किगाली संशोधन की 10वीं वर्षगाँठ

संदर्भ: 15 अक्टूबर 2016 को अपनाए गए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के किगाली संशोधन की 10वीं वर्षगाँठ 2026 में मनाई गई। यह हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) के उपयोग में चरणबद्ध कमी लाने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों को रेखांकित करता है।

किगाली संशोधन के बारे में

  • अंगीकरण: इसे 15 अक्टूबर 2016 को किगाली, रवांडा में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) के अंतर्गत अपनाया गया। यह जनवरी 2019 में प्रभावी हुआ।
  • उद्देश्य: HFCs के उत्पादन और खपत में चरणबद्ध कमी लाना।
    • HFCs ने ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) का स्थान लिया, लेकिन ये शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
  • जलवायु संबंधी लाभ: इसका पूर्ण कार्यान्वयन वर्ष 2100 तक वैश्विक तापवृद्धि को 0.5°C तक रोकने में मदद कर सकता है।
  • वैश्विक प्रगति: 16 सितंबर 2026 तक 174 देशों ने इस संशोधन का अनुसमर्थन कर दिया था। वर्ष 2024 में वैश्विक HFC खपत सामूहिक आधार-स्तर से 30% कम थी।
  • वित्तीय तंत्र: बहुपक्षीय कोष विकासशील देशों को वैकल्पिक प्रौद्योगिकियाँ अपनाने, विनिर्माण प्रक्रियाओं को उन्नत बनाने और तकनीशियनों को प्रशिक्षण देने में सहायता करता है।

भारत और किगाली संशोधन

  • अनुसमर्थन: भारत ने 2021 में इस संशोधन का अनुसमर्थन किया।
  • चरणबद्ध कमी की समय-सारणी: भारत को 2028 में HFCs के उत्पादन और खपत को स्थिर करना होगा, 2032 में सहमत आधार-स्तर से इनमें 10% की कमी करनी होगी तथा 2047 तक 85% की कमी का लक्ष्य प्राप्त करना होगा।
  • शीतलन की माँग: भारत की वार्षिक बिजली माँग में शीतलन की हिस्सेदारी दसवें हिस्से से थोड़ी अधिक है और 2035 तक इसके दोगुने से अधिक होने का अनुमान है।
  • कार्यान्वयन: भारत के संक्रमण में पर्यावरण-अनुकूल प्रशीतकों को अपनाना और शीतलन उपकरणों की दक्षता में सुधार करना शामिल है, ताकि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और बिजली की खपत को कम किया जा सके।

GSAT-7C संचार उपग्रह और वरुणास्त्र भारी भार वाले टॉरपीडो

संदर्भ: रक्षा मंत्रालय ने 15 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए GSAT-7C और भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो की खरीद हेतु लगभग ₹4,106 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इससे स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

अन्य संबंधित जानकारी

  • GSAT-7C: बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ ₹2,563 करोड़ का अनुबंध।
  • वरुणास्त्र: हैदराबाद स्थित भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹1,543 करोड़ का अनुबंध।
  • दोनों खरीद प्रक्रियाएँ आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को समर्थन देती हैं।

GSAT-7C संचार उपग्रह के बारे में

  • उद्देश्य: भारतीय वायु सेना को समर्पित एक स्वदेशी सैन्य संचार उपग्रह।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध संचार उपलब्ध कराता है, जिसमें दृष्टि-रेखा से परे संपर्क भी शामिल है।
    • भारतीय वायु सेना के सॉफ्टवेयर-परिभाषित रेडियो (SDRs) के माध्यम से वास्तविक समय में संचार को समर्थन देता है।
    • लड़ाकू विमानों, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्लेटफॉर्म, मानवरहित हवाई प्लेटफॉर्म और ज़मीनी कमान केंद्रों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को सुदृढ़ करता है।
    • दूरी, भू-भाग और पृथ्वी की वक्रता के कारण उत्पन्न पारंपरिक रेडियो संचार की सीमाओं को दूर करता है।
  • अपेक्षित परिचालन शुरुआत: 2030 तक।
  • महत्त्व
    • परिचालन प्रभावशीलता: भारतीय वायु सेना के विभिन्न संसाधनों के बीच वास्तविक समय में सूचना के आदान-प्रदान और समन्वय में सुधार करता है।
    • संचार की विश्वसनीयता: ज़मीनी नेटवर्क अपर्याप्त होने या बाधित होने पर लंबी दूरी के संचार को समर्थन देता है।
    • नेटवर्क-केंद्रित युद्ध: युद्धक्षेत्र की स्थिति संबंधी जागरूकता और हवाई अभियानों के समन्वय में सुधार करता है।
    • रणनीतिक स्वायत्तता: साझा या विदेशी उपग्रह संचार क्षमताओं पर निर्भरता कम करता है।

