधारित रोडमैप SSS 2.0 के माध्यम से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
    • राज्य-स्तरीय सांख्यिकीय क्षमताओं, स्वदेशी डेटा प्रोसेसिंग तथा सूक्ष्म जिला-स्तरीय अनुमानों के निर्माण को सुदृढ़ करना।
    • आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS), घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) एवं असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) के अंतर्गत जिला-स्तरीय एवं दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के अनुमान तैयार करने में सहायता करना। इसके साथ ही राज्य/जिला-स्तरीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) तथा राज्य-स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का संकलन करना।
  • 3. आर्थिक जनगणना (EC):
    • MoSPI, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से 8वीं आर्थिक जनगणना आयोजित करेगा।
    • गैर-कृषि प्रतिष्ठानों एवं उनमें नियोजित श्रमिकों के बारे में ग्राम पंचायत एवं वार्ड स्तर तक सूक्ष्म जानकारी एकत्र करना।
    • असंगठित क्षेत्र का आकलन करना तथा राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यावसायिक रजिस्टर (SBR) विकसित करने के लिए आधारभूत आँकड़े उपलब्ध कराना, जिससे लक्षित उद्यम सर्वेक्षणों एवं नीतिगत हस्तक्षेपों को सुगम बनाया जा सके।

VISTAR की आवश्यकता एवं महत्त्व

  • सांख्यिकीय अवसंरचना का आधुनिकीकरण: डेटा की समयबद्धता, सूक्ष्मता, सटीकता एवं अंतःसंचालनीयता में सुधार करके एक गतिशील, वास्तविक समय पर आधारित एवं भविष्य के लिए तैयार सांख्यिकीय संरचना स्थापित करना।
  • महत्त्वपूर्ण डेटा-अंतराल को दूर करना: 16वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित सर्वेक्षणों की संख्या 43 से बढ़ाकर 59 करने से सांख्यिकीय कवरेज में सुधार होगा तथा समयबद्ध एवं लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप संभव हो सकेंगे।
  • साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देना: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विश्लेषण, समरूप डेटा-संग्रह एवं वैकल्पिक डेटा स्रोतों से सरकारी कार्यक्रमों को लक्षित करने में सुधार होगा, दोहराव एवं उत्तरदाताओं पर पड़ने वाला भार कम होगा तथा सरकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया सुगम होगी।
  • विकेंद्रीकृत सांख्यिकीय क्षमताओं को सुदृढ़ करना: SSS 2.0 से जिला स्तर एवं दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के अनुमान बेहतर होंगे, स्वदेशी डेटा-प्रोसेसिंग क्षमताएँ सुदृढ़ होंगी तथा डेटा-आधारित स्थानीय नीति-निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
  • असंगठित क्षेत्र के आकलन में सुधार: 8वीं आर्थिक जनगणना एवं राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यावसायिक रजिस्टर से गैर-कृषि प्रतिष्ठानों एवं श्रमिकों के बारे में सूक्ष्म जानकारी प्राप्त होगी, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में असंगठित क्षेत्र के योगदान का अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी।
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