संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन -2: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ; विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति तथा विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।
संदर्भ: हाल ही में, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की, जिसके लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हक तिथि निर्धारित किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- क्षेत्र: इस प्रक्रिया में 14 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर शामिल हैं, जहाँ वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
- SIR से संबंध: इन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं, जहाँ मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है, जबकि असम में SIR नहीं किया गया था। जिन 17 अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR जारी है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहाँ विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए कार्यक्रम अलग से निर्धारित किया जाएगा।
- कार्यक्रम: मतदान केंद्रों का युक्तिकरण 2 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाना है। प्रारूप निर्वाचक नामावलियाँ 12 नवंबर को प्रकाशित की जाएँगी। दावे और आपत्तियाँ 11 दिसंबर तक प्रस्तुत की जा सकेंगी। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक निर्धारित है तथा अंतिम निर्वाचक नामावलियाँ 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएँगी।
- नामांकन: 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 की अर्हक तिथियों के लिए अग्रिम आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नामांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए जिला और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इनका विशेष ध्यान प्रवासियों, कमजोर वर्गों और वंचित समुदायों की सहायता पर होगा।
महत्त्व
- निर्वाचक नामावली की सटीकता: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से पुष्टि किए गए नामों के दोहराव , स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाएँगे। इससे मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- नए मतदाताओं का समावेशन: 1 जनवरी 2027 की अर्हक तिथि और इसके बाद की तीन अर्हक तिथियों के लिए अग्रिम आवेदन की सुविधा से पात्र युवा एवं पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को अगले वार्षिक चक्र की प्रतीक्षा किए बिना नामांकन का अवसर मिलेगा।
- अधिक जाँच-पड़ताल: 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक की दावा-आपत्ति अवधि मतदाताओं को निर्वाचक नामावली में नाम शामिल कराने या उसमें सुधार कराने तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्तियाँ दर्ज करने का अवसर प्रदान करती है।
चिंताएँ
- गलत तरीके से नाम हटाया जाना: अभिलेखों में त्रुटियों या निवास स्थान में बदलाव के कारण पात्र मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली से छूट सकते हैं। इसलिए प्रारूप निर्वाचक नामावली की सावधानीपूर्वक जाँच और समय पर सुधार विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
- मनमाने ढंग से नाम हटाने के विरुद्ध सुरक्षा उपाय: भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि जनसांख्यिकीय या फोटोग्राफिक समानता वाली पुष्टि की गई प्रविष्टियों, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं और मृत मतदाताओं के नाम केवल तभी हटाए जा सकते हैं, जब संबंधित मतदाता से अथवा मृत्यु के मामले में उसके निकट संबंधी या परिवार के किसी सदस्य से फॉर्म 7 प्राप्त हो जाए।
- सुगमता और दस्तावेजीकरण: प्रवासियों और वंचित समूहों को नामांकन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म 6 और 8 के लिए आधार देना स्वैच्छिक है। केवल आधार प्रस्तुत न करने के कारण किसी आवेदन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही निर्वाचक नामावली में पहले से दर्ज किसी नाम को हटाया जा सकता है।

आगे की राह
- नामांकन की सुविधा प्रदान करना: पात्र नागरिकों, विशेषकर पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समूहों की सहायता के लिए जिला स्तरीय सहायता केंद्रों और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) का उपयोग करना।
- सुधार की प्रक्रिया को सुगम बनाना: नए मतदाता के नामांकन के लिए फॉर्म 6, प्रवासी भारतीय मतदाताओं के लिए फॉर्म 6A, नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए फॉर्म 7 तथा स्थान परिवर्तन, सुधार और अन्य निर्दिष्ट बदलावों के लिए फॉर्म 8 का उपयोग किया जा सकता है। आवेदन भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल के माध्यम से भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
- उचित प्रक्रिया सुनिश्चित करना: नामों को हटाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए तथा दावों और आपत्तियों का निपटारा घोषित समय-सारणी के भीतर किया जाना चाहिए।
- सटीकता और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखना: निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण के दौरान अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पात्र मतदाताओं के लिए अनावश्यक बाधाएँ उत्पन्न न होंस
