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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण तथा पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के 22वें संस्करण के अनुसार, वर्ष 2025 में वायुमंडल में प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई। इससे दीर्घकालिक वैश्विक तापन (Global Warming) और चरम जलवायु घटनाओं का जोखिम बढ़ गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की रिकॉर्ड सांद्रता: वर्ष 2025 में तीन प्रमुख दीर्घकालिक ग्रीनहाउस गैसों की वैश्विक औसत वायुमंडलीय सांद्रता अब तक के अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई।
    • दीर्घकालिक ग्रीनहाउस गैसों के कारण होने वाले विकिरणीय बल (Radiative Forcing) में CO₂ का योगदान लगभग 66% है, इसके बाद मीथेन (16%) और नाइट्रस ऑक्साइड (6%) का स्थान है।
    • पिछले 11 वर्ष अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं।
  • कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती सांद्रता: वायुमंडल में CO₂ की सांद्रता वर्ष 2004 में 377.5 पीपीएम (ppm) से बढ़कर वर्ष 2025 में 426.8 पीपीएम हो गई।”
  • इसकी वार्षिक वृद्धि दर 1960 के दशक में लगभग 0.8 पीपीएम (ppm) से तीन गुना बढ़कर वर्ष 2011–2020 के दौरान 2.4 पीपीएम हो गई है।
    • वर्ष 2024 से 2025 के बीच CO₂ की सांद्रता में 2.8 पीपीएम की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2023–2024 की रिकॉर्ड 3.6 पीपीएम वृद्धि से कम, लेकिन पिछले 10 वर्षों के औसत 2.63 पीपीएम से थोड़ी अधिक है।
    • वर्ष 2015–2024 के दौरान, मानवजनित CO₂ उत्सर्जन का लगभग 50% वायुमंडल में संचित हुआ, जबकि महासागरों ने 29% और स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र ने 21% CO₂ का अवशोषण किया।
    • NOAA वार्षिक ग्रीनहाउस गैस सूचकांक: इसके अनुसार, वर्ष 1990 से 2025 के बीच दीर्घकालिक ग्रीनहाउस गैसों के कारण विकिरणीय बल में 56% की वृद्धि हुई, जिसमें CO₂ का योगदान लगभग 81% रहा।
    • वर्ष 2025 में CO₂ की वृद्धि दर धीमी रहने का एक कारण स्थलीय कार्बन सिंक की पुनर्बहाली और जंगलों में आग से होने वाले उत्सर्जन में कमी थी। हालाँकि, जीवाश्म ईंधनों का निरंतर उपयोग CO₂ की सांद्रता में और वृद्धि कर सकता है।
  • मीथेन एवं नाइट्रस ऑक्साइड: लगभग 65% मीथेन उत्सर्जन मानवजनित है, जिसका प्रमुख स्रोत पशुपालन, धान की खेती, जीवाश्म ईंधनों का दोहन, कचरा भराव स्थल और जैवभार का दहन हैं।
    • शेष 35% उत्सर्जन प्राकृतिक स्रोतों, जैसे आर्द्रभूमियों और दीमकों से होता है।
    • वर्ष 2025 में मीथेन की सांद्रता में 6 पीपीबी (ppb) की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2024 की 8 पीपीबी वृद्धि और पिछले 10 वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि 10.2 पीपीबी से कम है।
    • लगभग 35% नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन मानवजनित है, जिसके प्रमुख स्रोत कृषि उर्वरक और औद्योगिक गतिविधियाँ हैं। मानवजनित उत्सर्जन में पिछले चार दशकों में 30% की वृद्धि हुई है, जो बढ़कर 7.3 टेराग्राम नाइट्रोजन प्रति वर्ष हो गया है।
  • उभरती चिंताएँ:
    • सल्फरहेक्साफ्लोराइड(SF₆): इसका उपयोग मुख्य रूप से उच्च वोल्टेज वाले विद्युत उपकरणों में विद्युतरोधी के रूप में किया जाता है। वर्ष 1995 से 2025 के बीच वायुमंडल में इसकी सांद्रता में 249% की वृद्धि हुई, जो बढ़कर 12.24 पीपीटी (ppt) हो गई।
      • 100 वर्षों की अवधि में इसकी वैश्विक तापन क्षमता CO₂ की तुलना में लगभग 24,300 गुना अधिक है तथा यह वायुमंडल में 3,200 वर्षों तक बना रह सकता है।
    • हाइड्रोजन(H₂): यह प्रत्यक्ष रूप से ग्रीनहाउस गैस नहीं है, लेकिन वायुमंडलीय रसायन विज्ञान को प्रभावित करके और मीथेन के वायुमंडल में बने रहने की अवधि बढ़ाकर अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक तापन में योगदान दे सकता है।
      • वायुमंडल में इसकी सांद्रता वर्ष 2010 के 532 पीपीबी (ppb) से बढ़कर वर्ष 2024 में 560 पीपीबी हो गई। WMO ने हाइड्रोजन के रिसाव को न्यूनतम करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

सिफारिशें एवं आगे की राह

  • वायुमंडलीय निगरानी को सुदृढ़ करना: WMO के वैश्विक वायुमंडल निगरानी कार्यक्रम (Global Atmosphere Watch) के माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों के वैश्विक अवलोकन में सुधार करना।
  • CO₂ उत्सर्जन में कमी करना: जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से दूर हटकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण में तेजी लाना तथा प्राकृतिक कार्बन सिंक को सुदृढ़ करना।
  • मीथेन एवं नाइट्रस ऑक्साइड पर नियंत्रण: कृषि, पशुपालन, अपशिष्ट प्रबंधन और उर्वरकों के उपयोग से होने वाले उत्सर्जन को कम करना।
  • SF₆ उत्सर्जन को सीमित करना: विद्युत उपकरणों में कम वैश्विक तापन क्षमता वाले वैकल्पिक पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना।
  • हाइड्रोजन के रिसाव को न्यूनतम करना: हाइड्रोजन उत्पादन, पाइपलाइनों, भंडारण सुविधाओं और ईंधन सेल में रिसाव की रोकथाम के उपायों को बढ़ावा देना।
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