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सामान्य अध्ययन–2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुदृढ़ करने के लिए भारत और घाना ने नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा अकरा स्थित घाना की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद–फसल अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRI) के बीच पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- संयुक्त कृषि अनुसंधान: इस समझौता ज्ञापन के तहत संयुक्त अनुसंधान, वैज्ञानिक एवं तकनीकी आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा कृषि प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग और व्यावसायीकरण के लिए एक रूपरेखा प्रदान की गई है।

- घाना की अरिमा फार्म्स लिमिटेड, विशिष्ट अनुसंधान एवं व्यावसायीकरण गतिविधियों के लिए सीएसआईआर-सीआरआई के वाणिज्यिक भागीदार के रूप में कार्य करेगी।
- टमाटर अनुसंधान एवं विकास: पहले चरण में सब्जी फसलों के अनुसंधान, विशेष रूप से टमाटर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), प्रमाणित कृषि प्रौद्योगिकियों के विस्तार तथा उपयुक्त उच्च उपज देने वाली टमाटर की प्रजनन पंक्तियों और किस्मों को प्रस्तुत करने में सहयोग करेगी, ताकि घाना में घरेलू टमाटर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
- प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन: कृषि मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए कसावा, रतालू तथा अन्य कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में सहयोग किया जाएगा।
- कटाई-पश्चात प्रबंधन: कटाई-पश्चात होने वाली हानि को कम करने के लिए शीत भंडारण, प्रशीतित परिवहन, छँटाई, श्रेणीकरण तथा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों में तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
- वैज्ञानिक एवं संस्थागत आदान-प्रदान: इस समझौता ज्ञापन के तहत वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों, आनुवंशिक सामग्री, प्रजनन सामग्री, वैज्ञानिक सूचनाओं, कार्यप्रणालियों तथा तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा।
- दोनों देशों के अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएँ और संस्थागत संबंध सतत वैज्ञानिक सहयोग को सुगम बनाएँगे।
- कार्यान्वयन तंत्र: आईसीएआर और सीएसआईआर-सीआरआई के प्रतिनिधियों से मिलकर बना एक संयुक्त कार्य समूह प्रगति की समीक्षा करेगा और कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेगा।
- यह समूह समय-समय पर नई दिल्ली और अकरा में बैठक करेगा।
सहयोग का महत्त्व
- कृषिउत्पादकता:घाना में उच्च उपज देने वाली टमाटर की किस्मों और प्रमाणित कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सहायता करता है।
- कटाई-पश्चात होने वाली हानि में कमी: भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं में सुधार को बढ़ावा देता है।
- कृषि मूल्य श्रृंखलाएँ: कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करता है।प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: वैज्ञानिक सहयोग, क्षमता निर्माण तथा कृषि अनुसंधान के व्यावसायिक अनुप्रयोग को बढ़ावा करता है।सतत विकास: घाना में कृषि विकास और आजीविका में सुधार को समर्थन देता है।
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग: घाना के साथ भारत के जुड़ाव और व्यापक भारत-अफ्रीका सहयोग को आगे बढ़ाता है।

