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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण तथा पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: वन घोषणा आकलन 2026 के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक वनोन्मूलन में 15% की कमी दर्ज की गई, लेकिन विश्व वर्ष 2030 तक वनोन्मूलन और वन क्षरण को रोकने तथा उनकी बढ़ती प्रवृत्ति को उलटने के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में अभी भी पीछे है।

रिपोर्ट के बारे में

  • शीर्षक: वन घोषणा आकलन 2026: वर्ष 2030 के वन लक्ष्यों की दिशा में प्रगति का आकलन।
  • प्रकाशित किया गया: वन घोषणा आकलन भागीदारों द्वारा प्रकाशित; इसका समन्वय और संपादन क्लाइमेट फोकस द्वारा किया गया।
  • उद्देश्य: वनोन्मूलन, वन क्षरण, पारिस्थितिक अखंडता, पुनर्बहाली, जलवायु वित्त और वन शासन को शामिल करते हुए वर्ष 2030 के वन लक्ष्यों की दिशा में वैश्विक प्रगति का आकलन करना।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • वैश्विक वनोन्मूलन और वन क्षरण:
    • वनोन्मूलन में कमी का अपूर्ण लक्ष्य: वर्ष 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कटौती की तुलना में, वर्ष 2021 से अब तक विश्व में वनोन्मूलन में कमी के मामले में 10.7 मिलियन हेक्टेयर की संचयी कमी रही।
    • पारिस्थितिक क्षरण: वर्ष 2024 में लगभग 65.4 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र को पारिस्थितिक अखंडता की निम्नतर श्रेणी में वर्गीकृत किया गया।
    • वन क्षरण: उष्णकटिबंधीय आर्द्र वनों में क्षरण वर्ष 2025 में घटकर 3.5 मिलियन हेक्टेयर रह गया, जो 34% की कमी दर्शाता है।
  • क्षेत्रीय प्रगति में असमानता:
    • उष्णकटिबंधीय लैटिन अमेरिका और कैरेबियन: वनोन्मूलन वर्ष 2018–2020 के आधार स्तर की तुलना में 33% कम हो गई, हालांकि अमेजन वर्षावन तापमान वृद्धि की ऐसी सीमा के निकट पहुँच रहा है, जिसके पार होने पर बड़े पारिस्थितिक परिवर्तन हो सकते हैं।
    • उष्णकटिबंधीय अफ्रीका: वनोन्मूलन लगातार बढ़ती रही, जिससे वर्ष 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति और धीमी हो गई।
    • उष्णकटिबंधीय एशिया: वनोन्मूलन में व्यापक रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि इसके मूल कारणों का समाधान काफी हद तक नहीं हो पाया है।
  • वन पुनर्बहाली और वस्तु-प्रेरित वनोन्मूलन:
    • वन पुनर्बहाली: लगभग 11.8 मिलियन हेक्टेयर वन क्षेत्र में सक्रिय रूप से पुनर्बहाली का कार्य किया जा रहा था, जो वैश्विक पुनर्वनीकरण की अनुमानित क्षमता का लगभग 6% है।
    • वस्तु-प्रेरित वनोन्मूलन: वर्ष 2018–2020 के 7.24 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में, वर्ष 2025 में वस्तु-उत्पादन के कारण होने वाली वनोन्मूलन घटकर 6.01 मिलियन हेक्टेयर रह गई। हालाँकि, वर्ष 2030 तक इस प्रकार की वनोन्मूलन को पूरी तरह समाप्त करने के निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप यह कमी अभी भी अपर्याप्त थी।
    • गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्र: घास के मैदानों और अन्य गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्रों को अन्य उपयोगों में परिवर्तित करने से प्रतिवर्ष अनुमानित 9–13 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ।
  • कॉर्पोरेट प्रतिबद्धताएँ और जलवायु वित्त:
    • कॉर्पोरेट जवाबदेही: फॉरेस्ट 500 में शामिल केवल 29% कंपनियों ने वनोन्मूलन को पूरी तरह रोकने के लिए व्यापक प्रतिबद्धताएँ अपनाई थीं, जबकि वर्ष 2025 में 14 प्रमुख कंपनियों ने अपनी प्रतिबद्धताओं में ढील दी या उन्हें वापस ले लिया।
    • विज्ञान-आधारित लक्ष्य: विज्ञान-आधारित लक्ष्य पहल के वन, भूमि और कृषि (SBTi FLAG) संबंधी लक्ष्यों को अपनाने वाली कंपनियों की संख्या वर्ष 2025 में दोगुनी हो गई और जून 2026 तक यह 461 पहुँच गई।
    • जलवायु वित्त: वर्ष 2024 में वन संरक्षण और पुनर्बहाली के लिए लगभग 6 अरब डॉलर (वैश्विक जलवायु वित्त का 0.3%) प्राप्त हुए। इसमें सार्वजनिक स्रोतों से 5.26 अरब डॉलर और निजी स्रोतों से 750 मिलियन डॉलर शामिल थे।
    • हानिकारक सब्सिडी: सरकारों ने वर्ष 2022–2024 के दौरान संभावित रूप से हानिकारक कृषि सब्सिडी पर प्रतिवर्ष अनुमानित 410 अरब डॉलर तथा वर्ष 2024 में जीवाश्म ईंधन सब्सिडी पर 921 अरब डॉलर खर्च किए।
  • स्वदेशी समुदायों के अधिकार और संरक्षित क्षेत्र:
    • भूमि अधिकार: स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों के 5.5 अरब हेक्टेयर भूमि पर प्रथागत अधिकार थे, लेकिन केवल एक अरब हेक्टेयर भूमि पर इन अधिकारों को कानूनी मान्यता प्राप्त थी। इस प्रतिबद्धता का उद्देश्य 160 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर इन अधिकारों को मान्यता प्रदान करना है।
    • राष्ट्रीय जलवायु योजनाएँ: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) की 84 प्रस्तुतियों में से 61 में कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों का उल्लेख किया गया, लेकिन इनमें से कई में भागीदारी, भूमि अधिकारों और लाभों के न्यायसंगत वितरण के लिए ठोस प्रावधानों का अभाव था।
    • 30×30 लक्ष्य: वैश्विक स्थलीय भूमि और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों के केवल 17.33% हिस्से को संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत शामिल किया गया है, जो कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के तहत वर्ष 2030 तक 30% क्षेत्र के संरक्षण के निर्धारित लक्ष्य से काफी कम है।

