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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन में उनके अनुप्रयोग; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रुप से प्रौद्योगिकी का विकास।|

संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत भारत की घरेलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षमताओं और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए तीन स्वदेशी आधारभूत मॉडल— EKA-1, Dhīr 2B और Dhīr 5B जारी किए।

अन्य संबंधित जानकारी

  • EKA–1 (सोकेट लैब्स): यह 26.3 अरब पैरामीटर वाला एक मुक्त एवं विरल हाइब्रिड मॉडल है, जिसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन पर प्रशिक्षित किया गया है।
    • यह आठवीं अनुसूची की सभी 22 भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेज़ी में भी कार्य करने में सक्षम है। इसे गणित, कोडिंग, तार्किक क्षमता, स्वायत्त एजेंट आधारित अनुप्रयोगों, बैंकिंग और साइबर सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है।
  • Dhīr 2B और Dhīr 5B (ZenteiQ): ये क्रमशः 2 अरब और 5 अरब पैरामीटर वाले मुक्त स्रोत मॉडल हैं। ये अंग्रेज़ी और 10 भारतीय भाषाओं में कार्य करने में सक्षम है तथा दस्तावेज़-आधारित स्वचालन, ज्ञान पुनर्प्राप्ति और बहुभाषी सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
    • ये क्लाउड कनेक्टिविटी के बिना ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU), टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) और मोबाइल उपकरणों पर संचालित हो सकते हैं। इन्हें सुरक्षित, स्थानीय परिसर-आधारित प्रणालियों में भी उपयोग किया जा सकता है।

इंडिया एआई मिशन के बारे में

  • शुभारंभ एवं परिव्यय: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2024 में स्वीकृत इस मिशन के लिए पाँच वर्षों की अवधि में 10,371.92 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • दृष्टिकोण: “भारत में एआई का निर्माण करना और एआई को भारत के लिए उपयोगी बनाना।”
  • कार्यान्वयन: इस मिशन का कार्यान्वयन इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत एक स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग इंडिया एआई द्वारा किया जा रहा है। यह मिशन संगणन अवसंरचना, डेटासेट्स, स्वदेशी मॉडलों, कौशल विकास, स्टार्टअप सहायता और उत्तरदायी एआई के माध्यम से एआई इकोसिस्टम का निर्माण करता है।
  • प्रगति: जून 2026 तक 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) इस मिशन के अंतर्गत शामिल किए जा चुके थे।
    • अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं ने रियायती संगणन सुविधाओं का लाभ उठाया, जिनमें 93.18 लाख GPU घंटे शामिल थे। मिशन के अंतर्गत भारत-विशिष्ट 30 एआई अनुप्रयोगों को मंजूरी दी गई है। इसके अतिरिक्त, 8,000 स्नातक, 5,000 स्नातकोत्तर और 500 पीएचडी विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, 27 डेटा एवं एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं तथा 543 अन्य प्रयोगशालाओं की पहचान की गई है।

स्वदेशी एआई आधारभूत मॉडलों के बारे में

  • आधारभूत मॉडल (Foundation Models): ये बड़े पैमाने पर विकसित एआई प्रणालियाँ हैं, जिन्हें विस्तृत आँकड़ा समूहों पर प्रशिक्षित किया जाता है और विभिन्न कार्यों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
  • बिग लैंग्वेज मॉडल (LLMs) भाषा को समझने और उसका सृजन करने में विशेषज्ञ होते हैं, जबकि बहुआयामी मॉडल पाठ, वाणी और छवियों के संयोजन को संसाधित करते हैं।
  • इंडिया एआई नवाचार केंद्र (आधारभूत मॉडल) स्तंभ
    • उद्देश्य: संप्रभु क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के लिए भारतीय आँकड़ा समूहों, भाषाओं और संदर्भों का उपयोग करके स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल तथा बहुआयामी मॉडल विकसित करना।
    • चयन: 12 संगठनों और संघों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें सर्वम एआई, सोकेट एआई, ज्ञानि एआई, गण एआई, अवतार एआई, आईआईटी बॉम्बे संघ (भारतजेन), GenLoop, ZenteiQ, Intellihealth, शोध एआई, फ्रैक्टल एनालिटिक्स और टेक महिंद्रा मेकर्स लैब शामिल हैं। अलग से, सरकार ने 506 आवेदनों में से आधारभूत मॉडल के 20 प्रस्तावों की पहचान की, जिनमें 12 बड़े बहुआयामी मॉडल और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल शामिल हैं।
    • वित्तीय सहायता: चयनित संगठनों को वास्तविक संगणन लागत के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, आँकड़ा समूहों और कार्मिकों जैसे सहायक व्ययों के लिए कंप्यूटिंग लागत का 25% अतिरिक्त निर्धारित किया गया है।
    • एआईकोश: यह भारतीय डेटासेट्स और एआई मॉडलों तक पहुँच प्रदान करता है। जुलाई 2026 तक इसमें 14,000 से अधिक डेटासेट्स और 331 एआई मॉडल उपलब्ध थे, जो शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं को सहायता प्रदान करते हैं।
  • अन्य स्वदेशी एआई मॉडल
    • परम 2: भारतजेन द्वारा विकसित 17 अरब पैरामीटर वाला बहुभाषी आधारभूत मॉडल, जो आठवीं अनुसूची की सभी 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी को समर्थन देता है।
    • वचन (Vachana): Gnani.ai द्वारा विकसित वाणी आधारित एआई और स्पीच-टू-टेक्स्ट मॉडल।
    • सर्वम एआई मॉडल: ये बहुभाषी दस्तावेज़ प्रसंस्करण, अनुवाद और भारतीय भाषाओं की समझ को समर्थन देते हैं।

स्वदेशी एआई आधारभूत मॉडलों का महत्त्व

  • रणनीतिक स्वायत्तता: विदेशी एआई प्रणालियों पर निर्भरता कम करता है तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप मॉडल विकसित करने और उनका उपयोग करने की भारत की क्षमता को सुदृढ़ करता है।
  • भाषायी समावेशन: भारतीय भाषाओं पर आधारित मॉडल गैर-अंग्रेज़ी भाषी लोगों के लिए एआई सेवाओं को अधिक सुलभ बनाते हैं और डिजिटल विभाजन को कम करने में सहायता करते हैं।
  • गोपनीयता एवं साइबर सुरक्षा: उपकरणों, संस्थानों के परिसर में स्थापित प्रणालियों तथा बाहरी नेटवर्क से पूर्णतः अलग प्रणालियों में इनके उपयोग से संवेदनशील आँकड़ों को उपकरणों या संगठनात्मक प्रणालियों के भीतर सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे बाहरी क्लाउड नेटवर्क के संपर्क में आने का जोखिम कम होता है।
  • भारत-विशिष्ट समाधान: भारतीय आँकड़ों और परिस्थितियों पर प्रशिक्षित मॉडल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, रक्षा, शासन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं।
  • नवाचार एवं उत्पादकता: साझा संगणन सुविधाएँ, सार्वजनिक वित्तपोषण और मुक्त मॉडलों तक पहुँच स्टार्टअप एवं शोधकर्ताओं के लिए प्रवेश संबंधी बाधाओं को कम करते हैं। इससे घरेलू नवाचार को बढ़ावा मिलता है और सार्वजनिक एवं निजी सेवाओं की दक्षता में सुधार होता है।
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