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सामान्य अध्ययन-2: केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति-संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ। स्वास्थ्य, शिक्षा एवं मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: केरलम विधानसभा ने सर्वसम्मति से केरलम वरिष्ठ नागरिक (देखभाल एवं अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2026 पारित किया। इसके साथ ही केरलम वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, संरक्षण और अधिकारों पर विशेष रूप से केंद्रित व्यापक कानून पारित करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • अधिकारों का संरक्षण: गरिमा, स्वतंत्रता तथा दुर्व्यवहार, उपेक्षा, शोषण और परित्याग से सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • देखभाल केंद्रों का विनियमन: वृद्धाश्रमों, देखभाल केंद्रों और घर-आधारित देखभाल सेवाओं के पंजीकरण एवं विनियमन का प्रावधान।
  • देखभालकर्ताओं का विकास: देखभालकर्ताओं के प्रशिक्षण, प्रमाणन तथा परिवार के सदस्यों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना।
  • संस्थागत तंत्र: स्थानीय निकायों में वरिष्ठ नागरिक सहायता प्रकोष्ठ, पुलिस में नोडल अधिकारी तथा राज्य एवं जिला स्तर पर समर्पित संरक्षण इकाइयों का प्रस्ताव।
  • दंडात्मक प्रावधान: क्रूरता, मानसिक उत्पीड़न और परित्याग सहित निर्दिष्ट अपराधों के लिए अधिकतम तीन वर्ष के कारावास और ₹50,000 तक के जुर्माने का प्रावधान।
  • घर पर ही वृद्धावस्था (Ageing at Home): घर-आधारित देखभाल, सुलभ सार्वजनिक स्थानों, कानूनी सहायता, डिजिटल समावेशन और सहायक उत्पादों को बढ़ावा देना।
  • लिविंग विल (Living Wills): उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अग्रिम चिकित्सा निर्देशों को मान्यता देना।
  • वित्तीय एवं आर्थिक सहायता: राज्य आरक्षित निधि का प्रस्ताव तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए उद्यमिता, मार्गदर्शन और आय-सृजन के अवसरों को प्रोत्साहित करना।

विधेयक की आवश्यकता एवं महत्त्व

  • अधिकार-आधारित दृष्टिकोण: पारंपरिक कल्याणकारी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर गरिमा, स्वायत्तता और शोषण से सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • बेहतर देखभाल अवसंरचना: देखभाल केंद्रों के विनियमन और प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं से वृद्धजनों की देखभाल की गुणवत्ता एवं वहनीयता में सुधार हो सकता है।
  • लैंगिक समानता: औपचारिक देखभाल सेवाएँ महिलाओं पर अवैतनिक देखभाल कार्यों के असमान बोझ को कम कर सकती हैं।
  • उत्पादक वृद्धावस्था: वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शन, उद्यमिता और सामुदायिक विकास के माध्यम से योगदान देने में सक्षम बनाता है।
  • सिल्वर इकॉनमी: स्वास्थ्य देखभाल, सहायक आवास, पुनर्वास और सहायक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में रोजगार सृजन के साथ नए अवसर उपलब्ध कराती है।

भारत की वृद्ध होती जनसंख्या एवं जनसांख्यिकीय संक्रमण

  • वृद्ध जनसंख्या में वृद्धि: भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या वर्ष 2011 के 10 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2036 तक 23 करोड़ (कुल जनसंख्या का 14.9%) होने का अनुमान है।
  • वैश्विक प्रवृत्ति: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या वर्ष 2023 के 1.1 अरब से बढ़कर वर्ष 2030 तक 1.4 अरब हो जाएगी।
  • केरल में वृद्धावस्था: वर्ष 2021 में केरल की जनसंख्या में वृद्धजनों की हिस्सेदारी लगभग 15% थी, जिसके वर्ष 2051 तक बढ़कर 30% होने का अनुमान है।
  • कार्यबल में गिरावट: भारतीय रिज़र्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में केरल की कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात लगभग 63% से घटकर 59.5% होने का अनुमान है।

वृद्ध होती जनसंख्या वाले समाज की उभरती चुनौतियाँ

  • आर्थिक एवं स्वास्थ्य देखभाल का बोझ: पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल और दीर्घकालिक देखभाल पर बढ़ता व्यय तथा कार्यबल में कमी सार्वजनिक वित्त पर दबाव डाल सकती है। मनोभ्रंश और गैर-संचारी रोग स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओं को और बढ़ाते हैं।
  • सामाजिक अलगाव एवं दुर्व्यवहार: प्रवासन, संयुक्त परिवारों की घटती प्रवृत्ति और डिजिटल सुविधाओं तक सीमित पहुँच अकेलेपन, परित्याग तथा वित्तीय शोषण को बढ़ाते हैं।
  • लैंगिक आधार पर देखभाल का दायित्व: समय उपयोग सर्वेक्षण, 2024 के अनुसार, महिलाएँ प्रतिदिन अवैतनिक देखभाल कार्यों पर 140 मिनट व्यतीत करती हैं, जबकि पुरुष 74 मिनट व्यतीत करते हैं।
    • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, वर्ष 2024 में अवैतनिक देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों के कारण 70.8 करोड़ महिलाएँ श्रम बाजार से बाहर थीं।
  • देखभाल अवसंरचना में असमानता: प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं, वृद्धावस्था विशेषज्ञों और किफायती देखभाल सुविधाओं की कमी का प्रतिकूल प्रभाव विशेष रूप से निर्धन एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वृद्धजनों पर पड़ता है।

आगे की राह

  • केयर इकॉनमी को सुदृढ़ बनाना: सार्वजनिक निवेश के माध्यम से किफायती घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं, पुनर्वास, सहायक आवास और समुदाय-आधारित देखभाल का विस्तार करना।
  • पर्पल इकॉनमी को बढ़ावा देना: राज्य समर्थित अवसंरचना, उचित पारिश्रमिक और देखभालकर्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों का समान वितरण सुनिश्चित करना।
  • सिल्वर इकॉनमी का विकास करना: नवाचार आधारित उद्यमों, सहायक प्रौद्योगिकियों, सुलभ आवास तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए मार्गदर्शन और उद्यमिता के अवसरों को प्रोत्साहित करना।
  • स्थानीय शासन को सुदृढ़ बनाना: पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित विशेष उप-योजनाएँ शुरू करना, पेंशन के दायरे में विस्तार करना तथा निगरानी तंत्र स्थापित करना।
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