वरुणास्त्र भारी वजन वाले टॉरपीडो के बारे में

  • विकासकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अंतर्गत नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL)।
  • निर्माता: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), हैदराबाद।
  • प्रकार: स्वदेशी, पोत से प्रक्षेपित की जाने वाली पनडुब्बी-रोधी युद्धक टॉरपीडो।
  • प्रमुख विशेषताएँ: उन्नत संचालन एवं दिशा-परिवर्तन क्षमता; लंबी दूरी पर दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए विकसित।
  • महत्त्व
    • पनडुब्बी-रोधी युद्ध: पानी के भीतर मौजूद खतरों से निपटने की नौसेना की क्षमता बढ़ाता है।
    • समुद्री सुरक्षा: शत्रुतापूर्ण पनडुब्बियों से निपटने की तैयारी को सुदृढ़ करता है।
  • रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण: घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देता है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है।

ई-गवर्नेंस सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन

संदर्भ: प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने हिमाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से 16–17 अक्टूबर 2026 को धर्मशाला में ई-गवर्नेंस सुधारों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।

ई-गवर्नेंस सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में

  • उद्देश्य: डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देना, शासन की सफल कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना तथा पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करना।
  • प्रमुख चर्चाएँ: सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण तथा सफल ई-गवर्नेंस पहलों को अन्य क्षेत्रों में अपनाने की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
  • हिमाचल प्रदेश की पहल: पाँच पहलों को प्रदर्शित किया गया:
    • हिम परिवार
    • सुख आश्रय
    • विद्या समीक्षा केंद्र
    • ग्रीन हिमाचल
    • राजीव गांधी वन संवर्धन योजना
  1. अन्य पहल: प्रस्तुतियों में एग्रीस्टैक (AgriStack), ई-जागृति, ई-संजीवनी के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम नैदानिक निर्णय सहायता प्रणाली, बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय सहायता प्रणाली तथा iGOT कर्मयोगी शामिल थे।

ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों के बारे में

  • नोडल विभाग: प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) ई-गवर्नेंस पहलों के कार्यान्वयन में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए प्रतिवर्ष ये पुरस्कार प्रदान करता है। o ये पुरस्कार वर्ष 2003 से प्रदान किए जा रहे हैं।
  • उद्देश्य: नवाचार को मान्यता देना, प्रभावी कार्यप्रणालियों का प्रसार करना तथा सतत्, प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन समाधानों को प्रोत्साहित करना।
  • पात्रता: केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारें, जिले, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तथा शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थान।
  • पुरस्कार श्रेणियाँ 2026: इस योजना के अंतर्गत सात श्रेणियों में 16 पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • डिजिटल परिवर्तन के लिए सरकारी प्रक्रियाओं का पुनः अभियांत्रिकीकरण।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियाँ।
    • साइबर सुरक्षा।
    • जिला-स्तरीय पहलें।
    • जमीनी स्तर की पहलें।
    • सफल ई-गवर्नेंस परियोजनाओं का पुनरुत्पादन और विस्तार।
    • डिजिटल परिवर्तन के लिए डेटा विश्लेषण।

पेट्रोलियम निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स)

संदर्भ: केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर, 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोलियम निर्यात पर विंडफॉल टैक्स की दरों में संशोधन किया है। इसके तहत पेट्रोल पर कर बढ़ाया गया है, जबकि डीजल पर कर घटाया गया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹0.5 से बढ़ाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर शुल्क ₹16 से घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
  • विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क ₹10.5 प्रति लीटर पर अपरिवर्तित रखा गया है।
  • संशोधित दरें निर्यात पर लागू होती हैं। घरेलू खपत के लिए जारी किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर प्रत्येक पखवाड़े इन शुल्कों की समीक्षा करती है।

विंडफॉल टैक्स के बारे में

  • विंडफॉल टैक्स एक विशेष कर है, जो बाजार की अप्रत्याशित परिस्थितियों, जैसे वस्तुओं की कीमतों में अचानक वृद्धि, के कारण कंपनियों द्वारा अर्जित असामान्य रूप से अधिक लाभ पर लगाया जाता है।
  • भारत की व्यवस्था: सरकार पेट्रोलियम निर्यात को विनियमित करने के लिए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के रूप में निर्यात शुल्क के साथ-साथ सड़क एवं अवसंरचना उपकर का उपयोग करती है।
  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 27 मार्च, 2026 को डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क लागू किए गए थे। पेट्रोल निर्यात पर यह शुल्क 16 मई, 2026 को लागू किया गया था।

संशोधन के पीछे के कारण

  • घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना: निर्यात शुल्क अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करते हैं और पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त घरेलू आपूर्ति बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के अंतर का समाधान: इस शुल्क का उद्देश्य निर्यातकों को घरेलू कीमतों की तुलना में अधिक अंतर्राष्ट्रीय कीमतों का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है।
  • वैश्विक अनिश्चितता के प्रति प्रतिक्रिया: पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता उत्पन्न की है, जिसके कारण निर्यात शुल्क में समय-समय पर संशोधन करना आवश्यक हो गया है।
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