प्रमुख सिफारिशें:

  • वन शासन को बढ़ावा देना: वन संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना, निगरानी व्यवस्था में सुधार करना तथा वनों की अवैध कटाई और वन क्षरण की समस्या का समाधान करना।
  • पुनर्बहाली का विस्तार करना: क्षरित वनों की पुनर्बहाली का विस्तार करना तथा घास के मैदानों और अन्य गैर-वन पारिस्थितिकी तंत्रों को अन्य उपयोगों में परिवर्तित होने से बचाना।
  • जलवायु वित्त जुटाना: पर्यावरण के लिए हानिकारक सब्सिडी को अन्य मदों में पुनर्निर्देशित करते हुए वन संरक्षण और पुनर्बहाली में सार्वजनिक एवं निजी निवेश बढ़ाना।
  • कॉर्पोरेट जवाबदेही सुनिश्चित करना: वनोन्मूलन को पूरी तरह रोकने की प्रतिबद्धताओं को मजबूत करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा वर्ष 2030 के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में हुई प्रगति का मापन एवं आकलन करना।
  • सामुदायिक भूमि अधिकारों को मान्यता देना: प्रथागत अधिकारों को कानूनी मान्यता प्रदान करना, प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति के सिद्धांत एवं लाभों के न्यायसंगत वितरण को बनाए रखना।
  • 30×30 लक्ष्य को गति देना: वर्ष 2030 तक कम-से-कम 30% स्थलीय भूमि और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों के संरक्षण के लिए संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार करना तथा उनका प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना।
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